इन्फ्रास्ट्रक्चर
पश्चिम बंगाल में रेलवे परियोजनाओं के लिए पीयूष गोयल ने माँगा राज्य सरकार का सहयोग

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भूमि अधिग्रहण और अनुमति की समस्याओं के कारण पश्चिम बंगाल में कई रेल परियोजनाओं पर बुरा प्रभाव पड़ा है जिसके लिए उन्होंने रेल इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए राज्य सरकार के सहयोग की माँग की है।

पश्चिम बंगाल में कई परियोजनाएँ मात्र भूमि अधिग्रहण और अनुमति के मुद्दों के कारण विलंबित हो रही हैं। इनमें से कई मुद्दे ऐसे हैं जो राज्य सरकार के सहयोग से सुलझाए जा सकते हैं, राज्य में कई रेल परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए गोयल ने कहा।

उन्होंने कहा कि व्यापार गतिविधियों में पश्चिम बंगाल को देश का अग्रणी राज्य बनाने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना पूरा करने में रेलवे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि बेहतर संयोजकता और सुविधाएँ व्यापार के लिए लाभदायक होती हैं।

“दुखद बात यह है कि पश्चिम बंगाल में हमारी ऐसी परियोजनाएँ हैं जो कई वर्षों पहले स्वीकृत हो गईं थीं लेकिन भूमि अधिग्रहण या अनुमति या अन्य कारणों से आज तक फलीभूत नहीं हो सकी हैं।”, वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से पूर्वी रेलवे की कई परियोजनाओं के उद्घाटन के दौरान मंत्री ने कहा।

गोयल ने बताया कि परियोजना को पूरा करने में विलंब से लागत काफी बढ़ जाती है और देश के कोष का नुकसान होता है लेकिन लोगों का कोई लाभ नहीं होता। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से समय पर भूमि और अन्य अनुमतियाँ मिल जाने से “सुनिश्चित होगा कि करदाताओं का पैसा लोगों के लाभ में सही तरह से काम आए।”

“आने वाले महीनों और वर्षों में पश्चिम बंगाल के कायापलट” की कामना करते हुए गोयल ने कई परियोजनाओं के बारे में बताया जो रेल मंत्रालय राज्य में करने की योजना में है। उन्होंने कहा कि 1946 में स्वतंत्रता से पूर्व भारत में बंगाल रोजगार के मामले में पहले और विनिर्माण में दूसरे स्थान पर था।

निर्माणाधीन पैदल पुल (चित्र साभार- @RailMinIndia)

“इतने वर्षों में विकास और प्रगति की दौड़ में पश्चिम बंगाल पीछे रह गया, इस बात का साक्ष्य यह है कि हम राज्य में कितनी परियोजनाएँ पूरा करना चाहते हैं लेकिन विभिन्न स्तरों पर अटके हुए हैं, मुख्यतः भूमि अधिग्रहण समस्याओं के कारण।”, मंत्री ने कहा।

उन्होंने कहा कि रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी मात्रा में और समय पर भूमि की आवश्यकता होती है ताकि परियोजनाओं को मिशन मोड में पूरा किया जा सके। “पश्चिम बंगाल में परियोजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी।”, कहते हुए गोयल ने रेखांकित किया कि राज्य सरकार से बेहतर सहयोग और शीघ्र अनुमति मिलने पर केंद्र के कोष का उपयोग करके परियोजनाएँ जल्दी पूरी होंगी।

गोयल ने बताया कि पश्चिम बंगाल में छह जोड़ी किसान विशेष ट्रेनें चल रही हैं जो दूर-दराज क्षेत्रों से किसानों की उपज का परिवहन करके उन्हें लाभ पहुँचा रही हैं। उनके अनुसार पश्चिम बंगाल में रेवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पिछले छह वर्षों में 19,811 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और यात्रियों की सुविधाओं के लिए इसके अलावा 710 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

पूर्वी रेलवे के महाप्रबंधक मनोज जोशी ने बताया कि 2014-19 में कुल 661 किलोमीटर की रेल लाइन बनाई गई जबकि 2009-14 के लिए यह आँकड़ा मात्र 335 किलोमीटर का है। उनके अनुसार 2014-19 में 1,290 किलोमीटर लंबे खंड का विद्युतीकरण किया गया और 2019-20 में 153 किलोमीटर का।

गोयल ने कहा कि दिसंबर 2023 तक पश्चिम बंगाल में सभी रेलवे लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण कर दिया जाएगा। उनके अनुसार इससे प्रदूषण कम होगा और ट्रेनों की गति बढ़ेगी, साथी ही यात्रियों को बेहतर सेवाएँ मिल सकेंगी। हाल ही में 34 किलोमीटर लंबे मनिग्राम-निमतिता खंड का विद्युतीकरण हुआ है जिसका उद्घाटन गोयल ने मालगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर किया।

17 फरवरी को लिद्युत लाइन पर चलाई गई मालगाड़ी (चित्र साभार- @drmmalda)

इसके अलावा पूर्वी रेलवे के हावड़ा और मालवा मंडल में कई रोड अंडर ब्रिज और पैदल पुलों का उद्घाटन किया गया। मनिग्राम और माल्दा के निकट स्थित रोड अंडर ब्रिज, खगराघाट रोड, लालबाग कोर्ट रोज, टेन्या, दहपाड़ा धाम, सुजनीपाड़ा, बसुदेबपुर और नियालिशपाड़ा स्टेशनों पर कुल सात पैदल पुलों का उद्घाटन हुआ।

कार्बन फुटप्रिंट को कम करके स्वच्छ ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) को बढ़ाने के लिए 52.05 करोड़ रुपये की लागत से मनिग्राम-निमतिता खंड का विद्युतीकरण हुआ है। हावड़ा से डिबरुगढ़ के बीच की ‘सागर पूर्वोदय संपर्क लाइन’ जैसे महत्त्वपूर्ण मार्ग का भाग है यह 34 किलोमीटर लंबा खंड।

इससे सागरदिघि थर्मल पावर प्लांट और सोनार बांग्ला सीमेंट संयंत्र तक जाने वाला माल डीज़ल की जगह विद्युत ऊर्जा से परिचालित होगा। 2014-20 में रेलवे ने कुल 18,065 किलोमीटर लंबी रेल लाइनों का विद्युतीकरण किया है और 2023 तक शत प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य कर रहा है।

पूर्ण विद्युतीकरण के साथ रेलवे प्रति वर्ष ईंधन पर 14,500 करोड़ रुपये की बचत कर सकेगा। बजट में पूर्वी रेलवे पर विशेष ध्यान दिया गया है और पिछले वर्ष से 10.86 प्रतिशत कोष इसे अधिक मिला है। 2020-21 में इस ज़ोन को 2,273.69 करोड़ रुपये मिले थे जबकि बजट 2021-22 में इसे 2,520.7 करोड़  रुपये आवंटित किए गए है।