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राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के विरुद्ध श्रीलंकाई संसद में विफल हो गया अविश्वास प्रस्ताव

श्रीलंका में आर्थिक संकट के मध्य राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के विरुद्ध विपक्ष द्वारा संसद में प्रस्तुत किया गया अविश्वास प्रस्ताव मंगलवार को विफल हो गया।

दि इकोनॉमी नेक्स्ट अखबार ने बताया कि विपक्षी तमिल नेशनल एलायंस (टीएनए) के सांसद एमए सुमंथिरन द्वारा राष्ट्रपति राजपक्षे को लेकर नाराज़गी जताने वाले मसौदे पर बहस के लिए संसद के स्थायी आदेशों को निलंबित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था।

राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के पक्ष में 119 सांसदों ने वोट किया, जबकि अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में सिर्फ 68 सांसदों ने अपने मत डाले।

रिपोर्ट में कहा गया कि प्रस्ताव के साथ विपक्ष ने यह दिखाने का प्रयास किया कि राष्ट्रपति राजपक्षे के त्याग-पत्र की देशव्यापी मांग देश की विधायिका में कैसे परिलक्षित होती है।

मुख्य विपक्षी दल समागी जन बालवेगया (एसजेबी) के सांसद लक्ष्मण किरीला ने प्रस्ताव का समर्थन किया था। एसजेबी सांसद हर्षा डी सिल्वा के अनुसार, प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने वालों में श्रीलंका के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे भी सम्मिलित थे।

मानवाधिकार वकील भवानी फोन्सेका ने मतदान के बाद ट्वीट किया, “प्रस्ताव की हार ने उन सांसदों का खुलासा किया, जो राष्ट्रपति राजपक्षे को बचाने के लिए समर्थन करते हैं।”

नए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की नियुक्ति के बाद मंगलवार को पहली बार संसद की बैठक हुई क्योंकि देश सबसे खराब आर्थिक संकट के मध्य बड़े संवैधानिक सुधारों को आरंभ करना चाहता है।

बता दें कि श्रीलंका अब तक के सबसे बड़े आर्थिक संकट से गुज़र रहा है। दरअसल, राजपक्षे सरकार ने जैविक खेती के पक्ष में रासायनिक उर्वरक आयात पर प्रतिबंध लगाने और अंतर-राष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर जाने का विरोध करने जैसे कुछ मनमाने निर्णय लिए थे।

इनकी वजह से 1948 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता के बाद से देश में सबसे खराब आर्थिक हालात उत्पन्न हुए हैं।