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बीआरओ ने लद्दाख में पाँच प्रमुख सड़क परियोजनाओं का निर्माण शुरू किया

लद्दाख में संयोजकता बढ़ाने हेतु सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने शुक्रवार (1 अक्टूबर) को केंद्र शासित प्रदेश में पाँच प्रमुख सड़क परियोजनाओं का निर्माण आरंभ किया। इनको लद्दाख के उपराज्यपाल राधा कृष्ण माथुर ने तुरतुक से लॉन्च किया था, जो भारत का सबसे उत्तरी गाँव है।

शिलान्यास समारोह में लेह के मुख्य कार्यकारी पार्षद ताशी ग्यालसन, लद्दाख के सांसद जामयांग त्सेरिंग नामग्याल, रक्षा सचिव अजय कुमार और बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी के अतिरिक्त ग्रामीण भी सम्मिलित हुए।

लद्दाख प्रशासन और बीआरओ के मध्य 3 सितंबर 2021 को हस्ताक्षरित समझौते के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में संयोजकता के विकास के लिए सड़कों और सुरंगों के निर्माण-सुधार से संबंधित परियोजनाओं को बीआरओ को सौंपा गया था।

रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, इन परियोजनाओं में ग्रीनफील्ड संरेखण की तैयारी और प्रमुख एकल लेन सड़कों को दोहरे-लेन (एनएचडीएल विनिर्देश) में उन्नयन और टनलिंग के कार्य सम्मिलित हैं।

मंत्रालय ने कहा कि हनुथांग-हैंडनब्रोक-जुंगपाल-तुरतुक सड़क के निर्माण से हनुथांग-हैंडनब्रोक (सिंधु घाटी) और जुंगपाल-तुरतुक (श्योक घाटी) के मध्य स्टाकपुचन रेंज के बीच अंतर घाटी संपर्क उपलब्ध होगा। इससे खारदुंगला दर्रे को पार किए बिना यात्रा का समय मौजूदा 9 घंटे से घटकर 3.30 घंटे हो जाएगा।

चार प्रमुख एकल लेन सड़कों के उन्नयन का कार्य भी शुरू हो गया है। इनमें खालसे से बटालिक तक 78 किलोमीटर सड़क, करगिल से डुमगिल तक 50 किलोमीटर सड़क, खालसर से श्योकविया अघम तक 70 किलोमीटर सड़क और तांगत्से से लुकुंग तक 31 किलोमीटर सड़क सम्मिलित हैं।

करगिल से डुमगिल मार्ग पर कार्य में हम्बोटिंगला में एक सुरंग का निर्माण भी होगा, ताकि करगिल से बटालिक तक निर्बाध संयोजकता सुनिश्चित हो सके।

इन सभी सड़कों का उपयोग यात्रियों द्वारा हुंदर (नुब्रा घाटी), तुर्तुक गाँव, श्योक, पैंगोन-त्सो झील व दाह के आर्यन गाँवों, गरकोन दारचिक जैसे कई पर्यटन स्थलों तक पहुँचने के लिए बड़े पैमाने पर होता है।