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नेपाल की जनसंख्या में 80 वर्षों में सबसे कम 0.93 प्रतिशत वृद्धि देखी गई- रिपोर्ट

नौकरी और पढ़ाई को लेकर विदेश प्रवास की वजह से नेपाल की जनसंख्या में गत आठ दशक में सबसे कम 0.93 प्रतिशत वृद्धि देखी गई। यह जानकारी बुधवार को मीडिया रिपोर्टों में दी गई।

काठमांडू पोस्ट अखबार ने बताया कि राष्ट्रीय जनगणना 2021 के शुरुआती परिणाम, जो केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (सीबीएस) द्वारा सार्वजनिक किए गए थे, ने संकेत दिया कि नेपाल में जनसंख्या वृद्धि दर विश्व स्तर पर जनसंख्या की औसत वृद्धि दर से कम है।

रिपोर्ट में ब्यूरो के उप महानिदेशक हेम राज रेग्मी के हवाले से कहा गया, “नेपाल की जनसंख्या 29,192,480 पहुँच गई है। जनसंख्या में सबसे धीमी वृद्धि के पीछे मुख्य कारण नौकरी और पढ़ाई के लिए नेपालियों का विदेश प्रवास है।”

उन्होंने कहा, “2011 में हुई पिछली जनगणना में औसत जनसंख्या वृद्धि दर 1.35 प्रतिशत थी। 2011 की जनगणना के दौरान नेपाल की जनसंख्या 26,494,504 थी।” आँकड़ों के मुताबिक, 2,169,478 नेपाली विदेश में रह रहे हैं। इनमें 81.28 प्रतिशत पुरुष हैं।

रेग्मी ने कहा कि नेपाल में जनसंख्या वृद्धि दर विश्व स्तर पर जनसंख्या की औसत वृद्धि दर से कम है। विश्व बैंक के आँकड़ों के अनुसार वैश्विक औसत वार्षिक वृद्धि दर 1.01 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि ब्यूरो ने आगामी 6-7 माह के भीतर अंतिम जनगणना रिपोर्ट का अनावरण करने की योजना है। आँकड़ों से पता चलता है कि महिलाओं की आबादी 14,901,169, जबकि पुरुषों की संख्या 14,291,311 है।

माय रिपब्लिक पोर्ट के अनुसार, सीबीएस के महानिदेशक नेबिन लाल श्रेष्ठ ने कहा कि उन्होंने लिपुलेक, कालापानी और लिंपियाधुरा की जनगणना भी की और विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।

बता दें कि नेपाल मंत्रिमंडल ने गत वर्ष मई में भारत के साथ सीमा विवाद के मध्य लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने क्षेत्र में दिखाने वाले एक नए राजनीतिक मानचित्र का समर्थन किया था। इस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।