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घाटी के कश्मीरी पंडित कर्मचारी सुरक्षित जिलों में होंगे तैनात, उपराज्यपाल का निर्णय

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कश्मीरी पंडित समुदाय के सरकारी कर्मचारियों को लेकर बड़ा निर्णय किया है। प्रधानमंत्री पैकेज के तहत सरकारी विभागों में काम करने वाले कश्मीरी पंडितों को सुरक्षित जिलों में तैनात किया जाएगा।

न्यूज़-18 की रिपोर्ट के अनुसार, मनोज सिन्हा ने पीपुल्स एलायंस फॉर गुप्कर डिक्लेरेशन (पीएजीडी) और भाजपा प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि घाटी के तहसील कार्यालयों में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले को देखते हुए कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की तैनाती सुरक्षित स्थानों में की जाएगी।

12 मई को हुई आतंकी घटना के बाद कश्मीरी पंडितों ने राज्य में उग्र विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार से मांग की थी कि सरकारी नौकरी करने वाले उनके समुदाय के सदस्यों को घाटी से जम्मू में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने ऐसा ना करने पर सामूहिक त्याग-पत्र देने की चेतावनी दी थी।

जम्मू-कश्मीर के प्रमुख साझा मंच गुपकर घोषणा पत्र गठबंधन या पीपल्स अलायंस फॉर गुप्कर डिक्लेरेशन ने रविवार को कश्मीरी पंडित कर्मचारियों से अपील की थी कि वे घाटी छोड़कर ना जाएँ।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, बडगाम में राहुल भट पर हुए हमले के विरोध में 350 से अधिक कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने त्याग-पत्र दे दिया था। इसके बाद उपराज्यपाल ने उनके स्थानांतरण को लेकर आश्वासन दिया।

पीएजीडी नेताओं फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सीपीआई (एम) केएमवाई तारिगामी, नेकां सांसद हसनैन मसूदी और अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुजफ्फर शाह के साथ बैठक के दौरान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सूचित किया कि सुरक्षाबलों को आतंकियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकियों की सहायता और उकसाने वालों को भी छोड़ा नहीं जाएगा।