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मोपला स्वतंत्रता संग्राम का भाग नहीं, 389 विद्रोहियों का नाम शहीदों के शब्दकोश से बाहर

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों के शब्दकोश से मोपला विद्रोह के नेताओं वरियमकुनाथ कुनहमेद हाजी, अली मुस्लीयर और 387 अन्य ‘मोपला शहीदों’ के नाम हटाने के लिए केंद्र सरकार तैयार है। शब्दकोश संयुक्त रूप से संस्कृति मंत्रालय और भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) द्वारा प्रकाशित किया जाता है।

आईसीएचआर की स्थापना करने वाली तीन सदस्यीय समिति, जिसने शब्दकोश के पाँचवें खंड में प्रविष्टियों की समीक्षा की, ने कथित तौर पर कहा कि 1921 का विद्रोह कभी स्वतंत्रता संग्राम का भाग नहीं था बल्कि धार्मिक रूपांतरण पर केंद्रित एक कट्टरपंथी आंदोलन था।

द हिंदू की रिपोर्ट में कहा गया कि दंगाइयों द्वारा दिए गए नारे राष्ट्रवाद और ब्रिटिश विरोध के पक्ष में नहीं थे। समिति ने नोट किया कि विद्रोह खिलाफत स्थापित करने का एक प्रयास था। सूत्रों के हवाले से कहा गया कि यदि आंदोलन सफल होता तो इस क्षेत्र में भी एक खिलाफत स्थापित हो जाता और भारत अपने क्षेत्र से उस भाग को खो देता।

इसके अतिरिक्त, समिति ने निष्कर्ष निकाला कि हाजी एक दंगाई था। उसने एक शरिया न्यायालय की स्थापना की और बड़ी संख्या में हिंदुओं का सिर धड़ से अलग किया। दंगाइयों के हाथों जो मारे गए थे, वे इस्लाम को न मानने वाले लोग थे।

समिति ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में कथित मोपला शहीद, जो विचाराधीन कैदी थे, हैजा जैसी बीमारियों और प्राकृतिक कारणों से मारे गए थे। इस वजह से उन्हें शहीद नहीं माना जा सकता है। उनमें से कुछ को ही सरकार ने न्यायालय की सुनवाई के बाद फाँसी दी थी।