शिक्षा-नौकरी
श्रम मंत्रालय चार दिवसीय कार्य सप्ताह की अनुमति देने के प्रस्ताव पर कर रहा विचार

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय नई श्रम संहिताओं पर काम कर रहा है, जो कंपनियों को चार-दिवसीय कार्य सप्ताह की अनुमति देने का प्रस्ताव देता है।

बिज़नेस इनसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार, यह तीन-दिवसीय सप्ताहांत प्रति सप्ताह 48 घंटों के कार्य के साथ आएगा। यह उनके लिए है, जो दिन में 12 घंटे काम करने वाले कर्मचारी हैं।

कथित तौर पर 2020 के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि कर्मचारियों का मानना ​​था कि चार दिवसीय कार्य सप्ताह का कार्यान्वयन भारत में करीब पाँच वर्ष दूर था। इसमें यह भी बताया गया कि भारतीयों को कई मौकों पर सप्ताह में पाँच दिन से अधिक काम करने के लिए कहा जाता था।

श्रम मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्र ने कहा, “कंपनियों को श्रमिकों की सहमति से अपने कर्मचारियों को तीन दिन की पेड लीव देनी चाहिए और प्रतिदिन 12 घंटे काम करवाना चाहिए। हम कर्मचारियों या नियोक्ताओं को इसके लिए मजबूर नहीं कर रहे हैं। यह उनकी सुविधा के अनुरूप है। यह बदलती कार्य संस्कृति के साथ तालमेल में एक सक्षम प्रावधान है। हमने कुछ बदलाव करने की कोशिश की है। हमने काम के दिनों में लचीलापन लाने की कोशिश की है।”

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का कहना है कि सामान्य मानक प्रति सप्ताह 48 घंटे काम करने वाले कर्मचारियों का होना चाहिए, जिसमें अधिकतम 8 घंटे एक दिन का होता है। श्रम मंत्रालय द्वारा नए श्रम संहिता के प्रारूप नियम तैयार किए जा रहे हैं। यह सामने आया है कि नई संहिता कर्मचारी राज्य बीमा निगम के माध्यम से श्रमिकों को मुफ्त चिकित्सा जाँच देने के लिए एक नया प्रावधान लागू करती है।

माइक्रोसॉफ्ट के जापान कार्यालय ने इस नियम को 2019 में लागू किया था और परिणाम बहुत आशाजनक आए थे। जाहिर है कि चार दिवसीय कार्य सप्ताह में उत्पादकता में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई और बिजली की खपत के साथ कागज की छपाई भी कम हुई।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) द्वारा व्यवसायों पर किए गए सर्वेक्षणों में से एक ने दर्शाया कि कंपनियाँ इन उपायों को लागू करके अपने कुल कारोबार का लगभग 2 प्रतिशत बचा सकती हैं।

हालाँकि, इसने यह भी चिंता जताई कि चार-दिवसीय कार्य सप्ताह संभवतः उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं और मांगों को पूरा नहीं कर सकता है। खासकर कि सेवा क्षेत्र में।