इन्फ्रास्ट्रक्चर
तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान में 32,573 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ शुरू

एक सप्ताह के भीतर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कर्नाटक और तेलंगाना में क्रमशः 10,904 करोड़ रुपये की लागत वाली 33 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं तथा 13,169 करोड़ रुपये की लागत वाली 14 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन किया।

आज (24 दिसंबर) राजस्थान में 8,500 करोड़ रुपये की लागत वाली 1,127 किलोमीटर लंबी 18 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी गडकरी ने किया। से परियोजनाएँ आवागमन और वस्तुओं की ढुलाई सुगम करने के साथ-साथ पर्यटन व औद्योगिक विकास को बल और सामरिक महत्व की सीमा संयोजकता भी प्रदान करेंगी।

सड़क परिवहन और संयोजकता को बल देने वाली इन परियोजनाओं की शुरुआत वर्चुअल माध्यम से की गई। तेलंगाना में इन परियोजनाओं के तहत बनने वाली 766 किलोमीटर लंबी सड़कें राज्य के लगभग सभी 33 जिलों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ पाएँगी। वहीं कर्नाटक में 1,197 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाएँ आर्थिक गलियारे, तटीय और दूरस्थ क्षेत्रों से संयोजकता बढ़ाएँगी।

1,227 करोड़ रुपये की परियोजना का शिलान्यास

समारोह के दौरान गडकरी ने बताया कि पिछले छह वर्षों में तेलंगाना में 17,617 करोड़ रुपये की लागत वाली 1,918 किलोमीटर की कुल स्वीकृत लंबाई की 59 सड़क परियोजनाओं को अनुमति दी गई है। इनमें से 15,689 करोड़ रुपये की लागत में 1,782 किलोमीटर लंबी सड़कों का काम पूरा भी हो चुका है।

उन्होंने बताया कि एक बचे हुए जिले पेद्दापल्ली को भी इस नेटवर्क से शीघ्र ही जोड़ दिया जाएगा। यह भी कहा कि पिछले छह वर्षों में राज्य का सड़क नेटवर्क 55.71 प्रतिशत बढ़ गया है और इस काल में तेलंगाना को 1,400 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग मिले। सीआरआईएफ योजना के तहत राज्य को 2,436 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जिनमें से 1,483 करोड़ रुपये जारी भी किए जा चुके हैं।

गडकरी के अनुसार 2014-15 से तेलंगाना में 4,973 करोड़ रुपये की लागत से 841 किलोमीटर लंबी सड़कें बन चुकी हैं। 13,012 करोड़ रुपये की लागत से 809 किलोमीटर लंबी सड़कें निर्माणाधीन हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में प्रस्ताव आया है कि राज्य में 8,957 करोड़ रुपये की लागत से 13 बड़ी परियोजनाओं के अंतर्गत 328 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएँ।

192 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए 2,339 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन परियोजनाओं की बोली प्रक्रिया शुरू हो गई है, उन्होंने बताया। 27,116 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 1,422 किलोमीटर लंबी 21 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की विवरणात्मक रिपोर्ट (डीपीआर) पर काम जारी है। अपेक्षा है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 तक इनपर काम पूरा हो जाए।

सार्वजनिक उपयोग के लिए खोली गई तेलंगाना की एक सड़क

गडकरी का कहना है कि नए भारत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुसार विश्व-स्तरीय परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का काम प्राथमिकता पर है और भारत के अब तक के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्यक्रम के अंतर्गत भारतमाला योजना जैसे प्रयास जारी हैं।

इस परियोजना की अवधारणा प्रमुख उद्गम-गंतव्य बिंदुओं के बीच माल की आवाजाही के वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है ताकि सड़कों के विकास से कुशल माल और यात्री आवागमन हो सके। 1,730 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाओं की पहचान भारतमाला परियोजना के अंतर्गत तेलंगाना में की गई है।

इन 14 परियोजनाओं में 423 किलोमीटर की कुल लंबाई की नौ परियोनाओं का अनुबंध 7,400 करोड़ रुपये की लागत पर सौंप भी दिया गया है। तेलंगाना में ग्रीनफील्ड (जहाँ पहले से विकास न हो) और पहुँच-नियंत्रित गलियारों की भी योजना बन रही है ताकि वर्तमान गलियारों से ट्रैफिक को कम, साथ ही यात्रा समय और लागत को भी कम किया जा सके।

ये परियोजनाएँ अर्थव्यवस्था को बल देंगी। कर्नाटक में विकासशील परियोजनाओं का सकारात्मक प्रभाव कृषि, मत्स्यपालन और स्वास्थ्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। तेलंगाना में सूरत-अहमदनगर-सोलापुर-कुरनूल-चैन्नई परियोजना का 75 किलोमीटर लंबा भाग होगा, वहीं सूर्यापेट-खम्मम-देवरापल्ली परियोजना का 164 किलोमीटर लंबा भाग व इंदौर-हैदराबाद परियोजना का 136 किलोमीटर लंबा भाग राज्य से गुज़रेगा।

समारोह में वर्चुअल रूप से उपस्थित लोग

इन गलियारों के विकास से वर्तमान की सड़कों का ट्रैफिक तो कम होगा ही, साथ ही यात्रा समय के कम होने और ईंधन के कम उपयोग से बचत भी होगी जिससे कार्बन फुटप्रिंट भी नियंत्रित किया जा सकेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए गलियारों के आसपास कई आराम और सुख-सुविधाएँ भी विकसित की जाएँगी।

गलियारों का नियोजन पहुँच-नियंत्रित के रूप में किया गया है जिससे यात्री बेहतर सुरक्षा के साथ तीव्र गति से यात्रा कर सकेंगे। इन गलियारों के विकास से ब्लू-कॉलर और वाइट-कॉलर दोनों प्रकार के रोजगार के अवसर सृजित होंगे जो अर्थव्यवस्था को बल देने के लिए अति आवश्यक हैं।

गडकरी ने राज्य से यह भी निवेदन किया कि कृषि में विविधता लाकर आर्थिक उत्पादकता को बल दिया जाए। उन्होंने कहा कि देश में पहले से चीनी और चावल का आवश्यकता से अधिक उत्पादन हो रहा है और सरकारी भंडार में भी इनकी पर्याप्त मात्रा है। ऐसे में अतिरिक्त उत्पाद का इथैनॉल बनाया जा सकता है जो वाहनों के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में काम करेगा।

उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ किसानों की आय में वृद्धि होगी बल्कि देश में ईंधन का स्वदेशी साधन भी हो जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान परिवहन राज्यमंत्री विजय कुमार सिंह, गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी और तेलंगाना के परिवहन मंत्री वेमुला प्रशांत रेड्डी व कुछ सांसद एवं विधायक वर्चुअल रूप से उपस्थित थे।