शिक्षा-नौकरी
राज्य सभा में पारित हुआ संशोधित विधेयक, अब फेल किए जा सकते हैं विद्यार्थी

नि: शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2018  राज्यसभा में गुरुवार (3 जनवरी) को पारित होते ही संसद में पारित हो गया। लोकसभा ने पहले ही विद्यालयों में फेल न करने के नियम को खत्म करने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में संशोधन करने हेतु इस अधिनियम को पारित कर दिया था, ऑल इंडिया रेडियो  की रिपोर्ट में बताया गया।

अभी तक किसी भी विद्यार्थी को आठवीं कक्षा तक फेल न करने का प्रावधान था। साथ ही तब तक कोई भी विद्यालय विद्यार्थी को बेदखल नहीं कर सकता था। अब संशोधन के बाद यह राज्यों पर निर्भर करेगा कि वे फेल न करने के नियम को खत्म करना चाहते हैं या नहीं।

यदि इन परीक्षाओं में कोई भी विद्यार्थी असफल होता है तो उसे उपचारात्मक शिक्षा दी जाएगी तथा दो महीने के भीतर पुन: परीक्षा देने का अवसर दिया जाएगा।

इस पर वार्ता में मानव संसाधन कार्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि 25 राज्यों ने फेल न करने के नियम को खत्म करने का समर्थन किया। प्रस्तावित संशोधन अगस्त 2017 में लाया गया था और राज्य सभा की स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था जिसने फरवरी में अपनी रिपोर्ट पेश की थी।

रिपोर्ट के अनुसार जावड़ेकर ने कहा कि शिक्षा के घटते स्तर को देख पालकगण भी इस बिल का समर्थन करते हैं। वहीं उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के लिए बजट बढ़ा रही है तथा वर्ष 2014 की तुलना में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।