इन्फ्रास्ट्रक्चर
केवड़िया के लिए शुरू आठ ट्रेनों में दिखता है रेलवे के आधुनिकीकरण का प्रमाण

हाल के समय में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के तरीकों में आए परिवर्तन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इसके कारण भारतीय रेलवे को आधुनिक बनाने की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति हुई है।

देश के अलग-अलग क्षेत्रों से गुजरात के केवड़िया को जोड़ने वाली आठ ट्रेनों को हरी झंडी दिखाते हुए मोदी ने कहा कि पहले ध्यान इस बात पर रहता था कि जो इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो चुका है उसे सुचारु रूप से चलाया जाए और नए विचारों या नई तकनीक पर कम ध्यान दिया जाता था इसलिए आवश्यकता थी कि यह तरीका बदले।

अलग-अलग स्थानों से केवड़िया को आने वाली ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने के अलावा मोदी ने ब्रोड गेज में परिवर्तित की गई 18 किलोमीटर लंबी दभोई-चंदोद रेल लाइन, चंदोद से केवड़िया के बीच बनी 32 किलोमीटर लंबी नई ब्रोड गेज लाइन, 80 किलोमीटर लंबे प्रतापनगर-केवड़िया खंड के विद्युतीकरण और दभोई, चंदोद व केवड़िया में नए स्टेशन भवनों का उद्घाटन भी वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से किया।

केवड़िया से चेन्नई, वाराणसी, रीवा, दादर और दिल्ली के बीच ट्रेनों के साथ-साथ प्रतापनगर और केवड़िा के बीच मेमू सेवा भी चलाई गई। रेल संयोजकता के साथ केवड़िया का अभूतपूर्व विकास होगा जिसका लाभ पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय आदिवासियों को भी मिलेगा जिनके लिए स्व-रोजगार और रोजगार के नए अवसर यह रेल संयोजकता खोल देगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में पूरी रेलवे प्रणाली को समुचित रूप से बदलने पर काम हुआ है जो कि बजट में थोड़े संशोधन या नई ट्रेन की घोषणाओं तक सीमित नहीं था। कई मोर्चों पर हुए परिवर्तनों को रेखांकित करते हुए उन्होंने केवड़िया संयोजकता की परियोजना का उदाहरण दिया जहाँ पर बहु-केंद्रित योजना के कारण रिकॉर्ड समय में काम पूरा हो सका।

मोदी ने समर्पित मालवाहक गलियारे (डीएफसी) को भी हाल के समय में कार्य प्रणाली में आए परिवर्तनों का उदाहरण बताया। “2006 से 2014 तक डीएफसी परियोजना प्रगतिशील थी, काम सिर्फ कागज़ों पर हो रहा था और 1 किलोमीटर पटरी भी नहीं बिछाई गई थी। अब अगले कुछ महीनों में कुल 1,100 किलोमीटर लंबे ट्रैक पूरे हो जाएँगे।”, उन्होंने कहा।

केवड़िया परियोजना के लिए 811 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और जुलाई 2020 तक नई लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका था जिसके पाँच महीनों बाद ही इन लाइनों को क्रियाशील कर दिया गयाजो कि किसी रेल परियोजना के पूरा होने का रिकॉर्ड समय है।

जनपद अभियांत्रिकी कार्य को तीव्र गति देने के लिए आधुनिक अभियांत्रिकी तकनीकें और उपकरण लाए गए। इस परियोजना में कुल सात स्टेशन हैं जिनमें से तीन मुख्य और चार हॉल्ट स्टेशन हैं। इनमें चार नए स्टेशन- मोरिया, तिलकवाड़ा, गरुड़ेश्वर और केवड़िया बने हैं और तीन स्टेशन- दभोई, वडाज और चंदोद पहले से बने हुए हैं।

केवड़िया रेलवे स्टेशन

इस परियोजना में तीन बड़े पुल, 79 छोटे पुल, नौ रोड ओवर ब्रिज और 31 रोड अंर ब्रिज भी हैं। प्रतापनगर से दभोई के बीच के खंड की गति को 75 दिनों की छोटी-सी अवधि में 75 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 110 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया गया है और दभोई-केवड़िया खंड का निर्माण 110 किलोमीटर प्रति घंटा की गति के लिए हुआ है।

प्रतापनगर से केवड़िया के पूरे खंड की गति को और बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रति घंटा किया जाएगा। दभोई, चंदोद और केवड़िया के स्टेशन भवनों का निर्माण स्थानीय विशेषताओं और आधुनिक यात्री सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सौंदर्य की दृष्टि से किया गया है।

देश की अलग दिशाओं से विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति स्टैच्यू ऑफ युनिटी तक रेल संयोजकता प्रदान करने के साथ-साथ यह परियोजना नर्मदा नदी के किनारे बसे महत्त्वपूर्ण धार्मिक और प्राचीन पूजन स्थलों जैसे करनाली, पोइचा और गरुड़ेश्वर के मंदिरों को भी संयोजकता प्रदान करेगी।

केवड़िया स्टेशन के मुख्य भाग पर स्टैच्यू ऑफ युनिटी की 12 फीट लंबी प्रतिमूर्ति भी लगाई गई है जिसका डिज़ाइन स्टैच्यू ऑफ युनिटी का डिज़ाइन करने वाले राम वी सुतार ने ही किया है।

केवड़िया स्टेशन पर सरदार पटेल की मूर्ति

पूरे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को बल देने के साथ-साथ यह परियोजना घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को बल देगी व इससे रोजगार के नए अवसर और व्यापार अवसर खुलेंगे। आसपास के क्षेत्र में बड़ी पार्किंग जगह, लैन्डस्केपिंग, सेल्फी ज़ोन सहित थीम आधारित उद्यान, सौर्य ऊर्जा से चलने वाले प्रकाश स्तंभ, चौड़ी सड़कें, बाग-बगीचे, फूड कोर्ट और बच्चों के खेलने के लिए भी स्थान विकसित किया जा रहा है।

उल्लेख करना आवश्यक है कि गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर 31 अक्टूबर 2013 को नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यु ऑफ युनिटी की आधारशिला रखी थी। सरदार पटेल की 143वीं जयंती पर 31 अक्टूबर 2018 को 182 मीटर लंबी स्टैच्यू ऑफ युनिटी का लोकार्पण किया गया।

ऐसे में भारत के लौह पुरुष और आधुनिक भारत के निर्माता पटेल को श्रद्धांजलि के रूप में बनाए गए स्टैच्यू ऑफ युनिटी परियोजना की कीर्ति रेल संयोजकता के साथ और भी बढ़ेगी।