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“पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में ईसाई मिशनरी मतांतरण अभियान चला रहे हैं”- अकाल तख्त

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने मंगलवार (12 अक्टूबर) को कहा कि ईसाई मिशनरी पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में मतांतरण के लिए अभियान चला रहे हैं। ऐसे में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने इसका मुकाबला करने के लिए एक अभियान शुरू किया है।

दि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अकाल तख्त जत्थेदार, जो सिख समुदाय की सर्वोच्च अस्थायी सीट के मुख्य पुजारी हैं, ने बयान में कहा, “ईसाई मिशनरी कुछ वर्षों से सीमावर्ती क्षेत्रों में मतांतरण के लिए अभियान चला रही हैं। निर्दोषों को ठगा या मतांतरण का लालच दिया जा रहा। हमें ऐसी कई जानकारियाँ मिली हैं।”

ज्ञानी हरप्रीत सिंह दलित सिख समुदाय से हैं। उनकी टिप्पणी उस दिन आई जब अमृतसर में दलित और सिख संगठनों ने स्वर्ण मंदिर और अकाल तख्त में दलित सिखों के निर्बाध प्रवेश के अधिकार की बहाली और कड़ाह प्रसाद पेश करने की 101वीं वर्षगाँठ मनाई थी।

जत्थेदार ने कहा, “जबरन मतांतरण को उचित नहीं माना जा सकता। इसके विरुद्ध अभियान को मजबूत करने में सभी सिखों को एसजीपीसी का समर्थन करना चाहिए। यह हमारे लिए गंभीर चुनौती है।”

इस पर अमृतसर के दलित व अल्पसंख्यक संगठन पंजाब के प्रमुख डॉ कश्मीर सिंह ने कहा, “ऐसे मतांतरण के पीछे कई कारण हैं। एक गाँवों में दलितों से होने वाला भेदभाव है। दलितों में अशिक्षा और गरीबी भी है, जो उन्हें आसान निशाना बनाती है। उन्हें बताया जाता है कि मतांतरण से उन्हें विदेश में बसने में सहायता मिलेगी।”

उन्होंने कहा, “मिशनरी दलितों को समझाने के लिए उनके घरों में जाते हैं। एसजीपीसी की ओर से ऐसा प्रयास नहीं होता है। हमें मतांतरण रोकने के लिए एसजीपीसी प्रचारकों, एसजीपीसी और उसके संस्थानों में अधिक दलित प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है।”