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लेखक मोहम्मद को किया था उल्लेखित पर लगा दिया था ईशनिंदा का आरोप- टीजे जोसेफ

2010 में चर्च द्वारा दंडित किए गए कॉलेज के प्रोफेसर टीजे जोसेफ पर मुस्लिम समूहों द्वारा मोहम्मद की ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। इसके बाद भीड़ ने उनकी हथेली काट दी थी। 11 वर्ष बाद जोसेफ का संस्मरण, जो मूल रूप से मलयालम में था, का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया गया। इसे शीघ्र जारी किया जाएगा।

टीजे जोसेफ का कहना है, “कट्टरपंथी इस्लामी समूहों ने मेरे विरुद्ध एक अभियान शुरू किया था। असल में प्रश्न पत्र में उल्लेखित ‘मोहम्मद’ ने पीटी कुंजू मोहम्मद नाम के एक लेखक को संदर्भित किया था ना कि मोहम्मद को, जिन्हें मुस्लिम अपना पैगंबर मानते हैं।”

टीओआई को दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया, “विवाद के बाद चर्च और क्रिश्चियन कॉलेज का प्रबंधन, जिसमें मैंने पढ़ाया था, दोनों ने मेरी बजाय कट्टरपंथियों का पक्ष लिया था। सारा विवाद गलत बयानबाजी थी। कॉलेज ने ईशनिंदा और कॉलेज की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का आरोप लगाया और मुझे निलंबित कर दिया।”

जोसेफ ने बताया, “चर्च ने मेरे परिवार को बहिष्कृत कर दिया। इससे सिर्फ मेरी आय ही नहीं समाप्त हुई बल्कि मैं सबसे अलग-थलग पड़ गया। मित्रों ने भी चर्च को नाराज़ ना करने के डर से मुझसे मिलना बंद कर दिया था। एक समय हमारी आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो गई थी कि लोगों ने परिवार को दूध और अंडे तक दान किए थे। बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित थी।”

उन्हें नवंबर 2013 में बरी कर दिया गया था लेकिन फिर भी थोडुपुझा न्यूमैन कॉलेज ने उन्हें बहाल नहीं किया। इससे अवसाद से ग्रस्त उनकी पत्नी ने चार महीने बाद आत्महत्या कर ली। इस घटना से सार्वजनिक आक्रोश उत्पन्न हुआ और कॉलेज को उन्हें वापस लेने के लिए विविश होना पड़ा। हालाँकि, दो माह बाद ही उन्हें सेवानिवृत्त होना था।