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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- कुल प्रजनन दर पहली बार प्रतिस्थापन स्तर से नीचे

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 के निष्कर्ष जारी किए। एनएचएफएस भारत के राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जनसंख्या, स्वास्थ्य और पोषण की जानकारी प्रदान करता है।

सर्वेक्षण से पता चलता है कि कुल प्रजनन दर (प्रति महिला बच्चे) 2015-16 में 2.2 से गिरकर 2 हो गई है, जो कि 2.1 की प्रजनन दर की प्रतिस्थापन दर (संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या प्रभाग द्वारा अनुमानित) से कम है। प्रतिस्थापन दर प्रजनन क्षमता का वह स्तर है, जिस पर जनसंख्या एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में अपने आप को बिल्कुल परिवर्तित कर लेती है। इसके नीचे जाने से जनसंख्या में गिरावट शुरू होने की अपेक्षा है।

शहरी क्षेत्रों के लिए टीएफआर 1.6 और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 2 है। इसका अर्थ है कि भारत की जनसंख्या की उच्च वृद्धि की समस्या अब बड़ी चिंता का विषय नहीं है और जनसंख्या को नियंत्रित करने हेतु विधायी उपाय प्रतिकूल हो सकते हैं।

विगत 5 वर्षों में परिवार नियोजन विधियों के उपयोग में 53.5 प्रतिशत से 66.7 प्रतिशत की पर्याप्त वृद्धि हुई है। वर्तमान में 20-24 वर्ष की आयु की महिलाओं का प्रतिशत, जिन्होंने 18 वर्ष से पहले विवाह किया, भी 26.8 प्रतिशत से घटकर 23.3 प्रतिशत हो गया है।

अधिकतर राज्यों में किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में टीएफआर में कमी देखी जा सकती है। अरुणाचल प्रदेश में टीएफआर में 2.1 से 1.8, छत्तीसगढ़ में 2.2 से 1.8, हरियाणा में 2.1 से 1.9, झारखंड में 2.6 से 2.3, मध्य प्रदेश में 2.3 से 2, ओडिशा में 2.1 से 1.8, राजस्थान में 2.4 से 2 की गिरावट देखी गई है।

सर्वाधिक टीआरएफ में गिरावट उप्र में 2.7 से 2.4, उत्तराखंड में 2.1 से 1.9, चंडीगढ़ में 1.6 से 1.4, दिल्ली में 1.8 से 1.6 और पुदुचेरी में 1.7 से 1.5 तक दर्ज की गई है। केवल पंजाब में टीएफआर 1.6 पर स्थिर रहा और तमिलनाडु एकमात्र अपवाद है, जहाँ 1.7 से 1.8 तक की मामूली वृद्धि देखी गई।