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जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने गैर-मुस्लिमों सहित सभी को सह-शिक्षा से दूर रहने को कहा

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने एक विवादित बयान में कहा कि लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग स्कूल विद्यालय चाहिए। उसने यह भी कहा कि गैर-मुसलमानों को भी अपनी बेटियों को अनैतिकता और दुर्व्यवहार से दूर रखने के लिए सह-शिक्षा से बचना चाहिए।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, ये बयान जमीयत उलेमा-ए-हिंद (मौलाना अरशद मदनी गुट) की सोमवार (30 अगस्त) को कार्यसमिति की बैठक के बाद जारी किए गए, जो समाज सुधार के उपायों पर चर्चा के लिए हुई थी।

शीर्ष मुस्लिम निकाय ने प्रभावशाली और धनी लोगों से अपने-अपने क्षेत्रों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग विद्यालय बनाने में सहायता करने का आग्रह किया था।

मौलाना अरशद मदनी ने कहा, “अनैतिकता और अश्लीलता किसी धर्म की शिक्षा नहीं है। दुनिया के हर धर्म में इसकी निंदा की गई है क्योंकि यही चीजें हैं, जो समाज में दुर्व्यवहार फैलाती हैं। इस वजह से हम अपने गैर-मुस्लिम भाइयों से भी कहेंगे कि वे अपनी बेटियों को अनैतिकता और दुर्व्यवहार से दूर रखने के लिए सह-शिक्षा देने से बचें और उनके लिए अलग शिक्षण संस्थान स्थापित करें।”