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हिमाचल प्रदेश सरकार ने भिंडरवाले का महिमामंडन करने वाले झंडों पर लगाया प्रतिबंध

हिमाचल प्रदेश सरकार ने निर्णय किया कि राज्य में भिंडरावाले के चेहरे को दर्शाने वाले झंडों को लाने की अनुमति नहीं होगी। यह मामला तब प्रकाश में आया जब ज्वालामुखी (जी) और मंडी कस्बों के स्थानीय लोगों ने पंजाब से वाहनों के राज्य में प्रवेश करने की शिकायत की, जिसमें भिंडरांवाले के झंडे के साथ उत्सव मनाया गया।

अब खबरें आ रही हैं कि हिमाचल के नंबर प्लेट वाले वाहनों को पंजाब के प्रवेश बिंदु पर रोका जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने तनाव को शांत करने का प्रयास करते हुए कहा, “हम निशान साहिब (सिख ध्वज) के प्रतीक का बहुत सम्मान करते हैं और इसका उपयोग करने के लिए किसी का भी स्वागत है लेकिन भिंडरवाले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले को पंजाब के समक्ष उठाया गया है।”

इस बीच, नेर चौक के कुछ लोगों का एक वीडियो वायरल हुआ। उसमें ये लोग दावा कर रहे कि हिमाचल का यह भाग पंजाब का था।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) भी विवाद में कूद गई। उसने भिंडरावाले के झंडे पर प्रतिबंध का विरोध कर हिमाचल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा।

पत्र में कहा गया कि विश्व भर के सिख भिंडरावाले का सम्मान करते हैं। उन्हें अपना आदर्श और नेता मानते हैं। अकाल तख्त ने भिंडरावाले को कौमी योद्धा घोषित किया था।

पत्र में लिखा, “देश में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सभी समुदायों की धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना आपका कर्तव्य है। एक लोकतांत्रिक देश में नागरिकों को अपने संबंधित नेताओं या मूर्तियों के चित्रों को प्रदर्शित करने, ले जाने व समर्थन करने के अधिकार हैं। संवैधानिक पद से ऐसा कोई बयान या निर्णय नहीं दिया जाना चाहिए।”