इन्फ्रास्ट्रक्चर / संस्कृति
उत्तराखंड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग पर होंगे ‘पहाड़ी’ वास्तु पद्धति में निर्मित स्टेशन

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन पर बनने वाले रेलवे स्टेशन उत्तराखंड की संस्कृति की झलक प्रस्तुत करेंगे। उत्तराखंड सरकार ने रेल विकास निगम लिमिटेड (आर.वी.एन.एल.) को उस मार्ग के सभी स्टेशनो का निर्माण ‘पहाड़ी’ वास्तु पद्धति से करने को कहा है जिसकी स्वीकृति आर.वी.एन.एल. ने दी, जागरण ने रिपोर्ट किया है।

राज्य सरकार के लिए यह रेल परियोजना उच्च प्राथमिकता रखती है क्योंकि यह न केवल पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण है बल्कि युद्ध नीति के दृष्टिकोण से भी आवश्यक है। रेल मार्ग के बनने से पर्यटकों का आवा-गमन बढ़ेगा, तीर्थयोत्रियों को भी सुविधा मिलेगी क्योंकि इस क्षेत्र में कई हिंदू तीर्थस्थल हैं और साथ ही चीनी सीमा तक सुरक्षा बलों को बेहतर परिवहन मिलेगा।

इस रेल मार्ग का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और सरकार का लक्ष्य इस 2024 तक पूरा करने का है। प्रशासन इस परियोजना के विकास पर नज़र रखे हुए है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार इस परियोजना की समीक्षा की है।

राज्य सरकार चाहती है कि इस परियोजना में राज्य की छवि झलके इसलिए यह योजना बनी कि इस मार्ग के 12 रेलवे स्टेशन पहाड़ी पद्धति में बनाए जाएँगे।

रेल विकास निगम लिमिटेड इस पद्धति पर आधारित न्यू ऋषिकेश रेलवे स्टेशन का विकास कार्य शुरु कर चुका है। स्टेशन के गुंबद की आकृति श्री केदारनाथ मंदिर से प्रेरित है।

इस मार्ग पर बनने वाले 12 रेलवे स्टेशन हैं- वीरभद्र, न्यू ऋषिकेश, शिवपुरी, बयासी, देवप्रयाग, मीठा, श्रीनगर, धारी देवी, रुद्रप्रयाग, घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग, और इन्हीं का विकास पहाड़ी पद्धति में होगा। हालाँकि किसी भी निर्माण कार्य में लकड़ी का प्रयोग नहीं किया जाएगा।