इन्फ्रास्ट्रक्चर
कानपुर मेट्रो को एल्स्टम ने दिया पहला ट्रेनसेट, जानें कहाँ तक पहुँची परियोजना प्रगति

शनिवार (18 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ एवं ‘मेक इन इंडिया’ की परिकल्पना को साकार करने के क्रम में एल्स्टम द्वारा निर्मित कानपुर व आगरा मेट्रो की प्रथम प्रोटोटाइप ट्रेन का अनावरण किया गया।

गुजरात के सावली में 100 प्रतिशत स्वदेशी रूप से बनाए गए मेट्रो ट्रेनसेट को उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल निगम (यूपीएमआरसी) को सौंपा गया। लाखों दैनिक यात्रियों को मेट्रो का लाभ मिलेगा जिसपर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “मेट्रो आज की आवश्यकता और सार्वजनिक परिवहन का एक बेहतरीन माध्यम है।

यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव व एल्स्टम के प्रबंध निदेशक अलाएन स्पॉर की उपस्थिति में एल्स्टम की सावली स्थित रोलिंग स्टॉक (इंजन व डब्बे) विनिर्माण सुविधा पर अनावरण मुख्यमंत्री योगी ने ऑनलाइन माध्यम से किया।

ध्यान दें कि भारत में बनने वाले कोच विश्व के अन्य स्थानों की तुलना में सस्ते पड़ते हैं। भारत में एक कोच का मूल्य 9-10 करोड़ रुपये होता है जो कि वैश्विक कीमत से 45-50 प्रतिशत सस्ता है।

29 जनवरी 2021 को एल्स्टम ने बॉम्बार्डियर ट्रान्सपोर्टेशन (बीटी) का अधिग्रहण पूरा किया था और आगे बढ़ते हुए बीटी की सभी तकनीकों सहित कानपुर व आगरा मेट्रो के रोलिंग स्टॉक तथा सिग्नलिंग का दायित्व एल्स्टम पर ही है।

लगभग 2,051 करोड़ रुपये की लागत के साथ एल्स्टम का आगरा-कानपुर मेट्रो में 201 मेट्रो डब्बों के डिज़ाइन, निर्माण और उन्हें पहुँचाने के साथ-साथ उन्नत सिग्नलिंग समाधान देने का काम है। इसके अलावा प्रावधान है कि ग्राहक अतिरिक्त 51 मेट्रो डब्बों की माँग भी कर सकता है।

नई मेट्रो ट्रेनों से आगरा व कानपुर शहरों में लगभग 50 लाख नागरिक लाभान्वित होंगे। इसके अलावा मेट्रो परियोजना से क्षेत्र के आर्थिक-सामाजिक विकास को भी बल मिलेगा। रिकॉर्ड समये में कानपुर मेट्रो के लिए पहली ट्रेन देने पर स्पॉर ने गर्व व्यक्त किया।

ट्रेनसेट सौंपते हुए एल्स्टम के कर्मचारी

“राज्य की राजधानी लखनऊ के लिए रोलिंग स्टॉक व सिग्नलिंग समाधान सफलतापूर्वक देने के बाद हमें प्रसन्नता है कि यूपीएमआरसी के साथ साझेदारी मज़बूत हो रही है और कानपुर व आगरा की परिवहन आवश्यकताओं तो हम पुनः परिभाषित कर रहे हैं।”, स्पॉर ने कहा।

“संचालन विश्वसनीयता, आकर्षक डिज़ाइन और उन्नत सुरक्षा विशेषताओं के लिए हमारे मेट्रो को विश्व में ख्याति प्राप्त है। यह सब कुछ मेट्रो को परिवहन का एक आकर्षक माध्यम बनाता है।”, एल्स्टम के प्रबंधन निदेशक ने कहा।

“कानपुर के लिए पहली मेट्रो ट्रेन का वर्चुअल अनावरण करने पर मैं विकासशील मेट्रो परियोजना पर द्रुत गति से काम करने के लिए एल्स्टम व यूपीएमआरसी को बधाई देता हूँ। कानपुर व आगरा के अलावा गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी, झाँसी और मेरठ जैसे शहरों में भी उन्नत मेट्रो सेवा लाने पर हम विचार कर रहे हैं।”, योगी ने कहा।

वहीं, अनावरण के दौरान यूपीएमआरसी के कुमार केशव ने कहा, “एल्स्टम के लिए यह गर्व का अवसर है जो वे देश की सबसे गौरवशाली परियोजनाओं के लिए स्वदेशी रूप से रोलिंग स्टॉक विनिर्माण कर रहे हैं। रिकॉर्ड समय में लखनऊ मेट्रो के लिए ट्रेन देने वाले एल्स्टम के साथ साझेदारी को आगे बढ़ाकर हम प्रसन्न हैं।”

“उत्तर प्रदेश में शहरी परिवहन का कायाकल्प होगा। कानपुर और आगरा मेट्रो परियोजनाओं में ये विश्व-स्तरीय ट्रेनसेट जान फूँक देंगे। हम परियोजना को शीघ्रा क्रियान्वित करने और बढ़ते शहरों की परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।”, उन्होंने आगे कहा।

उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की प्रेरणा से सर्वश्रेष्ठ डिज़ाइन को मिलाकर भारत के नवीनतम मेट्रो बेड़े को आकर्षक रूप मिला है। नई मेट्रो की एयरोडाइनैमिक मॉड्यूलर डिज़ाइन सुरक्षा व पर्यावरण लाभ के साथ-साथ यात्रियों को अद्भुत अनुभव भी देंगी।

मेट्रो डब्बा (अंदर से)

स्टेनलेस स्टील से बने डब्बे वातानुकूलित व स्वचालित स्लाइडिंग द्वारों से लैंस हैं। डब्बों में बैठने व खड़े होने के लिए आरामदायक स्थान है। व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले दिव्यांगों के लिए विशेष स्थान है।

इन सबके साथ आधुनिक यात्री सूचना प्रणाली मिलकर यात्रियों को एक पहुँच-योग्य और स्वागतपूर्ण वातावरण देंगी। ट्रेनों को फ्लेक्स मोट्रो ब्बों और मिट्रैक संचालक प्रणाली से लैस किया जाएगा जो उनकी ऊर्जा कुशलता बढ़ाएगी और संचालन लागत कम करेगी।

यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नई ट्रेनें उच्चतम पर्यावरण मानकों पर खरी उतरें। तीन डब्बों के साथ हर ट्रेन लगभग 960 यात्रियों का परिवहन कर सकती है। अपेक्षा है कि नवंबर में इनका ट्रायल रन होगा।

कानपुर में प्राथमिकता पर आईआईटी से मोती झील तक का 9 किलोमीटर लंबा उपखंड बनाया जा रहा है। वहीं, परियोजना के उद्घाटन के 10 माह बाद आगरा मेट्रो का पहला स्टेशन- ताज पूर्वी गेट- अब आकार लेने लगा है।

प्रथम चरण में कानपुर व आगरा, दोनों ही मेट्रो में दो-दो गलियारे बनाए जा रहे हैं। कानपुर में आईआईटी से नौबस्ता और कृषि विश्वविद्यालय से बर्रा-8 तक, वहीं आगरा में सिकंदरा से ताज पूर्वी गेट तक 14 किलोमीटर लंबा पहला गलियारा और आगरा कैन्ट से कालिंदी विहार तक 16 किलोमीटर लंबा दूसरा गलियारा।

निर्माण प्रगति संबंधित जानकारी निष्ठा अनुश्री द्वारा जोड़ी गई है।

अरुण कुमार दास रेलवे के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनसे akdas2005@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।