इन्फ्रास्ट्रक्चर
महामारी के बावजूद कैसे चल रहा है उत्तर प्रदेश के चार विकासशील एक्सप्रेसवे पर काम

कोविड-19 वैश्विक महामारी की भारत में दूसरी लहर के कारण उत्तर प्रदेश में कर्फ्यू और लॉकडाउन फिर से देखने को मिले ताकि संक्रमण की दर को नियंत्रित किया जा सके। लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार महत्त्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय पर समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है।

राज्य की एक्सप्रेसवे परियोजनाओं का कार्य नहीं रुका है। भले ही महामारी के कारण पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य एवं गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य प्रभावित हुआ है लेकिन कोई बड़ी बाधा देखने को नहीं मिली है।

राज्य में एक्सप्रेसवे के नियोजन एवं निर्माण के लिए उत्तरदायी एजेंसी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईडा) ने बताया कि महामारी के बीच भी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर कार्य जारी रहा है।

हालाँकि, यूपीईडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनीश अवस्थी ने लखनऊ में स्वराज्य से वार्ता में यह माना कि महामारी के कारण कार्य कुछ हद तक तो प्रभावित हुआ है। लेकिन यूपीईडा ने विश्वास व्यक्त किया कि खतरनाक दूसरी लहर से जो छोटी-मोटी बाधाएँ आई हैं, उनसे अगले कुछ दिनों में निजात पा लिया जाएगा।

“हम अगले 10 दिनों में पुनः वापसी कर लेंगे, 30 मई तक मानकर चलिए।”, अवस्थी ने कहा जो गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में भी कार्यरत हैं। “हमारे सभी कार्यालय और शिविर पुनः खुल गए हैं। हम निरंतर धूमन कर रहे हैं और दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं।, उन्होंने आगे कहा।

“हम पिछले तीन दिनों से वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से बैठकें कर रहे हैं। हमारा 30 से 40 प्रतिशत श्रमबल जो कार्य छोड़कर चला गया था, वह अब लौटने लगा है।”, अवस्थी ने कार्य किस प्रकार से चल रहा है, इस विषय में जानकारी दी।

निर्माणाधीन बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे

उनका कहना है कि यूपीईडा वर्तमान में जिन परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है, उनकी समयरेखा पर महामारी का कोई अधिक प्रभाव नहीं होगा। “महामारी के कारण हमारी समयरेखाओं पर थोड़ा तो प्रभाव पड़ेगा लेकिन अधिक नहीं। ज़्यादा से ज़्यादा 15 दिन या महीने भर की देरी होगी।”, यूपीईडा सीईओ ने कहा।

वर्तमान में योगी आदित्यनाथ सरकार चार एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। इनमें से तीन- 340 किलोमीटर लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे , 296 किलोमीटर लंबा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और 91 किलोमीटर लंबा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे- वर्तमान में निर्माणाधीन हैं।

जो चौथा एक्सप्रेसवे है, वह प्रदेश का सबसे लंबा होगा- 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे। इसके लिए राज्य सरकार वर्तमान में भूमि अधिग्रहण का कार्य कर रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों, जिनकी सीमा बिहार से लगी है, को लखनऊ से जोड़ता है।

लखनऊ से जुड़ जाने के कारण आगरा-लखनऊ और यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश का पूर्वी क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से भी स्वतः जुड़ जाता है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड क्षेत्र को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ता है जिससे इस क्षेत्र की पहुँच भी एनसीआर तक हो जाती है।

यह एक्सप्रेसवे रक्षा गलियारे की सफलता के लिए महत्त्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को शुरू किया ताकि क्षेत्र में निवेश को आकर्षित किया जा सके। इसके लिए कुछ नोड प्रस्तावित हैं जैसे झाँसी और चित्रकूट जो बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित हैं।

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे, जैसा नाम से ही समझ आता है, यह गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। गोरखपुर से शुरू होकर यह एक्सप्रेसवे दो जिलों से गुज़रेगा- कबीर नगर और अंबेडकर नगर तथा आज़मगढ़ में जाकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा।

गोरखपुर में ही गोरखनाथ पीठ का केंद्र हैं जहाँ के महंत अभी भी योगी आदित्यनाथ हैं। 1998 से 2017 तक वे संसद में लगातार पाँच बार गोरखपुर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने सांसद का पद त्यागा।

18 मई तक 6-लेन वाले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था, अवस्थी ने बताया। उनके अनुसार इस वर्ष जून में एक्सप्रेसवे के मुख्य मार्ग को ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। वहीं, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य 58 प्रतिशत, तो गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का कार्य 22 प्रतिशत पूरा हुआ है।

गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य महामारी के बीच भी जारी है और इस परियोजना के लिए आवश्यक 41 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। “आज हमने 25 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया।”, मंगलवार (18 मई) को स्वराज्य से वार्ता में अवस्थी ने बताया।

“हम शीघ्र ही प्रतिदिन 50-60 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के सामान्य स्तर पर लौट जाएँगे। हमने अब तक भूमि खरीद पर 2,900 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पहले हम जुलाई-अगस्त तक काम शुरू करना चाहते थे लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण अंतर्राष्ट्रीय कंपनियाँ और समय की माँग कर रही हैं।”, उन्होंने आगे कहा।

बात यह है कि कंपनियाँ भौतिक रूप से स्वयं जाकर कार्यस्थल को देखने चाहती हैं जो महामारी के कारण संभव नहीं हो पा रहा है। अवस्थी को अपेक्षा है कि जुलाई या अगस्त तक बोलियाँ तैयार कर दी जाएँगी।

गंगा एक्सप्रेसवे का प्रथम चरण 594 किलोमीटर लंबा होगा एवं मेरठ, हापुर, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूँ, शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, राय बरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जिलों से गुज़रेगा।

प्रखर स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @prakharkgupta के माध्यम से ट्वीट करते हैं।