शिक्षा-नौकरी
मीडिया जगत और बीजेएमसी डिग्री के बीच के विरोधाभास और उसके हल

मीडिया की स्नातक डिग्री करने के बाद जब विद्यार्थी मीडिया जगत में पैर रखते हैं, तो मीडिया जगत की अपेक्षाएँ उनसे कुछ अलग रहती हैं। हालाँकि विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को उसी रूप में तीन साल तक गढ़ने का प्रयास करते हैं, जिससे कि वे मीडिया जगत में रोज़गार पा सकें और अपना व्यावसायिक जीवन बेहतर बना सकें।

मीडिया जगत में कार्यरत होने के लिए भारत में निजी और सरकारी विश्वविद्यालय तथा मीडिया कंपनियों ने भी अपने-अपने नाम से सैंकड़ों केंद्र खोल रखे हैं जहाँ पत्रकारिता और जनसंचार की स्नातक डिग्री (बीजेएमसी) करवाई जाती है। इनमें सभी विषय थोड़े-थोड़े पढ़ाए जाते हैं, जिससे कि विद्यार्थी मीडिया जगत में रोज़गार हासिल कर सके।

बीजेएमसी की स्नातक डिग्री सिर्फ पत्रकारिता तक ही नहीं सीमित होती है, इसमें जन संपर्क (पब्लिक रिलेशन), इवेंट मैनेजमेंट, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन व फिल्म इत्यादि के बारे में भी पढ़ाया जाता है। इस डिग्री में यह सभी विषय पढ़ाने के पीछे विश्वविद्यालय की मानसिकता यह रहती है कि अगर विद्यार्थी को कॉलेज के पहले वर्ष में यह पता नहीं चल पाता है कि वह किस व्यवसाय में अच्छा कर सकता है या कौनसे विषय में उसकी रुचि है तो यह ज्ञान विद्यार्थी को यह सभी विषय पढ़ते-पढ़ते दूसरे साल के पहले दिनों या तीसरे सेमेस्टर की अंतिम परीक्षाओं तक ज्ञान हो जाता है।

लेकिन इसके कारण यह बात भी सामने आती है कि लगातार तीन साल तक अलग-अलग विषय पढ़ने के कारण विद्यार्थियों की किसी एक विषय पर पकड़ नहीं बन पाती है। और यहीं इस डिग्री की विविधता फीकी पड़ती दिखाई देती है। इसी कारण यह कोर्स कहीं ना कहीं मीडिया के जगत की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाता है क्योंकि ना ही तो विद्यार्थी पत्रकारिता पूर्ण रूप से पढ़ पाते हैं और ना ही जन संपर्क (पब्लिक रिलेशन्स)।

विद्यार्थियों को कौनसे आधारभूत कौशल विश्वविद्यालयों को सीखाने चाहिए जिससे वह अपने कदम मीडिया उद्योग में जमा सकें, जानने की खातिर स्वराज्य  ने मीडिया उद्योगों के लोगों से बात की और जानना चाहा कि मौजूदा मीडिया जगत विद्यार्थियों से क्या चाहता है और उनकी विश्वविद्यालयों के कोर्सों से क्या अपेक्षाएँ हैं। साथ ही इस विश्वविद्यालय इस अंतर को कम करने के लिए क्या प्रयास करते हैं और आगे क्या किया जाना चाहिए, यह भी समझने का प्रयास किया।

देश के प्रख्यात मीडिया चैनल सीएनएन  के राजनीतिक खबरों को कवर करने वाले पत्रकारों ने बताया कि जो आधारभूत कौशल मीडिया की स्नातक डिग्री वाले अभ्यर्थी या विद्यार्थी में होने चाहिए, वे हैं- बोलने का ढंग और अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने की कला। दूसरी योग्यता उन्होंने मीडिया चैनलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर के उपयोग को बताया। लिखने की कला और भाषा पर मज़बूत पकड़ को इन पत्रकारों ने अभ्यर्थियों के लिए राम बाण बताया है।

हाल के समय में सोशल मीडिया और युवा वर्ग में मशहूर मीडिया वेबसाइट द क्विंट  के एक नागरिक पत्रकार देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि विद्यार्थी में सबसे ज़रूरी चीज़ पत्रकारिता में रुचि होने चाहिए, हर खबर पर नज़र होनी चाहिए, विद्यार्थी का स्वभाव बहिमुर्खी और अपनी खुद की राय बनाने की क्षमता हो। शेष अन्य चीज़ें विद्यार्थी को प्रशिक्षु काल में सिखाई जा सकती हैं।

दोनों मीडिया संस्थाओं के पत्रकारों ने विद्यार्थियों की पत्रकारिता में रुचि और मौजूदा खबरों में जिज्ञासा पर ज़्यादा बल दिया है। इन चीज़ों पर विद्यार्थियों को खुद ही काम करना होगा क्योंकि यह ना तो कोई विश्विद्यालय सिखा सकता है और ना ही मीडिया संस्थान।

बीजेएमसी की डिग्री मीडिया उद्योग में काम करने के लिए ज़रूरी है या नहीं इसे बी परखा गया क्योंकि यह देखा जाता है कि आज के सभी बड़े पत्रकारों में से बहुत के पास मीडिया की यह डिग्री नहीं होती। अपनी भाषा पर मज़बूती और इस व्यवसाय के प्रति कर्मनिष्ठा के कारण ही बहुत से पत्रकारों ने इस जगत में नाम कमाया है।

इस डिग्री के मीडिया में महत्व पर पत्रकारों का मानना है कि आज यह डिग्री अभ्यर्थियों के लिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि बीजेएमसी के विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयों में मीडिया की कार्यप्रणाली, कुछ ज़रूरी सॉफ्टवेयर और टीवी में काम करने के लिए तकनीकी चीज़ें पढ़ाई जाती हैं जो सिर्फ एक मीडिया के विद्यार्थी को ही पता होता है। यह उनके लिए मीडिया जगत को समझने में बेहद सहायक होती हैं।

इस डिग्री में इतनी सारी खूबियाँ होने के बावजूद भी यह विद्यार्थियों को रास नहीं आती। इसपर इसी डिग्री के अध्ययनरत विद्यार्थी ने कहा, “सभी प्रकार के विषय पढ़ाए जाने के कारण पत्रकारिता के विषय बहुत ही कम हैं और यही कारण है कि ना ही हम पत्रकारिता अच्छे से पढ़ पाते हैं और ना ही दूसरे विषय”।

एक और अहम मुद्दा है कि पत्रकारिता के व्यवसाय में आपको लिखना पड़ता है और लिखने के लिए अभ्यर्थी या विद्यार्थी को इतिहास और राजनीति शास्त्र का ज्ञान होना चाहिए जिसकी मदद से वे अपने लेख में तत्व डालकर जनता को उस मुद्दे की तह तक ले जा सकें। लेकिन इस डिग्री में इतिहास और राजनीति शास्त्र जैसे कोई भी विषय नहीं पढ़ाई जाते हैं।

हमारे इन सभी सवालों का जवाब और इस डिग्री की विविधता का आँकलन करने के लिए हमने एमिटी विश्वविद्यालय के एक प्राध्यापक से बात की और उन्हें मीडिया की सभी उन अपेक्षाओं के बारे में बताया जो कि मीडिया उद्योग विश्वविद्यालय और उसके विद्यार्थियों से रखता है। इसपर प्रतिक्रिया देते हुए एमिटी विश्वविद्यालय में मीडिया के विषय पढ़ाने वाले प्राध्यापक डॉक्टर साकेत रमन ने कहा कि इस डिग्री में फेर बदल की ज़रूरत है।

उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की शिकायत है कि उन्हें पत्रकारिता के ज़्यादा विषय नहीं पढ़ाए जाते हैं। इसके लिए डिग्री के आखिरी वर्ष मतलब पाँचवें सेमेस्टर से ही विद्यार्थियों की रुचि के हिसाब से ही डिग्री में विशेषज्ञता प्रदान की जानी चाहिए। इससे यह होगा कि जब विद्यार्थी पांचवें सेमेसटर में अपनी रुचि के हिसाब से विशेषज्ञ विषय का चयन करेंगे तो उन्हें अपने प्रशिक्षु काल में आसानी रहेगी। इस विशेषज्ञता पाठ्यक्रम में अधिकतर विषय उनकी रुचि के अनुसार और बाकी सामान्य विषय रहेंगे क्योंकि विश्विद्यालय के कुछ नियमों का भी पालन किया जाना होता है।

इस विशेषज्ञता पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को उन सभी आधारभूत कौशलों को सिखाया जाना चाहिए जिनसे उन्हें मीडिया उद्योग के लिए तैयार किया जाए और वे प्रवेश स्तर की नौकरियों के लिए पूर्ण रूप से योग्य बन सकें। प्राध्यापक के अनुसार आधारभूत कौशलों में विद्यार्थियों को प्रेस विज्ञप्ति से खबर बनाना, खबरें लिखना, हिंदी से अंग्रेज़ी और अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद करना, हिंदी टंकण (टाइपिंग) और फाइनल कट प्रो जैसे सॉफ्टवेयर जो अधिकतर मीडिया उद्योग में काम में लिए जाते हैं यह सभी सिखाए जाने चाहिए।

इतिहास और राजनीति शास्त्र के विषय के बारे में प्राध्यापक का मानना है कि चूँकि यह एक मीडिया डिग्री है तो इसमें विश्वविद्यालय यह सभी विषय नहीं पढ़ा सकता है। इस मसले का हल प्राध्यापक के अनुसार यह है कि अगर हर सेमेस्टर में एक विषय देश-विदेश की खबरों के आँकलन करने का हो तो विद्यार्थी विश्विद्यालय में तीनों सालों तक खबरों के घेरे में रहेगा। फिर जब उसे दो से तीन अखबारों एवं मीडिया चैनलों की खबरों का आँकलन करना सिखाया जाएगा तो उसकी सोच विचार करने की क्षमता में भी बढ़ोतरी होगी।

मीडिया जगत और प्राध्यापक की बात सुनने के बाद यह कह सकते हैं कि अगर विश्वविद्यालय थोड़ा और परिश्रम करें तो हो सकता है कि यह डिग्री अपने हर तरीके की रुचि रखने वाले विद्यार्थी की मदद कर सके और मीडिया जगत और विश्वविद्यलयों के बीच का अंतर भी कम हो जाए। इस दौड़ में विद्यार्थियों को भी अपनी तरफ से पूरी मेहनत करनी होगी कि वह निरंतर रूप से अखबारें पढ़ें, हाल कि सभी खबरों पर अपनी पैनी नज़रें रखें और लिखने का प्रयास करने के लिए अपना खुद का ब्लॉग तैयार करके उसपर समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार लिखने का प्रयास करें। आजकल हर वेबसाइट विद्यार्थियों को लिखने का मौका देती है जहाँ विद्यार्थी अपने विचार रख सकते हैं। और सबसे महत्त्वपूर्ण की विद्यार्थी अपनी भाषा को मज़बूत करने का प्रयास करें, क्योंकि पत्रकारिता में आपको आपकी शक्ल से पहले आपकी लेखन-शैली से परखा जाता है।

सोमेश स्वराज्य में प्रशिक्षु व अमिटी विश्वविद्यालय में पत्रकारिता अंतिम वर्ष के छात्र हैं। वे @someshkhatrii के नाम से ट्वीट करते हैं।