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मेट्रो रेल परियोजनाएँ आगामी 5 वर्षों में कंपनियों को ₹80,000 करोड़ का व्यवसाय देंगी

मजबूत आपूर्ति पाइपलाइन को देखते हुए मेट्रो रेल खंड में निर्माण संस्थाओं के पास आगामी 5 वर्षों में 80,000 करोड़ रुपये की व्यावसायिक क्षमता है।

आईसीआरए ने जानकारी दी, “वर्तमान में दो लाख करोड़ रुपये की लगभग 1,400 किलोमीटर की मेट्रो रेल परियोजनाएँ अनुमोदन/प्रस्ताव के चरण में हैं। वर्तमान में अनुमोदन/प्रस्ताव चरण के अंतर्गत ये परियोजनाएँ सिविल निर्माण उद्योग के लिए लगभग 80,000 करोड़ रुपये के व्यापार अवसर में तब्दील हो जाएँगी।”

इसके अतिरिक्त, आईसीआरए ने अपनी शोध रिपोर्ट में प्रतिस्पर्धा के कम रहने का अनुमान लगाया था। साथ ही वर्तमान में इसकी व्यावसायिक क्षमता के प्रमुख रूप से लाभान्वित रहने की संभावना जताई है।

आईसीआरए ने कहा, “सड़क खंड के विपरीत, जिसने हाल के दिनों में ईपीसी खंड में अधिकतर बोलियों के साथ भारी प्रतिस्पर्धा देखी है, मेट्रो रेल खंड में प्रतिभागियों के मध्य अपेक्षाकृत बेहतर मूल्य निर्धारण/बोली अनुशासन देखा गया है। गत 15 माह में लगभग 58 प्रतिशत मेट्रो रेल परियोजनाओं को आधार मूल्य से अधिक प्रीमियम पर प्रदान करने के साथ 14 प्रतिशत परियोजनाओं को 20 प्रतिशत से अधिक के प्रीमियम पर प्रदान किया गया।

इसमें कहा गया कि बड़ी संख्या में मेट्रो रेल परियोजनाओं को बहुपक्षीय एजेंसियों द्वारा वित्त पोषित किया जाता है, जिससे सरकार पर वित्तपोषण का बोझ कम करने व परियोजना के तेजी से विस्तार में सहायता मिली है।

भारत वर्तमान में 15 शहरों में लगभग 746 किलोमीटर के मेट्रो नेटवर्क का संचालन कर रहा है। आईसीआरए का अनुमान है कि आगामी 5 वर्षों में यह सीमा बढ़कर लगभग 1,900 किलोमीटर हो जाएगी।

वर्तमान में लगभग 991 किलोमीटर की मेट्रो रेल परियोजना निर्माणाधीन या अनुमोदन चरण में है और लगभग 1,040 किमी प्रस्ताव चरण में है।