इन्फ्रास्ट्रक्चर
रेलवे का अजमेर, जैसलमेर और गोरखपुर में भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग का प्रस्ताव

खाली पड़ी रेलवे भूमि के व्यावसायिक उपयोग की योजना पर आगे बढ़ते हुए रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) ने अजमेर, जैसलमर और गोरखपुर की लगभग 70,000 वर्ग फीट की भूमि लीज़ पर देने का प्रस्ताव दिया है।

राजस्थान में जैसलमेर और अजमेर के दो भूखंडों को 60 करोड़ रुपये के अनुमानित मूल्य पर लीज़ पर देने के लिए आरएलडीए ने प्रस्ताव के लिए निवेदन (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल) जारी कर दिया है।

जैसलमेर का भूखंड 3 हेक्टेयर से थोड़ा अधिक और जैसलमेर रेलवे स्टेशन के निकट जोधपुर रोड से लगा हुआ है। वहीं अजमेर में स्थित भूखंड लगभग 9,000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल का है जो ब्यावर रोड पर स्थित है। दोनों ही भूखंडों को 45 वर्षों की अवधि के लिए व्यावसायिक उपयोग हेतु दिया जाएगा।

“राजस्थान एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य है जो तीव्र औद्योगिक विकास और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर के सशक्तिकरण का साक्षी भी बना है। इससे क्षेत्र की आर्थिक संभावनाएँ खुल गई हैं। इन भूखंडों के व्यावसायिक विकास से खुदरा और अचल संपत्ति क्षेत्र को बल मिलेगा।”, वेद प्रकाश दुदेजा ने कहा।

दुदेजा आरएलडीए के उपाध्यक्ष हैं जिन्हें अपेक्षा है कि इन भूखंडों को लीज़ पर देने से रोजगार उत्पन्न होगा तथा राज्य के आर्थिक विकास में सहयोग होगा। जैसलमेर और अजमेर, दोनों ही भारतीय रेलवे के उत्तर-पश्चिम रेलवे में आते हैं।

जैसलमेर और अजमेर भूखंडों का सेवा मूल्य क्रमशः 20.5 करोड़ रुपये तथा 40 करोड़ रुपये अपेक्षित हैं एवं बोली लगाने के लिए अंतिम तिथि क्रमशः 27 अप्रैल व 10 मई है। राजस्थान में कृषि खाद्य पार्क, आयात प्रोत्साहन औद्योगिक पार्क और विशेष आर्थिक ज़ोन की स्थापना पिछले कुछ वर्षों में हुई है।

आनंद प्रकाश, महाप्रबंधक, उत्तर-पश्चिम रेलवे निरीक्षण के दौरान

इस इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ राजस्थान से गुज़रने वाला प्रस्तावित दिल्ली-मुंबई आर्थिक गलियारा संयोजकता को बल देगा, आर्थिक विकास का सहयोग करेगा और क्षेत्र में आर्थिक-सामाजिक परिवर्तन लाएगा।

इसके अलावा आरएलडीए ने गोरखपुर के रामगढ़ ताल क्षेत्र में रेलवे ट्रांज़िट सुइट्स के निर्माण और भूखंड पर आवासीय विकास के लिए लीज़ का भी आरएफपी जारी किया है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने रेलवे भूमि को व्यावसायिक या आवासीय उपयोग के लिए मास्टर प्लान में परिवर्तन से छूट दे दी है।

गोरखपुर की बौलिया कॉलोनी में रेलवे की कॉलोनी विकास योजना के तहत कुछ रेलवे क्वार्टर भी बनाए जाने हैं। “गोरखपुर पूर्वी भारत का द्वार है। रामगढ़ ताल कॉलोनी में प्रस्तावित आवश्यक रेलवे पुनर्विकास और आवासीय विकास तथा बौलिया में रेलवे क्वार्टर्स का निर्माण निवेशकों के लिए अवसर है।”, दुदेजा ने कहा।

गोरखपुर के मुख्य भाग में स्थित होने के कारण दुदेजा इसे अवसर मानते हैं, साथ ही उन्हें स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजित होने की अपेक्षा है। रामगढ़ ताल का भूखंड 32,911 वर्ग मीटर क्षेत्रफल का है और महोद्दीपुर में रामगढ़ ताल झील के किनारे स्थित है।

यह रेलवे क्षेत्र के निकट और मोहद्दीपुर ब्लॉक में स्थित प्रमुख आवासीय और व्यासायिक स्थान है। परियोजना की भूमि दो भागों में विभाजित किया गया है। लगभग 32,011 वर्ग मीटर का पहला भाग 99 वर्ष की लीज़ अवधि पर आवासीय विकास के लिए चयनित डवलपर को दिया जाएगा।

आवासीय विकास के लिए निर्माण क्षेत्रफल 48,017 वर्ग मीटर (पार्किंग स्थल और बेसमेंट को छोड़कर) तय किया गया है। प्रस्तावित स्थल पर आवासीय विकास के लिए तल-क्षेत्र अनुपात (फ्लोर एरिया रेशियो) 1.5 है और इसका आरक्षित मूल्य 71.5 करोड़ रुपये हैं।

उत्तर-पूर्व रेलवे में सब-वे का निरीक्षण

रामगढ़ ताल पर 900 वर्ग मीटर का दूसरा छोटा भाग रेलवे ट्रांज़िट सुइट्स के आवश्यक पुनर्विकास के लिए चिह्मित किया गया है। इनके अलावा बौलिया रेलवे कॉलोनी में टाइप-3 के 100 रेलवे क्वार्टर्स  भी बनाए जाने हैं जिनके लिए अलग से उत्तर-पूर्व रेलवे ने 13,516 वर्ग मीटर की भूमि रखी है।

आवश्यक रेलवे विकास की अनुमानित लागत 25.47 करोड़ रुपये हैं। बोली से पूर्व की ऑनलाइन बैठक 16 मार्च को आयोजित हुई थी जिसमें स्थल के लिए बोली लगाने वाले कम से कम 12 डवलपर/वास्तुकार उपस्थित थे। बोली लगाने की अंतिम तिथि 4 मई की है।

स्थल के पूर्व में विंध्यवासिनी पार्क, पश्चिम में न्यू गोरखपुर बस स्टेशन, दक्षिण में रामगढ़ ताल झील और उत्तर में रेलवे गोल्फ मैदान है। गोरखपुर विकास प्रधाकिरण के एक अधिकारी ने बताया कि तारामंडल, पर्यटक बंगला और चंपा विहार उद्यान भी स्थल के निकटवर्ती हैं।

चयनित लीज़धारक को निर्माण नियमों के आधार पर पुनर्विकास करना होगा। रेलवे पुनर्विकास का सारा खर्च भी वही उठाएगा। वर्तमान में भारतीय रेलवे के पास देश भर में लगभग 43,000 हेक्टेयर खाली भूमि पड़ी है।

आरएलडीए के पास 84 व्यावसायिक (ग्रीनफील्ड) स्थल हैं जिन्हें पारदर्शी बोली प्रक्रिया के तहत लीज़ पर दिया जाएगा। इसके अलावा आरएलडीए 84 रेलवे कॉलोनी पुनर्विकास परियोजनाओं का भी प्रबंधन कर रही है और हाल ही में गुवाहाटी की रेलवे कॉलोनी को पुनर्विकास के लिए लीज़ पर दिया है।

रेल मंत्रालय के अधीन आने वाला यह निकाय स्टेशन पुनर्विकास के क्षेत्र में भी काम कर रहा है। आरएलडीए वर्तमान में 62 रेलवे स्टेशन के विकास कार्य को देख रहा है जिसमें से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पुनर्विकास एक प्रमुख परियोजना है। इसके लाभ को पहले रिपोर्ट किया जा चुका है।