इन्फ्रास्ट्रक्चर
राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन कैसे एनआईपी के वित्तपोषण में करेगी सहयोग

केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (23 अगस्त) को ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी खंड 1 और 2)’ का शुभारंभ किया जो केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की परिसंपत्ति मुद्रीकरण पाइपलाइन है।

यह पाइपलाइन नीति आयोग द्वारा अवसंरचना से संबंधित मंत्रालयों के परामर्श से विकसित की गई है जो केंद्रीय बजट 2021-22 के तहत ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण’ से जुड़े अधिदेश पर आधारित है। एनएमपी के तहत वित्तीय वर्ष 2022 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025 तक की चार वर्ष की अवधि में केंद्र सरकार की मुख्‍य परिसंपत्तियों के माध्यम से 6 लाख करोड़ रुपये के कुल मुद्रीकरण की योजना है।

अब समझें कि इस मुद्रीकरण से प्राप्त राशि का उपयोग राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) के लिए कैसे किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 2019 के स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा की थी जिसमें अगले पाँच वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 लाख करोड़ रुपये के निवेश की बात कही गई थी।

यह अप्रैल और मई 2019 में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घोषणापत्र में किए गए वादों में से एक भी था। प्रधानमंत्री द्वारा घोषणा के बाद, इस निवेश की एक रूपरेखा तैयार करने के लिए वित्त मंत्रालय के भीतर एक कार्य बल का गठन किया गया था। वित्त मंत्रालय और नीति आयोग में आर्थिक मामलों और व्यय विभागों के अधिकारी इस कार्य बल का हिस्सा थे।

इस निकाय की रिपोर्ट पहली बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 31 दिसंबर 2019 को प्रस्तुत की थी। राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) नामक यह रिपोर्ट, क्षेत्रीय निवेश योजनाओं को सारभूत करती है और इस निवेश के माध्यम से प्राप्त करने के लिए एक विशिष्ट मिशन की रूपरेखा प्रस्तुत करती है।

अंतिम रिपोर्ट अप्रैल 2020 में प्रस्तुत की गई जिसमें कुल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का अनुमान 111 लाख करोड़ रुपये से अधिक का था जो शुरुआती 100 लाख करोड़ के आँकड़े से थोड़ा अधिक था। मुख्य रूप से चार क्षेत्रों पर निवेश होना है- ऊर्जा (24 प्रतिशत), सड़क (18 प्रतिशत), शहरी (17 प्रतिशत) और रेलवे (12 प्रतिशत) जो कुल निवेश का 71 प्रतिशत भाग बनाते हैं।

111 लाख करोड़ रुपये में से 44 लाख करोड़ रुपये (एनआईपी का 40 प्रतिशत) की परियोजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं, 33 लाख करोड़ (30 प्रतिशत) अवधारणा के स्तर पर हैं और 22 लाख करोड़ रुपये (20 प्रतिशत) विचाराधीन हैं। रिपोर्ट में वैश्विक मानकों के अनुसार राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्टर विकास और प्रशासनिक सुधारों की बात की गई है।

सड़क, रेलवे, बंदरगाह और हवाई अड्डे

एनआईपी का अनुमान है कि 36.66 लाख करोड़ रुपये का निवेश सड़क, रेलवे, बंदरगाह और हवाई अड्डों के इंफ्रास्ट्रक्टर पर होगा। रेलवे के लिए स्वस्थ निजी क्षेत्र की भागीदारी का विचार है जिसमें कुल मालवहन में वे 30 प्रतिशत योगदान करें, 500 निजी यात्री ट्रेनें हों और 750 स्टेशनों में से 30 प्रतिशत का निजीकरण किया जाए।

निजी क्षेत्र से रेलवे इंजन व डब्बे भी खरीदेगा। दो समर्पित मालवाहक गलियारे (पश्चिमी और पूर्वी) पूर्ण रूप से परिचालित हो जाएँगे और संभवतः पूर्व-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण, पूर्वी तट और दक्षिण-पूर्व डीएफसी का निर्माण एनआईपी के तहत किया जाएगा। पूरे नेटवर्क को विद्युतीकृत करने की भी योजना है। 14 प्रतिशत निवेश रेलवे के लिए होंगे।

सड़क क्षेत्र को 19 प्रतिशत निवेश मिलेंगे। लक्ष्य है कि राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई को डेढ़ गुना कर दिया है और 12 गुना एक्सप्रेसवे हों। भारतमाला परियोजना के तहत ये लक्ष्य प्राप्य लगते हैं। इसके अलावा सड़क स्वामित्व को सार्वजनिक प्राधिकरणों की बजाया परिसंपत्ति संग्रहकों और वित्तीय निवेशकों के पक्ष में झुकाया जाएगा।

ऊर्जा

भारत का उद्देश्य एनआईपी अवधि में 356 गीगावाट की वर्तमान स्थापित बिजली क्षमता को 619 गीगावाट तक ले जाना है। थर्मल प्रतिष्ठानों की भागीदारी 66 प्रतिशत से घटकर 50 प्रतिशत हो जाने की अपेक्षा है।

परमाणु ऊर्जा के लिए बताए गए निवेश दिलचस्प हैं। परमाणु ऊर्जा के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की योजना से भारत 15 गीगावाट तक की क्षमता को आसानी से जोड़ सकता है।

एनआईपी स्पष्ट रूप से वितरण में खुली पहुँच, नियमित शुल्क संशधन और स्मार्ट मीटर के उपयोग की बात करता है। ऊर्जा क्षेत्र को कुल निवेश का लगभग 24 प्रतिशत मिलेगा।

शहरी और आवास

यह प्रदर्शन परियोजनाओं के लिए एक बड़ा ध्यान देने वाला क्षेत्र है क्योंकि बढ़ता शहरीकरण ही एनआईपी का प्राथमिक चालक है। एनआईपी निवेश का लगभग 16 प्रतिशत शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और आवास कार्यक्रमों को चलाने की दिशा में जाएगा।

100 प्रतिशत शहरी और ग्रामीण घरों में पाइप द्वारा जलापूर्ति करना सरकार का लक्ष्य है। 100 प्रतिशत नगरीय कचरे के उपचारित होने की अपेक्षा है। 25 से अधिक शहरों को परिचालन मेट्रो परियोजनाएँ मिलेंगी। किफायती आवास परियोजनाएँ आकर्षण का केंद्र बनी रहेंगी।

एनआईपी का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में सम्मिलित बातों पर एक व्यापक दृष्टिकोण है। उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, खेल और पर्यटन जैसे सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों पर भी विशेष रूप से बात की गई है।

एनआईपी का वित्तपोषण और एनएमपी की आवश्यकता

कई स्रोतों से एनआईपी का वित्तपोषण किया जा रहा है। केंद्र के बजट से 18-20 प्रतिशत वित्तपोषण होगा, राज्य के बजट से 24-26 प्रतिशत, 31 प्रतिशत बॉन्ड मार्केट, बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों से ऋण के रूप में उठाए जाएँगे; निजी डवलपर्स से इक्विटी, बहुपक्षीय और द्विपक्षीय एजेंसियों से बाहरी सहायता और पीएसयू के आंतरिक से प्रोद्भवन से 4-10 प्रतिशत वित्तपोषण होगा।

इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2020 से 2025 के बीच 83-85 प्रतिशत पूँजी व्यय प्राप्त किया जा सकेगा। जो अंतर रह गया है उसे नए वित्त विकास संस्थानों (डीएफआई) को स्थापित करके और परिसंपत्ति मुद्रीकरण से केंद्रीय व राज्य के स्तर पर परिचालित परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण करके प्राप्त किया जा सकता है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने 20,000 करोड़ रुपये तक की पूँजी के वित्त विकास संस्थानों (डीएफआई) की स्थापना के लिए एक विधेयक की घोषणा की थी। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा था कि तीन वर्षों में डीएफआई के लिए कम-से-कम 5 लाख करोड़ रुपये के ऋण का पोर्टफोलियो तैयार करने की महत्वाकांक्षा है। दोनों ही सदनों में यह विधेयक पारित हो चुका है।

डीएफआई का नाम इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तपोषण एवं विकास हेतु राष्ट्रीय बैंक है जो नई परियोजनाओं में निवेश के लिए वैश्विक पेन्शन एवं बीमा क्षेत्रों से वित्त इकट्ठा करेगा और कुछ कर लाभ देगा। वहीं, एनआईपी के कुल वित्तपोषण में 5.4 प्रतिशत का योगदान परिसंपत्ति मुद्रीकरण से होगा।

“मुद्रीकरण के माध्यम से सृजन के दर्शन पर आधारित परिसंपत्ति मुद्रीकरण का उद्देश्य नई आधारभूत ढाँचागत सुविधाओं या अवसंरचना के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र के निवेश का उपयोग करना है।”, सीतारमण ने बताया कि इससे आर्थिक विकास की गति को तेज करने के साथ-साथ समग्र जन कल्याण के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को निर्बाध रूप से एकीकृत करना भी संभव हो सकेगा।

मूल्य के आधार पर वार्षिक चरण के संदर्भ में 88,000 करोड़ रुपये के अनुमानित मूल्य वाली 15 प्रतिशत संपत्तियों के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष में एनएमपी लागू करने की कल्पना की गई है। क्षेत्रवार देखें तो पाँच प्रमुख क्षेत्रों की 83 प्रतिशत भागीदारी है- सड़क (27 प्रतिशत), रेलवे (25 प्रतिशत), बिजली (15 प्रतिशत), तेल एवं गैस पाइपलान (8 प्रतिशत) और दूरसंचार (6 प्रतिशत)।

विनिवेश के माध्यम से मुद्रीकरण और गैर-प्रमुख संपत्तियों के मुद्रीकरण को एनएमपी में सम्मिलित नहीं किया गया है। इसके अलावा, वर्तमान में, केवल केंद्र सरकार के मंत्रालयों और अवसंरचना से जुड़े केन्द्रीय उपक्रमों (सीपीएसई) की परिसंपत्तियों को सम्मिलित किया गया है।

यह लेख आशीष चंदोरकर की सहायता से उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिखा गया है।