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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ईशनिंदा कानून की मांग संग यूसीसी ना लगाने का आग्रह किया

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने रविवार को  मुहम्मद, जिन्हें मुसलमान अपना पैगंबर मानते हैं और पवित्र धार्मिक महापुरुषों का अनादर करने वालों को दंडित करने के लिए ईशनिंदा विरोधी कानून बनाने की मांग की। साथ ही सरकार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समान नागरिक संहिता ना लगाने का आग्रह किया।

रूढ़िवादी मुस्लिम निकाय, जो समुदाय के मामलों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, ने भी सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक और शत्रुतापूर्ण पोस्ट और अराजक तत्वों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की।

कानपुर में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लगभग 200 सदस्यों ने भाग लिया, जिसमें ये मांगें दो दिवसीय सम्मेलन में अपनाए गए प्रस्ताव का भाग हैं।

प्रस्ताव में कहा गया, “सम्मानित हिंदू, सिख और अन्य गैर-मुस्लिम विद्वानों ने लगातार मुहम्मद की महानता को स्वीकार किया। इसी प्रकार इस्लाम की शिक्षाओं के अनुरूप मुसलमानों ने भी अन्य धर्मों के सम्मानजनक महापुरुषों के बारे में किसी भी आपत्तिजनक शब्द को ज़िम्मेदार ठहराने से दूर रहा। हालाँकि, यह बहुत खेदजनक है कि हाल ही में कुछ शरारती तत्वों ने खुले तौर पर मुहम्मद का अपमान किया, जबकि सरकार ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया।”

प्रस्ताव में बल दिया गया कि सांप्रदायिक ताकतों का यह रवैया पूरी तरह से अस्वीकार्य है।एआईएमपीएलबी के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता संरक्षण और व्यक्तिगत कानूनों की समिति के संयोजक एस क्यू आर इलियास ने कहा, “सरकार को इस मुद्दे से निपटने के लिए प्रभावी कानून बनाना चाहिए।” प्रस्ताव में मुहम्मद के अलावा किसी अन्य धार्मिक व्यक्ति का नाम नहीं था।

समान नागरिक संहिता पर रूढ़िवादी निकाय ने कहा, “यूसीसी भारत जैसे बहु-धार्मिक देश के लिए न तो उपयुक्त है और न ही उपयोगी।” एआईएमपीएलबी ने यह भी कहा कि गत कुछ वर्षों में मुसलमानों के विरुद्ध जहरीला प्रचार किया गया।