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इस्लामाबाद काबुल में तालिबान सरकार को लेकर पूरी तरह आशावादी नहीं- पाक एनएसए

अफगान तालिबान के साथ पाकिस्तान की हताशा गुरुवार को तब स्पष्ट हुई, जब उसके शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि इस्लामाबाद काबुल में तालिबान सरकार को लेकर पूरी तरह आशावादी नहीं है क्योंकि युद्धग्रस्त देश में अब भी संगठित आतंकवादी नेटवर्क सक्रिय हैं और अफगान धरती का उपयोग उसके देश के विरुद्ध किया जा रहा है।

नेशनल असेंबली की विदेश मामलों की स्थायी समिति को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोईद यूसुफ ने अफगानिस्तान में प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की उपस्थिति से देश के लिए खतरे के बारे में बात की।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को लेकर पूरी तरह आशावादी नहीं है और तालिबान के सत्ता में आने से सभी समस्याओं के पूर्ण समाधान की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

तालिबान के सत्ता में आने के बाद अगस्त से पाकिस्तान में आतंकी हमलों में वृद्धि को देख यह टिप्पणी आई।

हालाँकि, तालिबान ने टीटीपी के विरुद्ध कोई कार्रवाई करने की बजाय पाकिस्तान को उनके साथ वार्ता के लिए स्वीकृत किया, जो इस्लामाबाद ने इस व्यर्थ आशा के साथ किया कि अफगान तालिबान अपने प्रभाव का उपयोग टीटीपी को वश में करने के लिए करेगा।

टीटीपी ने 9 नवंबर को एक महीने के संघर्ष विराम की घोषणा की और कड़ी शर्तें प्रस्तुत कीं। इसमें उनके शरिया को लागू करना और सभी हिरासत में लिए गए विद्रोहियों की रिहाई सम्मिलित है। इस पर पाकिस्तान सरकार ने मांगों को स्वीकार करने से मना कर दिया और टीटीपी ने युद्ध विराम को समाप्त करने से मना कर दिया।

हाल ही में घोषित पहली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के बारे में मोईद यूसुफ ने कहा. “सरकार इसे संयुक्त संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत करने को तैयार है। आर्थिक संप्रभुता, लोगों की सुरक्षा, ऋण राहत और कश्मीर मुद्दा सुरक्षा नीति के महत्वपूर्ण घटक हैं।”