समाचार
कर्नाटक में गौहत्या निषेध अधिनियम के बाद से 20,000 से अधिक मवेशी बचाए गए

कर्नाटक में जब से मवेशियों के वध पर प्रतिबंध लगाने वाला अधिनियम लागू हुआ है, तब तक 20,000 से अधिक पशुओं को बचाया गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक के पशुपालन मंत्री प्रभु चौहान ने राज्य में गौहत्या निषेध अधिनियम के कार्यान्वयन के प्रभाव के बारे में जानकारी दी।

रिपोर्ट में प्रभु चौहान के हवाले से बताया गया, “इसके लागू होने के बाद से राज्य में अवैध परिवहन और गायों व प्रतिबंधित जानवरों के वध के लिए 900 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।”

उन्होंने कहा, “गौहत्या निषेध अधिनियम, पशु कल्याण बोर्ड की स्थापना, पशु हेल्पलाइन केंद्र की स्थापना, 400 पशु चिकित्सकों की भर्ती, 250 पशु निरीक्षकों की भर्ती, गौ माता सहकारी समिति, पुण्यकोटि दत्तक परियोजना और आत्मनिर्भर गौशाला में परिवर्तन का कार्य करने वाला यह देश का पहला राज्य है।”

चौहान ने राज्य के मुसलमानों से बकरीद पर गाय, बैल और भैंस की बलि देने से परहेज करने की अपील की थी और ऐसा करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। बकरीद के दौरान मवेशी वध को रोकने के लिए शहर के बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) क्षेत्र और तालुकों में एक टास्क फोर्स का भी गठन किया गया था।

पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, राज्य भर में पुलिस की कड़ी निगरानी में त्योहार की पूर्व संध्या पर लगभग 67 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 707 मवेशियों को बचाया गया था।

प्रभु चौहाने के हवाले से कहा गया, “हमारा एकमात्र उद्देश्य ‘गौ माता’ की रक्षा करना है। कर्नाटक में अवैध बूचड़खानों का अस्तित्व समाप्त होना चाहिए। प्रदेश में आत्मनिर्भर ‘गौशाला’ बनाने की योजना है। गोबर गैस (बायोगैस) का उत्पादन कर किसानों को दो रुपये प्रति किलो गोबर देने का निर्णय लिया गया है। हम इस मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं।”