अर्थव्यवस्था
रोजगार के अवसर सकारात्मक लेकिन वांछित कौशल वाले कर्मचारी मिलना कठिन- रिपोर्ट

मैनपावर समूह ने हाल ही में अपने एम्पलॉयमेन्ट आउटलुक सर्वे की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट को 43 देशों के 45,000 नियोक्ताओं से 2021 की चौथी तिमाही के लिए उनकी नियुक्ति योजनाओं पर बात करके तैयार किया गया है।

सर्वेक्षण में पाया गया कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के शुरू होने के बाद से नियुक्तियों की मंशा अब तक के सर्वोत्तम स्तर पर है। मैनपावर समूह के अध्यक्ष और सीईओ जोनस प्राइज़िंग कहते हैं, “पिछली किसी भी वापसी से यह बेहतर है, पिछली आर्थिक मंदी के बाद से नियुक्ति की मंशा काफी तेज़ी से बढ़ रही है।”

15 देशों में तो नियुक्ति मंशा 1962 (जब से सर्वेक्षण आरंभ हुआ) से अब तक के सर्वोत्तम स्तर पर है। वहीं, भारतीयों के लिए सुखद समाचार यह है कि कोविड आरंभ से अब तक सर्वाधिक वृद्धि दिखाने वाले शीर्ष तीन देशों में भारत है। 48 प्रतिशत वृद्धि के साथ यूएस शीर्ष पर, 44 प्रतिशत के साथ भारत दूसरे व 40 प्रतिशत के साथ कनाडा तीसरे स्थान पर है।

यदि हम पिछले वर्ष-दर-वर्ष तुलना करें तो 41 प्रतिशत के साथ सर्वाधिक वृद्धि नीदरलैंड्स में होगी। वहीं भारत और यूके में क्रमशः 40 और 39 प्रतिशत की वृद्धि देखी जाएगी। साथ ही, गत तिमाही से तुलना करें तो भारत में 37 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि होगी।

लेकिन भारत के लिए चिंता का विषय यह है कि वांछित कौशल के कर्मचारी ढूंढने में नियोक्ता चुनौती का सामना करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में औसत रूप से 69 प्रतिशत नियोक्ता वांछित कौशल के कर्मचारी ढूंढने में चुनौतियों का सामना करते हैं। यह आँकड़ा 15 वर्षों में सर्वाधिक है और लगातार दो तिमाहियों से बरकरार है।

भारत को सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण नियुक्ति वाले देशों की श्रेणी में डाला गया है और इन देशों का औसत 79.8 प्रतिशत है। यानी, भारत में 79.8 प्रतिशत नियुक्ताओं को वांछित कौशल के कर्मचारी ढूंढने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

रिपोर्ट में वे क्षेत्र भी बताए गए हैं जिनमें नियुक्ति सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण है। वैश्विक रूप से विनिर्माण में 72 प्रतिशत, वित्त, बीमा, अचल संपत्ति और व्यापार सेवाओं में 71 प्रतिशत एवं परिवहन, भंडारण, संचार और सार्वजनिक सुविधाओं में 69 प्रतिशत नियोक्ता चुनौती का सामना करते हैं।

इसलिए अपने पास वांछित कौशल के कर्मचारी रखने के लिए नियोक्ता कुछ प्रयास भी कर रहे हैं जैसे 41 प्रतिशत नियोक्ता अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण देते हैं या उनका कौशल विकास करते हैं। अभ्यर्थियों को रिझाने के लिए 39 प्रतिशत नियोक्ता लचीला कार्य समय और 31 प्रतिशत नियोक्ता अधिक वेतन दे रहे हैं।

सर्वाधिक प्रोत्साहन वे संगठन दे रहे हैं जो वांछित कौशल के कर्मचारी नियुक्त करने में सर्वाधिक चुनौती का सामना कर रहे हैं। जैसे 31 प्रतिशत नियोक्ता अधिक वेतन दे रहे हैं, लेकिन चुनौती का सामना करने वाले संगठनों में यह आँकड़ा 39 प्रतिशत का है।

उसी प्रकार, 41 प्रतिशत नियोक्ता कर्मचारियों को प्रशिक्षित करते हैं लेकिन चुनौती का सामना करने वाले संगठनों में यह आँकड़ा 48 प्रतिशत का है। लचीला कार्य समय देने में भी 39 प्रतिशत के औसत से आगे बढ़कर ऐसे 45 प्रतिशत नियोक्ता कर्मचारियों को यह सुविधा दे रहे हैं।

सर्वाधिक प्रोत्साहन वित्त, बीमा, अचल संपत्ति और व्यापार सेवाओं के क्षेत्र में देखने को मिल रहा है जहाँ 45 प्रतिशत नियोक्ता प्रशिक्षण, 37 प्रतिशत नियोक्त लचीला कार्य स्थान और 45 प्रतिशत नियोक्ता लचीला कार्य समय की सुविधाएँ दे रहे हैं।

कौशल विकास के लिए छह सप्ताह या उससे कम अवधि के प्रशिक्षण नियोक्ताओं की पसंद बने हुए हैं। 69 प्रतिशत नियोक्ता अपने कर्मचारियों को तकनीकी व व्यक्तिगत कौशल का प्रशिक्षण देते हैं। उत्तरी अमेरिका में विविधता एवं समावेशिता प्रशिक्षण कौशल विकास का एक महत्त्वपूर्ण भाग माना जाता है।

वहीं, दक्षिण व मध्य अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व व अफ्रीका और एशिया पैसिफिक में अनुपालन सहित अनिवार्य प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाती है। प्रबंधन एवं नेतृत्व कौशल विकास प्रशिक्षण भी सभी देशों में प्रचलित हो गया है।

विश्व के अन्य देशों की स्थिति

एशिया पैसिफिक क्षेत्र में सात देशों का अध्ययन किया गया था जिसमें वर्ष-दर-वर्ष नियुक्ति मंशा में 37 प्रतिशत के साथ भारत ने सर्वाधिक वृद्धि दिखाई है। वहीं, क्रमशः 7 और 5 प्रतिशत के साथ हॉन्ग कॉन्ग व जापान दूसरे व तीसरे स्थान पर हैं।

लेकिन शेष चार देशों में यह आँकड़ नकारात्मक है। सिंगापुर में नियुक्ति मंशा में 13 प्रतिशत की सर्वाधिक गिरावट देखी गई है, वहीं ऑस्ट्रेलिया, चीन और ताइवान में क्रमशः 4, 2 और 2 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान रिपोर्ट में लगाया गया है।

उत्तर अमेरिका के तीनों देशों- यूएस, कनाडा और मेक्सिको में नियुक्ति मंशा में क्रमशः 48, 40 और 39 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं, दक्षिण अमेरिका के पनामा में 2 प्रतिशत की गिरावट व अर्जेंटिना एवं पेरु में क्रमशः मात्र 4 और 5 प्रतिशत की वृद्धि है।

यूरोप को देखें तो नीदरलैंड्स, फ्रांस और आयरलैंड क्रमशः 40, 37 और 34 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि नियुक्ति मंशा में दर्शा रहे हैं। वहीं, स्विट्ज़रलैंड एवं क्रोएशिया में क्रमशः मात्र 8 और 2 प्रतिशत की वृद्धि है। दक्षिण अफ्रीका में रिपोर्ट 2 प्रतिशत की गिरावट बताती है।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।