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यूक्रेन से लौटी छात्रा अंशिका बोलीं- “अधिकारियों ने विद्यार्थियों को लात मारी और घसीटा”

यूक्रेन छोड़ने का प्रयास कर रहे भारतीयों को देश की सीमा पर मौजूद अधिकारियों ने लात मारी और घसीटा। एक छात्रा ने यह दावा किया है। उसने बताया कि स्थानीय लोगों ने उनकी काफी सहायता की है।

यूक्रेन के विनितसिया में एमबीबीएस की तृतीय वर्ष की छात्रा अंशिका मंगलवार रात करीब 11 बजे दिल्ली पहुँचीं और बुधवार को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में अपने घर पहुँचीं।

पीटीआई को उन्होंने बताया, “मैंने भारत लौटने की सभी उम्मीदें छोड़ दी थीं क्योंकि वहाँ स्थिति गंभीर थी। हम सब एक-दूसरे को सांत्वना दे रहे थे और दर्द बाँट रहे थे।”

अब अंशिका युद्धग्रस्त देश से हजारों किलोमीटर दूर हैं लेकिन वहाँ की स्थिति से वह इतना सहम गईं कि सायरन की आवाज से भी बुरी तरह सहम जाती हैं।

उसके पिता अमीर सिंह यादव, जो एक कॉलेज में प्रिंसिपल हैं, कहते हैं, “अंशिका जोर से हॉर्न या सायरन की आवाज सहन नहीं कर सकती है।”

वहाँ से निकलने के बारे में अंशिका ने बताया, “26 फरवरी को मैं 50 अन्य विद्यार्थियों के साथ विनितसिया से चेर्नित्सि के लिए एक बस में सवार हुई और लगभग 10 घंटे की यात्रा के बाद रात में वहाँ पहुंची। सुबह की प्रतीक्षा किए बिना हम रोमानियाई सीमा तक पहुँचने के लिए 6 किलोमीटर तक चलकर गए।”

उन्होंने कहा, “गोलीबारी की आवाज ने हमें डरा दिया। हम रोमानिया सीमा की ओर चल रहे थे और भगवान् से प्रार्थना कर रहे थे। सीमा पार करने की बेताबी में कुछ विद्यार्थी नीचे गिर गए। इससे वे चोटिल होकर चलने में असमर्थ हो गए। हालाँकि, वे दूसरों की मदद लेने के बाद ही आगे बढ़े।”

अंशिका ने आगे कहा, “सीमा पर यूक्रेनी अधिकारियों ने टेरनोपिल और इवानो शहरों से आने वालों को पहले सीमा पार करवाई और तभी किसी ने विद्यार्थियों को धक्का दे दिया, जिससे एक छात्रा घायल हो गई। रोमानियाई सेना ने हवा में फायरिंग भी की।”

उन्होंने कहा, “इसके बाद जो विद्यार्थी नीचे गिर गए थे, उन्हें यूक्रेन के अधिकारियों ने लात मारी और घसीटा भी। हालाँकि, यूक्रेन के नागिरकों ने हमारी बहुत सहायता की। फिर हमें रोमानिया में प्रवेश मिला और हमें भोजन, पानी और एक कंबल दिया गया। उनका (रोमानियाई) व्यवहार काफी अच्छा था।”