संस्कृति
काशी के पुराने गौरव को लौटाने के लिए कार्यरत प्रधानमंत्री मोदी

महादेव की नगरी के नाम से प्रचलित, देश की सांस्कृतिक राजधानी- काशी को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। विश्व इतिहास से भी पुरानी इस आध्यात्मिक नगरी काशी से बतौर सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जुड़ाव किसी संगम से भी कम नहीं है।

2014 में लोकसभा चुनाव का नामांकन भरने के बाद, जब पत्रकारों से वार्ता में मोदी ने कहा, “…न तो मैं यहाँ आया हूँ और न ही मुझे भेजा गया है– दरअसल मुझे तो माँ गंगा ने बुलाया है…।”  तब इस कथन को किसी ने उतनी गंभीरता से नहीं लिया था जितना आज।

और आज जब काशी विश्वनाथ की नगरी काशी का इतने बड़े पैमाने पर पूर्ण आधुनिकता के साथ सँवारा जा रहा है तो लोगों मे एक जिज्ञासा है कि और क्या-क्या बदलाव होने वाला है शहर में?

जिस तन्मयता से प्रधानमंत्री इस शहर, बाबा विश्वनाथ के पुराने गौरव को जुटाने और देश के अन्य सांस्कृतिक स्थलों को सरंक्षित करने में लगे हैं, इससे आम जनमानस में यही अवधारणा बनती जा रही है ये कोई आम व्यक्ति नहीं अपितु कोई दैविक रूप ही हैं। काशीवासियों ने तो कल्पना भी नहीं की थी कि कभी काशी का यह स्वरूप होगा।

काशी विश्वनाथ धाम

काशी विश्वनाथ मंदिर को अतीत की आभा प्राप्त कराने के लिए योगदान देना मोदी का सपना था और इसी सपने को साकार करने हेतु उनके अनवरत श्रम का आज फल है श्री काशी विश्वनाथ धाम। काशी विश्वनाथ मंदिर के नए स्वरूप काशी विश्वनाथ धाम की बात की जाए तो इस लोकार्पण के पूर्व दर्शनार्थियों का अनुभव ऐसा रहता था कि महादेव आज बस किसी तरह दर्शन हो जाए।

सँकरी  गलियाँ, गंदे जल का प्रवाह और न जाने क्या-क्या? और आज जब हम उसी धाम मे पुनः प्रवेश करते हैं तो यह प्रतीत होता है कि वाकई मोदी ने क्या अद्भुत कार्य किया है। 54,000 वर्गमीटर में फैले मंदिर परिसर के अंदर पर्याप्त स्थान, इतिहास को संकलित करते हुए फसाड रोशनी से सुसज्जित दीवारें, शीतल शुद्ध जल, विश्रामालय इत्यादि।

आज बाबा के भक्तजन मंदिर प्रवेश के बाद मिनटों मे दर्शन कर सकते है, लंबी घंटों-घंटों तक लगने वाली कतारों से मुक्ति मिली है, मनमुताबिक माला-फूल, प्रसाद एंव सुरक्षित लॉकर सुविधा का भी इंतजाम किया गया है।

गंगा घाट से गर्भगृह

इस लोकार्पण से पूर्व, काशी विश्वनाथ दर्शन के समय मोदी एक बात कहते थे, “मैं चाहता हूँ कि माँ गंगा का जल लेकर बाबा का अभिषेक करने वाले भक्तों को किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।” काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के साथ प्रधानमंत्री ने महादेव भक्तों की इस आस को भी पूरा किया।

प्रधानमंत्री की इस दूरदर्शिता का ही यह परिणाम है कि अब माँ गंगा और बाबा विश्वनाथ के बीच अब कोई और नहीं है। दोनों एक-दूसरे को निहार सकते हैं। श्रद्धालु गंगा जल लेकर बिना किसी दाएँ मुड़, बाएँ मुड़ के सीधा बाबा के दरबार (गर्भगृह) मे पहुँचकर जलाभिषेक करेंगे।

अब तक मंदिर के सेवादार ललिता घाट से गागरों में जल भर कर लाते थे, जोकि गर्भगृह के ऊपर बनी टंकी में डाली जाती थी। गर्भगृह से माँ गंगा को जोड़ने के पश्चात अब एक पाइपलाइन से गंगा का जल बाबा के गर्भगृह तक सीधे आ गया है, जबकि दूसरी पाइपलाइन से गर्भगृह में चढ़ने वाला दूध और गंगाजल वापस गंगा में समाहित हो जाएगा।

बता दें कि पूर्ववर्ती दिनों में अधिकतर पाइप जाम होने के कारण बाबा पर चढ़ाया हुआ जल और दूध बीच मार्ग मे ही निस्तारित हुआ करता था, जिसे लेकर नगर निगम व बाबा के न्यासदारों मे नोंक-झोंक लगी रहती थी लेकिन इस नए मार्ग के विस्तार और नवीन पाइपलाइन के बाद इस समस्या पर भी विराम लग गया।

कॉरीडोर निर्माण के साथ प्राचीन मंदिरों का संरक्षण

यह प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता ही थी या यूँ कहें कि ये ईश्वरीय कार्य उनके हाथों से ही होना लिखा था। कॉरीडोर निर्माण के दौरान मकानों के हटाए जाने पर, श्री मनोकामेश्वर महादेव मंदिर, विनायक मंदिर, श्री कुंभ महादेव एंव गंगेश्वर महादेव मंदिर आदि जैसे अनेक प्राचीन मंदिरों का पुनः उदय हुआ और ये कोई ऐसे मंदिर नहीं हैं, सभी का अपना एक इतिहास है, कुछ तो विश्वनाथ मंदिर से भी अनेक वर्ष पुराने पाए गए।

दुखद है कि व्यक्तिगत हितों के कारण लोगों ने अपने घरों में समाहित कर इन मंदिरों के ऊपर बहुमंजिला तैयार कर दिए थे। आज पुनः इन वर्षों पुराने मंदिरों को कायाकल्प कर आम जनमानस हेतु दर्शन पूजन हेतु शुरू कर दिया गया है। फिर से खोजे गए ये मंदिर महादेव की नगरी ‘काशी’ के आध्यात्मिक विरासत को और मजबूत करेंगे।

विश्वनाथ धाम के अतिरिक्त

बाबा के नवसज्जित धाम से तो समूचे विश्व ने परिचय कर लिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया या प्रिंट जगत हर जगह बस बाबा विश्वनाथ कॉरीडोर की चर्चा। सभी अपने अपने शब्दों मे इसकी व्याख्या कर रहे हैं।

लेकिन आपको यह भी अवश्य जानना चाहिए काशी विश्वनाथ धाम ही नहीं काशी में ऐसे अनेक स्थानों का जीर्णोंधार और यहाँ की जनता के हितार्थ अनगिनत परियोजनाओं को मोदी ने पिछले सात वर्षों मे लोकार्पित किया है। इन्हें एक लेख में समाहित करना प्रधानमंत्री के अभूतपूर्व कार्यों के साथ अन्याय होगा।

  • दुर्गाकुंड व कैथी महादेव मंदिर का जीर्णोधार
  • दशाश्वमेध, अस्सी, राजघाट समेत अन्य घाटों को जीर्णोधार
  • सारनाथ, गुरुधाम, लाल खां मकबरा जैसे सांस्कृतिक धरोहरों का सरंक्षण
  • माँ गंगा के स्वच्छता हेतु अनेकों कदम, विश्वस्तरीय क्रूज का संचालन
  • लाल बहादुर शास्त्री, मुंशी प्रेमचंद व कबीरदास जी के जन्मस्थान एंव रविदास मंदिर का कायाकल्प
  • विश्वस्तरीय बनारस स्टेशन निर्माण और कैंट, काशी व दीनदयाल उपाध्याय स्टेशनो का कायाकल्प
  • वंदे भारत, तेजस एंव महाकाल एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को काशी से जोड़ना
  • बाबतपुर एयरपोर्ट का आधुनिकरण
  • रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर व ट्रेड फ़ैसलिटी सेंटर
  • मल्टी- माडल टर्मिनल
  • विश्वस्तरीय हाईवे एंव रिंग रोड का निर्माण
  • ट्रामा सेंटर, टाटा एंव मदन मोहन मालवीय कैंसर अस्पताल का निर्माण
  • सभी छोटे बड़े स्वास्थ केंद्रों का नवीनीकरण
  • सीवेज और पेयजल क्षेत्र मे अभूतपूर्व कार्य
  • ग्रामीण अंचल के किसानों हेतु तकनीकी प्रशिक्षण शिविर व निशुल्क गिर गाय वितरण
  • जयापुर, नागेपुर, ककरहिया व अन्य गावों को आदर्श ग्राम के रूप विकसित
  • आधुनिक स्ट्रीट लाइट से जगमग काशी की गलियां
  • गैस पाइप लाइन परियोजना
  • और अधिक जानने हेतु: https://www.narendramodi.in/kashi-vikas-yatra#VikasYatra

काशी को आधुनिकता के साथ, पुनः उसके वैभव की ओर ले जाना नए व आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मोदी की अदिव्यतीय सोच को दर्शाता है, जोकि आधुनिकता के साथ-साथ आध्यात्मिकता की नींव पर आत्मविश्वास से खड़ा है।

और जिस गति से प्रधानमंत्री काशी के वर्तमान के साथ-साथ, भविष्य हेतु भी काशी को विश्वस्तर पर सँवारने हेतु लगातार सौगातों की बारिश किए जा रहे हैं, निश्चित ही काशी के अध्याय में उनका सेवायुक्त कार्यकाल स्वर्णिम अक्षरों मे दर्ज किया जाएगा। इसकी गाथाएँ आज के युवा आगामी पीढ़ी को बड़े गर्व से सुनाएँगे यह तय है।

श्रेयश सिंह वाराणसी के निवासी हैं व वर्तमान में दार्जीलिंग सांसद के सहयोगी के रूप में कार्यरत हैं।