इन्फ्रास्ट्रक्चर / राजनीति
मात्र 33 महीनों में बनकर तैयार स्टेचू ऑफ़ युनिटी, एल एंड टी ने इसे बताया भारतीय अभियांत्रिकी का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण

इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में विशाल कंपनी लार्सेन एंड टुब्रो ने दावा किया कि भारत में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को श्रद्धांजलि के रूप में बनने वाली स्टेचू ऑफ़ युनिटी विश्व में सबसे ऊँची मूर्ति है और मात्र 33 महीनों में पूरी हुई है, वहीं चीन के स्प्रिंग टेम्पल बुद्धा को पूरा होने में 11 वर्ष लगे थे।

सड़क की तरफ से 182 मी. ऊँची और नदी की ओर से 208.5 मी. ऊँची यह प्रतिष्ठित मूर्ति 153 मी. लंबे चीन के स्प्रिंग टेम्पल बुद्धा से लंबी है और साथ ही इसकी लंबाई न्यू यॉर्क के स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी से दुगनी है।

2,989 करोड़ रुपए की लागत से बने स्टेचू ऑफ़ युनिटी के अलावा इसका पीतल का आवरण भी भारत निर्मित ही है, एल एंड टी ने पी.टी.आई. को बताया। यह मूर्ति सरदार सरोवर बांध के 3.5 किलोमीटर नीचे की ओर नर्मदा नदी के तल पर संधु पहाड़ी पर बनी है।

इस विशाल मूर्ति का उद्घाटन 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा।

प्रॉजेक्ट निदेशक मुकेश एस रावल ने बताया, “मूर्तिकार राम सुथार जी ने कुछ प्रतिकृतियाँ बनाई थीं और अंततः 30 फीट ऊँची पीतल की प्रतिकृति हमें सौंपी गई थी। उस प्रतिकृति को हमने एलेक्ट्रॉनिक डाटा में स्कैन किया और उस 597 फीट (182 मीटर) की डाटा ग्रिड में परिवर्तित किया गया। कुछ संशोधन भी करने पड़े क्येंकि उदारीकरण में कुछ बारीकियाँ खो जाती हैं। फिर इस डाटा को हम ढलाईखाने ले गए जहाँ पीतल का आवरण तैयार हुआ। यह ऐसा था कि हज़ारों टुकड़ों को जोड़कर हमें एक त्रिआयामी ढाँचा तैयार करना था।”

दर्शक दीर्घा जिसमें एक समय पर 200 व्यक्ति आ सकते हैं, वहाँ से सतपुड़ा और विंध्यांचल पर्वत श्रृंखलाओं का नज़ारा देखने को मिलेगा और यह ऐसा स्थान है जहाँ मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र मिलते हैं।

दर्शकों को सरदार सरोवर जलाशय और 12 किलोमीटर लंबे गरुडेश्वर जलाशय का भी दृश्य देखने को मिलेगा।

मूर्ति के प्रवेश पर सभाकक्ष में एक संग्रहालय होगा और ऑडियो व दृश्य गैलरी में सरदार पटेल व गुजरात की जनजातीय संस्कृति पर 15 मिनट की प्रस्तुति दी जाएगी जैसा कि बुर्ज खलिफा में होता है जहाँ इसके निर्माण के विषय में ऑडियो व दृश्य प्रस्तुति दी जाती है।

आश्चर्य की बात है कि उस समय गुजरात के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 दिसंबर 2013 को एक अभियान चालू किया था जिसके अंतर्गत 1,69,000 गाँवों में तीन लाख खाली डब्बे लेकर गए थे और फलस्वरूप 2016 में 135 टन लोहा जमा कर लिया गया था, एल एंड टी ने बताया।