इन्फ्रास्ट्रक्चर
उड्डयन क्षेत्र संतुलन बिगड़ने के बाद विराम चरण से गुज़र रहा है, कहाँ मिलेगा नया संतुलन

1970 के दशक में दो जीव-वैज्ञानिकों, एल्ड्रिज और गॉल्ड ने उस समय तक सिद्ध माने जाने वाले क्रमागत उन्नति के सिद्धांत को जाँचना शुरू किया। तब तक डार्विन के सिद्धांत पर सर्वसम्मति स्थापित हो चुकी थी जिसका मानना था कि प्रजातियाँ धीरे-धीरे परिवर्तित होती हैं और समय के साथ नई प्रजातियाँ रूप लेती हैं।

इस सिद्धांत की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जीवाष्म रिकॉर्ड इस बात की पुष्टि किसी प्रकार से नहीं करते थे। रिकॉर्ड दर्शाते थे कि कोई प्रजाति अचानक गायब हो जाती है और उसी प्रकार से भूगर्भिक रिकॉर्ड में अचानक ही कोई नई प्रजाति का प्रवेश हो जाता है।

काफी शोध और जाँच करने के बाद एल्ड्रिज और गॉल्ड विराम आधारित संतुलन के सिद्धांत पर पहुँचे। इसके अनुसार प्रजातियाँ तब तक संतुलन में रहती हैं, जब तक कोई घटना इस संतुलन को बिगाड़ती नहीं। फिर कुछ विराम के बाद नई प्रजातियाँ उत्पन्न हो जाती हैं और वे एक नया संतुलन बना लेती हैं।

जीव विज्ञान के इस सिद्धांत की समानांतर घटना का ही सामना कर रहा है वैश्विक उड्डयन क्षेत्र। 2019 के अंत तक उड्डयन संतुलन बढ़ती यात्रा माँग का था, बड़े विमानों का ऑर्डर हो रहा था, हवाई अड्डे अपनी क्षमता पार कर चुके थे, रनवे पर न्यूनतम समय तक विमान रहते थे, वित्त की कोई कमी नहीं थी र कम लागत वाली यात्राएँ बढ़ रही थीं।

किसी भी एयरलाइन अधिकारी से पूछते तो वह बताता कि 4.9 अरब हवाई यात्राएँ, 13,000 विमानों का ऑर्डर, रनवे पर 50 सेकंड का समय, आराम से अधिक यात्रियों की पसंद कम लागत और लाभ के साथ हवाई जहाज़ों का वित्तपोषण होता है।

उड़ान भरने के लिए कतार में लगे विमान

तेज़ी से होती आर्थिक वृद्धि, अनुभव अर्थव्यवस्था में उछाल, यात्रा प्रतिबंधों का ढीला होना और साझा अर्थव्यवस्था ऐसे आयाम थे जो हवाई यात्राओं को बस वृद्धि की ओर ले जाते। लेकिन 2020 के आरंभ में यह संतुलन बिगड़ गया। इस संतुलना को बिगाड़ने का ज़िम्मेदार था 120 नैनोमीटर आकार का जीवाणु जिसे नंगी आँखों से देखा भी नहीं जा सकता।

यह वायरस प्रोटीन की काँटेदार परत को ओढ़े हुए स्वस्थ कोशिकाओं पर चिपककर मानव शरीर में स्वयं को कई गुना बढ़ा लेने में सक्षम है। इसे कोविड-19 वायरस के नाम से जाना गया जिसकी संक्रामक दर अत्यधिक है। मानवों का परस्पर संपर्क इसके प्रसार का कारण बन गया।

कई लोगों की मृत्यु हुई और कोई उपचार दृष्टिकगोचर नहीं था, ऐसे में बचाव ही इससे निपटने का सबसे बड़ा हथियार बना। बचाव के रूप मेंसामाजिक दूरी को काफी प्रचारित किया गया लेकिन यात्रा के दौरान यह दूरी बनाए रख पाना कठिन था। बचाव प्रयासों के बीच भी विश्व भर में अगस्त 2020 तक 1.8 करोड़ मामले और 7 लाख मौतें हो चुकी थी।

2020 के अंत तक यह आँकड़ा 8.4 करोड़ मामलों और 15 लाख मौतों का हो गया था। देशों के पास यात्रा पर प्रतिबंध लगाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। कुछ देशों ने तो अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। विश्व भर की सरकारें जानती थी कि उड्डयन को इससे कितनी हानी होगी व आगे और क्या दुष्प्रभाव होंगे।

इसी कारण सरकारें उड्डयन को खैरात दे रही हैं। इसकी शुरुआत यूनाइटेड स्टेट्स ने एयरलाइन्स को 225 अरब डॉलर के ऋण व अनुदानदेकर की, फिर यूरोप ने लुफ्थान्सा जैसी स्थापित कंपनी की माँग के अनुसार उसे 10 अरब डॉलर से अधिक दिए और अन्य कंपनियों को भी।

एशियाई क्षेत्र में सिंगापुर एयरलाइन्स को 13 अरब डॉलर की इक्विटी राहत मिली है, कैथे पैसिफिक को 5 अरब डॉलर की सरकारी सहायता मिली, जापान की एनए होल्डिंग्स को लगभग 4 अरब डॉलर गारंटी और ऋण के रूप में मिले। वर्ष के अंत तक कुल 183 अरब डॉलर की सरकारी खैरात बाँटी जा चुकी थी लेकिन वह भी उद्योग को संतुलित नहीं कर सकी।

एक मात्र आशा की किरण रही कारगो माँग। कारगो के माध्यम से अधिक सामान भेजा गया और मूल्य भी बढ़ा। पहले कारगो यात्री विमान की पेटी में भेजे जाते थे लेकिन लोगों की उड़ान रुकने से और कारगो की माँग बढ़ने से यात्री सीटों पर भी कारगो रखकर ले जाए गए जिससे कुछ एयरलाइन्स को राहत मिली।

विमान में ले जाए जा रहे कारगो

अन्य वैश्विक संकेतों ने उड्डयन को लेकर इस बेरंग विचार की पुष्टि की। यूके में ब्रिटिश एयरलाइन पाइलट्स संघ ने पाइलट व्यवसाय की ओर न आने की चेतावनी जारी की। यूएस में जाने-माने निवेशक वॉरेन बफेट ने 4 अरब डॉलर से अधिक के अपने एयरलाइन शेयर बेच दिए।

लैटिन अमेरिका में सबसे बड़ी एयरलाइन दिवालिया हो गई और ऐसी कार्रवाइयाँ की जो वित्तपोषकों को दुविधा में डालकर पवित्र वित्तपोषण तंत्र पर संदेह खड़े करती हैं। ऐसा ही मलेशिया में एयरएशिया, यूरोप में एयर इटली, हॉन्ग कॉन्ग में कैथे पैसिफिक, यूएसए में कंपास एयरलाइन्स, ऑस्ट्रेलिया में वर्जिन और दक्षिण अफ्रीका में एसएए के साथ हुआ।

वर्ष के अंत तक कई एयरलाइन्स असहाय दिखीं या बंद हो गईं। 2021 में वैक्सीन वितरण और जिलीवरी के साथ उड्डयन एक नया संतुलन खोज रहा है। यात्रा माँग 70 प्रतिशत गिर गई है और यह प्रभाव स्थाई है। कुल मिलाकर एयरलाइन्स को 120 अरब डॉलर से अधिक का घाटा हुआ है जो वर्षों के लाभ को खा सकता है।

विश्व भर में हवाई अड्डों पर कम यात्री हैं और शांति का वातावरण है। विमान निर्माता विमान बेच पाने में स्वयं को अक्षम पा रहे हैं, साथ ही पहले कई विमानों का ऑर्डर दे चुके उनके ग्राहक भी व्यापार से बाहर हो रहे हैं। इंजन निर्माताओं की अपनी चुनौतियाँ हैं।

जाँचे और परीक्षित व्यापार मॉडल अब नहीं रहे। जो संतुलन भले ही विकृत था लेकिन कई वर्षों तक चला, वह अब नहीं रहा है। उड्डयन को कहाँ जाकर नया संतुलन मिलता है, वह देखने वाली बात है।

सत्येंद्र पांडे बाज़ार विशेषज्ञ तथा उड्डयन के क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति हैं और व्यावसायिक रूप से भी इस क्षेत्र के लिए काम कर चुके हैं।