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कर्नाटक में मदरसे के विद्यार्थी ने सांप्रदायिक हमले की मनगढ़ंत कहानी बनानी स्वीकारी

इस सप्ताह की शुरुआत में कर्नाटक पुलिस ने एक मामला दर्ज किया था कि मदरसे से लौट रहे एक नाबालिग मुस्लिम लड़के पर दूसरे धर्म के दो लोगों ने हमला किया। इसमें उसके साथ दुर्व्यवहार किया व कपड़े भी फाड़ दिए।

इस घटना से मेंगलुरु के सुरथकल, कृष्णापुरा और होसाबेट्टू क्षेत्रों में सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो गया था।

जाँच के बाद पुलिस ने बताया कि लड़के ने कहानी गढ़ी थी और उसके साथ कभी मारपीट नहीं हुई थी।

विभिन्न समाचार पत्रों ने मंगलुरु के पुलिस आयुक्त एन शशि कुमार के हवाले से कहा कि लड़के ने अपनी कलम से शर्ट फाड़ दी थी। उसने कहानी इसलिए गढ़ी क्योंकि घर और स्कूल में उस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा था।

टीओआई ने पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा, “तेजी से जाँच की गई और परिस्थितिजन्य गवाहों सहित अन्य सबूत एकत्र किए। सीसीटीवी फुटेज भी देखे। इस बीच, मैंने और मेरी टीम ने बाल कल्याण समिति के प्रतिनिधियों और एक डॉक्टर की उपस्थिति में लड़के से बात भी की।”

उन्होंने बताया, “दरअसल, लड़के को सीखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा और वह पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा है। स्कूल में उसके करीबी मित्र नहीं थे। वह यह भी महसूस करता है कि उसकी गहरे रंग की त्वचा और खराब शैक्षणिक कौशल के कारण कक्षा में उसकी उपेक्षा की जा रही है। माता-पिता भी उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं।”

13 साल का लड़का सुरथलाल क्षेत्र के मदरसे के साथ स्थानीय स्कूल में भी पढ़ता है। कर्नाटक पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज उसके आरोप से मेल नहीं खाए।

लड़के ने पहले कहा था कि सोमवार को चक्रवर्ती मैदान के पास रात में उसके  साथ मारपीट हुई । अभिभावक की शिकायत पर सूरथकल पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हुआ था। गुरुवार को उसने झूठ बोलना स्वीकारा।