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हर्षा हत्याकांड की जाँच एनआईए को सौंपने पर विचार, यूएपीए के तहत मामला दर्ज

राष्ट्रीय सुर्खियाँ बटोरने वाले बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा हत्याकांड में 10 आरोपियों पर शिवमोग्गा पुलिस द्वारा यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया।

शिवमोग्गा में हर्ष की नृशंस हत्या के पीछे एक बड़े षड्यंत्र का संदेह जताते हुए मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई कहते हैं कि यह हत्या का मामला जिस तरह का दिखता है, उससे भी कहीं अधिक बड़ा है। कहा जा रहा कि राज्य सरकार स्थानीय जाँच पूर्ण होने के बाद मामले को एनआईए को सौंपने पर विचार कर रही है।

द हिंदू ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा कि जाँच से पता चला कि हिंदू कार्यकर्ता की हत्या सिर्फ व्यक्तिगत शत्रुता का मामला नहीं था।

जाँच निष्कर्षों को विभाजित करने से परहेज करते हुए कर्नाटक पुलिस के डीजी और आईजीपी प्रवीण सूद ने कथित तौर पर कहा, “जाँच अधिकारी ने अपने विवेक से निर्णय लिया कि यूएपीए को लागू करने की आवश्यकता है और न्यायालय ने उन्हें अनुमति दी।”

यूएपीए उन मामलों में लगाया जाता है जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता को खतरा होता है। एक आरोपी काशिफ और मृतक के बारे में बताया जाता है कि जेल में रहने के दौरान एक विवाद को लेकर उनकी व्यक्तिगत शत्रुता हुई थी। 20 फरवरी को हुई हत्या की जाँच से पता चला कि जानलेवा हमले के अलावा और भी वहाँ बहुत कुछ हुआ था।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, लॉरी चालक आरोपी काशिफ की पत्नी ने कहा कि वह रात 8 बजे के आसपास डायपर लेने निकला था और लगभग 11 बजे लौटा था, जिसके बाद पुलिस उसे पकड़ कर ले गई।

केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे, ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री के एस ईश्वरप्पा और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सहित कर्नाटक भाजपा के शीर्ष नेताओं ने हर्षा हत्याकांड को एनआईए को सौंपने की मांग की थी।