अर्थव्यवस्था
जियोफोन नेक्स्ट का मूल्य क्यों 4जी स्मार्टफोन क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए पर्याप्त नहीं है

29 अक्टूबर को रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने अपना जियोफोन नेक्स्ट जारी किया जिसका लॉन्च के समय प्रारंभिक मूल्य 6,499 रुपये घोषित हुआ। वहीं, दूसरी ओर यह ज्ञात हुआ कि कंपनी ने स्पेक्ट्रम एवं समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) भुगतानों पर केंद्र सरकार के व्यापार स्थगन को मना कर दिया है।

नया लॉन्च किया गया जियोफोन नेक्स्ट 4जी स्मार्टफोन दीपावली से ही मिलना शुरू हो जाएगा और 1,999 रुपये के मूल्य से इसे ईएमआई पर लेने का विकल्प भी खुला होगा।

इसे रिलायंस ने गूगल और क्वालकॉम के साथ साझेदारी में विकसित किया है। यह पहला स्मार्टफोन होगा जो गूगल द्वारा विकसित प्रगति ओएस के साथ आएगा। जियोफोन नेक्स्ट की विशेषता में 5.45 इंच का एचडी+ डिस्प्ले है।

इसके अलावा फोन में 13 मेगापिक्सल का पीछे का कैमरा, 8 मेगापिक्सल का आगे का कैमरा और 3500 एमएएच की बैटरी है जो एक माइक्रो यूएसबी पोर्ट के माध्यम से चार्ज होती है।

फोन में प्रसंस्करण के लिए क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 215 चिप का उपयोग किया गया है। हालाँकि, विश्लेषकों का कहना है कि यह मूल्य बाज़ार में उपलब्ध विकल्पों के मूल्य से अधिक है, ऐसे में यह वह क्रांति नहीं ला पाएगा जिसके उद्देश्य से इसे डिज़ाइन किया गया है।

साथ ही, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को जियो के प्रस्तावों पर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे स्वयं भी अपने एकत्रित हैन्डसेट पैकेज में इस प्रकार के प्रस्ताव दे सकते हैं।

काउन्टर पॉइन्ट रिसर्च में शोध विश्लेषक एवं साझेदार नील शाह कहते हैं, “अपेक्षा से कम प्रभाव पड़ेगा क्योंकि मूल्य क्रांति लाने वाला नहीं है। 2जी फिचर फोन के उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए जियो को सौदे को थोड़ा और मीठा बनाना होगा।”

वे बताते हैं कि कंपनी को औसत रूप से 100 रुपये का मासिक राजस्व (एआरपीयू) देने वाले उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए यह प्रस्ताव पर्याप्त नहीं होगा। सस्ते स्मार्टफोन की उपलब्धता की ओर भी वे संकेत करते हैं।

“प्रतिस्पर्धी दूरसंचार कंपनियाँ उन हैन्डसेट ब्रांड के साथ साझेदारी करके जियो को चुनौती दे सकती हैं। यह एयरटेल, वोडाफोन आइडिया के लिए राहत की बात है।”, वे आगे कहते हैं।

हालाँकि, शाह ने यह भी कहा कि जियोफोन नेक्स्ट 5,000 रुपये की फोन श्रेणी को तो विस्तार देगा लेकिन वह अन्य स्मार्टफोन विनिर्माताओं की बाज़ार भागीदारी में सेंध नहीं मार पाएगा।

वहीं, एनालिसिस मेसन में एक प्रमुख, अश्विंदर सेठी कहते हैं कि कम मासिक राजस्व देने वाले 2जी उपभोक्ताओं को मूल्य के कारण यह हैन्डसेट आकर्षित नहीं कर पाएगा लेकिन 100-150 रुपये के मासिक एआरपीयू वाले उपभोक्ताओं में यह हलचल अवश्य मचाएगा।

सेठी आगे कहते हैं, “…मध्यम से दीर्घ अवधि की दृष्टि से यह दूरसंचार उद्योग के लिए लाभकारी होगा क्योंकि इन उपभोक्ताओं का एआरपीयू बढ़ेगा और स्मार्टफोन विनिर्माता भी हर दो-तीन वर्ष में हैन्डसेट बदलने वाले इन उपभोक्ताओं के प्रति उत्तरदायी बनेंगे।”

हालाँकि, ऐसा माना जा रहा है कि जियोफोन नेक्स्ट प्रतिस्पर्धा का सामना करेगा, विशेषकर तीन बड़े प्रतिस्पर्धियों से- सैमसंग, शाओमी और रियलमी। ऐसा इसलिए क्योंकि विशेषताओं और मूल्य की दृष्टि से ये कंपनियाँ बेहतर विकल्प देती हैं।

उदाहरण स्वरूप, सैमसंग गैलेक्सी एम02 7,999 रुपये का प्रारंभिक मूल्य से उपलब्ध है। वहीं शाओमी का रेडएमआई 9ए 6,799 रुपये और रियलमी सी11 6,699 रुपये से मिलना शुरू हो जाता है।

दूरसंचार राहत पैकेज

जैसा कि बताया गया कि जियो ने स्पेक्ट्रम एवं समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) भुगतानों पर सरकार के स्थगन को नकार दिया है और ऐसा करने वाला वह एकमात्र दूरसंचार सेवा प्रदाता बन गया है।

जहाँ जियो इसे नकार रहा है, वहीं इसके प्रतिस्पर्धी- भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने दोनों प्रकार के स्थगनों का स्वागत किया है। बता दें कि इस दूरसंचार राहत पैकेज में एजीआर एवं स्पेक्ट्रम भुगतान करने के लिए चार वर्षों का अतिरिक्त समय दिया गया है।

साथ ही कमतर बैंक गारंटी और वैधानिक बकाया को सरकार इक्विटी में परिवर्तित करने का अवसर भी इस पैकेज में है। रिलायंस जियो ने दूरसंचार विभाग (डॉट) को 2016 की नीलामी में खरीदे गए स्पेक्ट्रम की सभी बकाया राशि का भुगतान 10,792 करोड़ रुपये देकर कर दिया था।

हालाँकि, 2014 और 2015 की नीलामियों में इसने जो स्पेक्ट्रम खरीदा है, उनका बकाया अभी तक नहीं भरा है। ब्याज को जोड़कर इन दोनों की बकाया राशि लगभग 15-16,000 करोड़ रुपये हो जाती है।

विश्लेषकों का कहना है कि नकद से समृद्ध कंपनी के लिए स्थगन लाभकारी नहीं है, जबकि उसके प्रतिस्पर्धियों के लिए है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह अपनी 4जी क्षमता को बढ़ाने या अगली पीढ़ी की तकनीक में निवेश करने के लिए दबाव में नहीं है।

हालाँकि, इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने आकलन किया है कि यदि मुकेश अंबानी की दूरसंचार कंपनी स्थगन का विकल्प चुन लेती है तो वह 4,300 करोड़ रुपये के वार्षिक नकद प्रवाह की बचत कर पाएगी।