इन्फ्रास्ट्रक्चर
ऑक्सीजन परिवहन एवं कोविड-19 राहत के लिए क्या है भारतीय रेलवे की योजना

देश में फैलती कोविड-19 महामारी के कारण ऑक्सीजन की बढ़ती माँग के बीच भारतीय रेलवे ने तरल चिकित्सकीय ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति करने के लिए ट्रायल कर लिए हैं। साथ ही रेलवे ने संक्रमित रोगियों की सेवा तथा देख-रेख के लिए कई कोविड सुविधा केंद्रों पर आइसोलेशन डिब्बे भी उपलब्ध करवाए हैं।

उत्तरी रेलवे ने राजधानी में शकुरबस्ती और आनंद विहार टर्मिनल पर कुल 1,200 बेड के 75 आइसोलेशन कोच की व्यवस्था कोविड सेवा केंद्रों के रूप में की है। कोविड संक्रमण से निपटने में ऑक्सीजन की उपलब्धता एक बड़ी भूमिका निभाती है और इसलिए रेलवे ने ये ट्रायल किए हैं।

कई स्थानों पर किए गए ट्रायल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सभी मानकों का ध्यान रखते हुए रेलवे ऑक्सीजन का परिवहन कर पाए। हाल ही में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों ने रेल मंत्रालय से संभावनाओं को खोजने के लिए कहा था जिससे रेलवे ही तरल चिकित्सकीय ऑक्सीन (एलएमओ) के टैंकर का परिवहन कर सके।

पूरे देश में परिवहन करने वाले रेलवे ने शीघ्र ही रोल ऑन-रोल ऑफ़ सेवा के माध्यम से एलएमओ के परिवहन की तकनीकी व्यवहार्यता की जाँच की जिसमें समतल मालवाहकों पर सड़क टैंकर रखे जा सकें। कुछ स्थानों पर रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और ऊपरी उपकरणों (ओएचई) के कारण ऊँचाई की समाएँ थीं जिसके लिए रोड टैंकर की कई विशिष्टताओं पर विचार किया गया।

रेलवे का आइसोलेशन कोच

विचार के बाद पाया गया कि रोड टैंकर टी-1618 मॉडल जिसकी ऊँचाई 3.32 मीटर है, उसे 1.29 मीटर ऊँचे मालवाहक पर रखकर व्यवहार्य बनाया जा सकते है। रेलवे ने बताया कि समतल मालवाहक को 15 अप्रैल को मुंबई के कलंबोली माल शेड में रखा गया और एक एलएमओ से भरा टी-1618 टैंकर भी वहाँ लाया गया।

उद्योग से जुड़े लोगों और रेलवे ने साथ मिलकर माप लिया। उन मापों के आधार पर विभिन्न मार्गों पर जाने की अनुमति मिली और यह ज्ञात हुआ कि आरओ-आरओ माध्यम से ओडीसी के रूप में यह परिवहन किया जा सकता है। हालाँकि ऊँचाई का ध्यान रखते हुए कुछ खंडों में मालगाड़ी को धीमी गति पर चलाना होगा।

क्रायोजनिक टैंकरों में एलएमओ को भेजने के लिए आरओ-आरओ परिवहन के लिए व्यावसायिक बुकिंग तथा मालवहन भुगतान के लिए 16 अप्रैल को रेलवे ने वादा किया था कि वह इस विषय पर आवश्यक जानकारियाँ और दिशानिर्देश शीघ्र ही जारी करेगा।

निर्णय हुआ कि टैंकरों के आयोजन का दायित्व महाराष्ट्र के परिवहन आयुक्त का होगा। खाली टैंकरों को मुंबई में तथा मुंबई के आसपास से जमा करके कलंबोली या बोइसार रेलवे स्टेशन से एवं तरल चिकित्सकीय ऑक्सीजन लोड करने के लिए वायज़ग और जमशेदपुर या राउरकेला या बोकारो भेजा जाएगा।

क्षेत्रीय रेलवे को निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि वे खाली टैंकरों को लेने एवं उन्हें भरकर वापस भेजने की तैयारी सुनिश्चित करें। वायज़ग, अंगुल तथा भिलाई में रैंप बनाया जाना है एवं कलंबोली में स्थित रैंप को सुदृढ़ करना है। 18 अप्रैल को बोइसार (पश्चिमी रेलवे) पर एक ट्रायल आयोजित किया गया।

आसनसोल में ऑक्सीजन केंद्र

इसमें समतल मालवाहक पर एक भरा हुआ टैंकर रखा गया और सभी आवश्यक माप लिए गए। रेलवे ने पहले ही कलंबोली और अन्य स्थानों पर समतल मालवाहकों को जमा कर लिया था ताकि कई स्थानों तक टैंकर पहुँचाने की तैयारी पहले से रहे।

महाराष्ट्र सरकार से अनुमति मिलते ही रेलवे ने टैंकरों को हरी झंडी दिखा दी। 19 अप्रैल को 10 खाली टैंकर भेजे जाने की परिवहन योजना बनी। महाराष्ट्र के परिवहन से सचिव ने 19 अप्रैल को ही खाली टैंकर भेजना शुरू कर दिया। राज्य सरकारों की माँगों से क्षेत्रीय रेलवे को अवगत करा दिया गया है।

रेलवे बोर्ड ने संबंधित महाप्रबंधकों को निर्देश दिया है कि वे पूरी तैयारी के साथ रहें और केंद्र एवं राज्य सरकारों की एजेंसियों की सहायता के लिए तत्पर रहें। रेल द्वारा ऑक्सीजन के परिवहन हेतु इन तैयारियों के अलावा रेलवे बोर्ड में एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त भी किया गया है।

इसी बीच ऊत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगाल ने कहा कि उत्तरी रेलवे ने वैश्विक महामारी के विरुद्ध युद्ध में दिल्ली-एनसीआर के लोगों की ओर सहायता का हाथ बढ़ाया है और उन्हें अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवा एवं सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

जो लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हैं लेकिन उनमें सामान्य लक्षण हों तो उनके लिए 50 पूरी तरह से परिचालित कोविड सुविधा केंद्र खोले गए हैं जिनमें कुल 800 रोगियों को सेवा दी जा सकती है। ये कोच दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पड़ने वाले शकुरबस्ती रेलवे स्टेशन पर रखे गए हैं।

इसके अलावा, 19 अप्रैल को आनंद विहार स्टेशन पर 25 कोविड सुविधा कोच और तैयार कर दिए गए थे जिनकी क्षमता 400 रोगियों की है। गंगाल ने बताया कि और आवश्यकता पड़ने पर और आइसोलेशन कोच उपलब्ध करवाए जाएँगे। सभी स्टेशनों पर इन कोच की देख-रेख करने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर है और एंबुलेन्स से इनकी पहुँच भी आसान है।