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कर्नाटक विधानसभा ने मतांतरण विरोधी विधेयक किया स्वीकृत, कांग्रेस बोली- “जनविरोधी”

कर्नाटक विधानसभा ने गुरुवार (23 दिसंबर) को हंगामे के मध्य मतांतरण विरोधी विधेयक ‘कर्नाटक धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का संरक्षण विधेयक’ को स्वीकृति दे दी।

न्यूज़-18 की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई सरकार ने दावा किया कि सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए कांग्रेस की ओर से इस कानून की ओर बढ़ने की शुरुआत हुई थी। इसको लेकर सदन के समक्ष दस्तावेज भी रखे गए थे।

वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने आरंभ में आरोपों का खंडन किया लेकिन बाद में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय के रिकॉर्ड देखे। उन्होंने स्वीकारा कि मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने इस संबंध में सिर्फ एक मसौदा विधेयक कैबिनेट के समक्ष रखने के लिए कहा था लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं लिया था।

कांग्रेस ने कहा कि विधेयक जनविरोधी, अमानवीय, संविधान विरोधी, गरीब विरोधी, कठोर है। विधेयक पारित नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी कारण से इसे सरकार द्वारा वापस लिया जाना चाहिए।

इससे पूर्व, गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंंद्र ने कहा था कि कानून किसी धर्म के विरुद्ध नहीं है। इस तरह के कानून को आठ राज्य पारित कर चुके हैं और लागू कर रहे हैं। अब कर्नाटक नौवाँ राज्य बन जाएगा।