इन्फ्रास्ट्रक्चर
योगी ने उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जैसा काम किया, वैसा किसी मुख्यमंत्री ने नहीं

योगी आदित्यनाथ देश के सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में चार वर्ष पूरे करने जा रहे हैं लेकिन अंग्रेज़ी मीडिया का उनके प्रति वैसा ही अमित्रवत रवैया है, जैसा 2017 में था। मुख्यमंत्री के रूप में उनके विकास कार्यों की चर्चा कम ही की जाती है।

इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण तो यह है कि जब चर्चा होती है तो तथ्यों को अनदेखा करते हुए पूर्वाग्रहों के आधार पर ही विश्लेषण किया जाता है। हाल ही में इसकाउदाहरण देखने को मिला जब एक दावा किया गया कि पिछले चार वर्षों में उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए योगी ने कम ही काम किया है।

द प्रिंट की सहायक संपादक रूही तिवारी ने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में दावा किया कि अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों- अखिलेश यादव और मायावती की तुलना में योगी के पास इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियाँ दर्शाने के लिए कुछ नहीं है।

“यदि आप योग आदित्यनाथ के कार्यकाल पर गौर करें तो इंफ्रास्ट्रक्टर विकास के लिए कुछ विशेष नहीं पाएँगे, न बड़ी परियोजनाएँ हुई हैं, अपने पूर्ववर्तियों, मायावती और अखिलेश यादव की तरह उनके पास दिखाने को कुछ नहीं है जिन्होंने एक्सप्रेसवे बनाए, पार्क बनाए जो उनके कार्यकाल की एक पहचान के रूप में उभरे।”, उन्होंने कहा।

सच्चाई से इससे अधिक दूर और क्या होगा क्योंकि यह दावा तब किया जा रहा है जब पिछले चार वर्षों में योगी ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड काम किया है। 2017 में जब वे सत्ता में आए तो उत्तर प्रदेश में दो क्रियाशी एक्सप्रेसवे थे- 165 किलोमीटर लंबा यमुना एक्सप्रेसवे जो आगरा को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से जोड़ता है।

दूसरा 302 किलोमीटर लंबा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे। इन परियेजनाओं को 2007 से 2017 के बीच दोनों पूर्ववर्ती सरकारों ने अपने कार्यकाल में 10 वर्षों से अधिक के समय में पूरा किया। लेकिन ध्यान दें कि जब 2022 में योगी सरकार अपने पाँच वर्ष पूरे करेगी, तब क्या होगा।

तीन एक्सप्रेसवे- 340 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और 91 किलोमीटर लंबे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का काम पूरा हो जाएगा। साथ ही प्रदेश के छठे और सबसे लंबे, 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर काम तब तक शुरू हो चुका होगा।

ध्यान देने वाली बात यह है कि लखनऊ को गाज़ीपुर से जोड़ने वाले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का विचार अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार का था। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे भी इसी सरकार ने बनवाया लेकिन पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का विचार कागज़ पर ही रह गया और 2017 में सपा सत्ता से बाहर हो गई।

एक्सप्रेसवे पर निर्माण कार्य 2018 की तीसरी तिमाही में ही शुरू हो पाया और अब तक लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। संभावना यह है कि एक्सप्रेसवे का मुख्य मार्ग इसी वर्ष के अप्रैल में खोल दिया जाए यानी निर्माण कार्य शुरू होने से तीन वर्ष से भी कम के समय में।

मायावती और अखिलेश की तरह योगी सिर्फ एक परियोजना पर ही अटके नहीं रहे। बल्कि योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे नेटवर्क (जालतंत्र) को बनाने की राह पर है। दो और एक्सप्रेसवे यानी 91 किलोमीटर लंबा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और 290 किलोमीटर लंबा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे भी निर्माणाधीन है।

अपेक्षा है कि ये दोनों एक्सप्रेसवे 2022 के विधान सभा चुनावों से पूर्व खोल दिए जाएँगे। गंगा एक्सप्रेसवे का विचार मायावती के नेतृत्व में बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) की सरकार ने किया था लेकिन पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण उच्च न्यायालय ने इसे अस्वीकार कर दिया था।

वहीं, अखिलेश सरकार ने परियोजना को ठंडे बस्ते में डालकर रख दिया और पूरा ध्यान आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर टिकाया क्योंकि यह इटावा और कन्नौज जैसे सपा के गढ़ों से होकर गुज़रता है। गंगा एक्सप्रेसवे के विचार को योगी सरकार ने पुनर्जीवित किया और पर्यावरण चिंताओं को समझते हुए अनुकूल नई मार्ग रेखा तैयार की।

गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो चुका है। “मुख्यमंत्री इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि एक्सप्रेसवे राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर में आमूलचूल परिवर्तन लाएँगे। वे प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों को उद्योगों के लिए खोलेंगे और संयोजकता बढ़ाएँगे।”, अवनीश अवस्थी ने दिसंबर स्वराज्य से कहा था।

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईडा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अवस्थी के अनुसार योगी लगातार एक्सप्रेसवे की महत्ता पर ज़ोर देते रहे हैं। “यदि आप उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में औद्योगीकरण करना चाहते हैं तो आपको एक्सप्रेसवे की आवश्यकता है ताकि क्षेत्रों तक संयोजकता अच्छी बनी रहे।”, उन्होंने आगे कहा।

अवस्थी ने उदाहरण देकर बताया कि कोई उद्योग तब तक बुंदेलखंड नहीं जाएगा जब तक वहाँ अच्छी संयोजकता नहीं होगी। उनके अनुसार एक्सप्रेसवे पर्यटन को भी बढ़ावा देगें। “यदि कोई दिल्ली से चित्रकूट साढ़े पाँच घंटों में जा सकता है तो वे वहाँ जाकर एक पर्यटक की तरह वापस आना क्यों पसंद नहीं करेंगे?”, अवस्थी कहते हैं।

वे आगे समझाते हैं, “यदि दिल्ली से चित्रकूट जाने में नौ घंटे लगते हैं तो वहाँ जाने वाले व्यक्ति को तीन दिन का कार्यक्रम बनाना पड़ेगा, एक दिन में जाना, एक दिन में घूमना और एक दिन में वापस आना। इसके प्रति लोग उत्साही नहीं होंगे। इसलिए हम एक्सप्रेसवे बना रहे हैं।”

जब तक योगी अपने पाँच वर्षों का कार्यकाल पूरा करेंगे, तब तक वे अपने किसी भी पूर्ववर्ती से अधिक एक्सप्रेसवे का निर्माण कर चुके होंगे। और न सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही बल्कि संभवतः देश के किसी भी मुख्यमंत्री से अधिक एक्सप्रेसवे पर उनका काम होगा।

उत्तर प्रदेश जिन एक्सप्रेसवे पर काम कर रहा है, जब वे सभी पूरे हो जाएँगे तो राज्य के हर दूसरे जिले से एक एक्सप्रेसवे होकर गुज़रेगा। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च कहती है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2020-21 के अपने बजट का 6.3 प्रतिशत भाग सड़कों व पुलों के लिए आवंटित किया था।

यह आँकड़ा राज्यों द्वारा सड़कों व पुलों के लिए औसत स्तर पर आवंटित भाग- 4.2 प्रतिशत से अधिक है। योगी सरकार केंद्र के साथ मिलकर अन्य महत्वाकांक्षी परियोजनाओं जैसे नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और उत्तर प्रदेश रक्षा गलियारे पर भी कार्य कर रही है।

नोएडा हवाई अड्डे के लिए पहले चरण के भूमि अधिग्रहण को 2001 में प्रस्ताव के बाद से ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था लेकिन योगी सरकार ने उसे पूरा कर दिया है। स्विट्ज़रलैंड आधारित ज़्यूरिक़ एयरपोर्ट इंटरनेशनल के साथ नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के डिज़ाइन, निर्माण और परिचालन के लिए रियायती समझौता हो चुका है।

बजट 2020 में इस परियोजना के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। जब यह परियोजना पूरी हो जाएगी तो नोएडा हवाई अड्डा देश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। इसके अलावा योगी सरकार राज्य में मथुरा, अयोध्या जैसे तीर्थ स्थलों को राजस्व कमाने वाले पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने पर भी काम कर रही है।

अयोध्या में वर्तमान हवाई पट्टी को उन्नत करके उत्तर प्रदेश सरकार इसे पूर्ण हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि संयोजकता बढ़े। 2020 के बजट में सरकार ने इसे 500 करोड़ रुपये आवंटित किए थे और 2019 में 200 करोड़ रुपये विस्तारीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए जारी किए गए थे।

शहर के अंदर भी विभिन्न सुविधाएँ और पर्यटक आकर्षण जैसे शहर का बस स्टेशन और सरयू नदी के किनारे के घाटों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। नगर में 1,200 एकड़ के क्षेत्रफल को ‘स्मार्ट अयोध्या’ के रूप में विकसित किया जाएगा।