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नहीं रहे वाजपेयी: पढ़िए उनके पांच सबसे दमदार कथन

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लंबे समय तक बीमारी से जूझने के बाद गुरुवार (16 अगस्त) को अपनी अंतिम सांस ली, उनके गंभीर रूप से बीमार होने के कारण उन्हें नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था।

भारत के महानतम राजनेताओं में से एक अटल जी को याद रखने के लिए, यहां उनके पांच सबसे दमदार उद्धरण पेश हैं:

“हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि राष्ट्रहित के लिए जो काम हमने अपने हाथ में लिया है उसे जबतक पूरा नहीं कर लेते तब तक आराम से नहीं बैठेंगे। माननीय अध्यक्ष महोदय मैं अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति महोदय को देने जा रहा हूं।”

1996 में उनकी 13 दिन की सरकार गिरने के बाद लोकसभा में वाजपेयी जी

“हमारे लक्ष्य भले ही अंतहीन आसमान से ऊंचे हों लेकिन हमें दिमाग में ये बात रखनी चाहिए कि हमें हाथ से हाथ मिलाकर चलना है और जीत हासिल करनी है।”

2002 में गणतंत्र दिवस के मौके पर वाजपेयी जी का राष्ट्र को संवोधन

“हम तीन हमलों के पीड़ित हैं। यह भाग्य दोहराना नहीं चाहिए। हम किसी पर हमला करने की तैयारी नहीं कर रहे हैं। हमारा यह इरादा नहीं है। मुझसे पोखरण -2 और लाहौर बस सेवा के बीच संबंध के बारे में पूछा गया था। वे एक ही सिक्के के दो पहलू हैं – हमारी रक्षा की ताकत और दोस्ती का हाथ – ईमानदारी के माध्यम से दोस्ती का हाथ।”

पोखरण में परमाणु परीक्षणों के बाद लोकसभा में वाजपेयी जी का भाषण

“मेरा भारत के लिए एक सपना है: भूख और भय से मुक्त एक भारत, अभाव और निरक्षरता से मुक्त एक भारत। मैं एक ऐसे भारत का सपना देख रहा हूँ जो समृद्ध, सशक्त और चिंता मुक्त हो। एक भारत, जो अपने शिष्टाचार से महान देशों की मंडली में गौरवपूर्ण स्थान पर आ सके।”

वाजपेयी ने 1999 के स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान

“मेरा कवि ह्रदय मुझे उन राजनीतिक समस्याओं का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है, जो मेरे विवेक पर असर डालती हैं।”