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जापान भारतीय परिस्थितियों के लिए बुलेट ट्रेनों को संशोधित करेगा, परीक्षण 2026 से

जापान की हाई-स्पीड शिंकानसेन ट्रेनों को देश की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए भारत भेजे जाने से पहले तापमान, धूल और वजन जैसी भारतीय परिस्थितियों के लिए संशोधित किया जाएगा।

नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के प्रबंध निदेशक सतीश अग्निहोत्री ने बताया कि यह परियोजना 2027 में सूरत-बिलिमोरा के मध्य 48 किलोमीटर के खंड को पूरा करने के लिए तैयार है, जिसका पहला परीक्षण एक साल पहले किया जाएगा।

सतीश अग्निहोत्री ने कहा, “हालाँकि, भूमि अधिग्रहण के मुद्दों के कारण परियोजना महाराष्ट्र में अटकी हुई है। हमें वर्तमान में जापान में चल रही ई5 शिंकानसेन शृंखला की ट्रेनें मिलेंगी। हम धूल और तापमान के मामले में उन्हें भारतीय परिस्थितियों में उन्नत करने के लिए अध्ययन कर रहे हैं।”

ई5 शृंखला हिटाची और कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा निर्मित जापानी शिंकानसेन हाई-स्पीड ट्रेन का प्रकार है। वह 320 किमी प्रति घंटे की गति से चलने में सक्षम है और 3.35 मीटर चौड़ी है। ऐसी ट्रेनों में सबसे चौड़ी फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में हैं।

सूत्रों ने कहा कि एक और पहलू है, जिस पर जापानी काम कर रहे हैं, वह यह सुनिश्चित करना कि ट्रेनें भारतीय वजन ढो सकती हैं क्या, क्योंकि जापानी हल्के होते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जापान शुरू में छह ट्रेनें भेजेगा, जो भारतीय विनिर्देशों के अनुसार संशोधित की गई हैं।

अधिकारियों ने कहा कि संशोधनों के पूरा होने के बाद वास्तविक आदेश दिए जाएँगे।

परियोजना के बारे में बात करते हुए भारत में जापानी राजदूत सतोशी सुजुकी ने कहा, “हम वही ई5 शृंखला साझा करेंगे क्योंकि यह शृंखला कई वर्षों से परिचालन में है। इस वजह से जब तक भारत के पास बुलेट ट्रेन होगी तो हम सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें नवीनतम तकनीक मिले।”

उन्होंने कहा, “ट्रेनों की यह शृंखला विभिन्न सुरक्षा उपायों से सुसज्जित है। इसमें भूकंपरोधी तकनीक है।”