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स्वच्छ ऊर्जा में भारत का परचम- मिला दूसरा स्थान, चीन सातवें स्थान पर फिसला

क्लाईमेटस्कोप रिपोर्ट 2018 के अनुसार भारत तीन पायदानों की छलांग लगाकर अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के विकास व परिनियोजन में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है, ब्लूमबर्ग क्विन्ट  ने बताया। ऊर्जा अनुसंधानक ब्लूमबर्ग एईएफ ने यह रिपोर्ट प्रकाशित की।

103 देशों का सर्वेक्षण तीन आयामों पर हुआ था- सरकारी नीतियाँ, स्वच्छ ऊर्जा में निवेशके दस्तावेज और ग्रिड प्रतिबंधों के बावजूद डी-कार्बनाइज़ेशन के लिए प्रतिबद्धता। दक्षिण अमरीकी देश चिली इस सूची में सर्वश्रेष्ठ आया है, उसके बाद भारत और तीसरे स्थान पर मध्य-पूर्वी देश जॉर्डन।

भारत के उज्ज्वल स्वच्छ ऊर्जा उद्योग पर टिप्पणी करते हुए रिपोर्ट में कहा गया, “भारतीय बाज़ार विश्व में सबसी बड़ी और सबसी प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी का केंद्र है जिसमें केवल सौर्य व पवन ऊर्जा के लिए ही 10.5 गीगावाट का अनुबंध दिया गया।”

हालाँकि इस रिपोर्ट में चीन की नाकामी भी देखने को मिली जो पिछले वर्ष के पहले स्थान से इस वर्ष सातवें स्थान पर पहुँच गया है। उल्लेखित है, “अभी तक स्वच्छ ऊर्जा के लिए चीन सबसे बड़ा बाज़ार है, कटौती के मामलों और सौर्य उर्जा प्रदाताओं की सब्सिडी पर रोक के कारण इसके अंकों में गिरावट हुई है।”

इन उपलब्धियों के बावजूद लगता है कि 2022 तक 175 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा की स्थापना के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य से सरकार चूक जाएगी। इनमें से 100 गीगावाट सौर्य पैनलों, 60 गीगावाट पवन, 10 गीगावाट बायोमास और 5 गीगावाट की पनबिजली से आने की अपेक्षा थी।