इन्फ्रास्ट्रक्चर
अब प्रिंटर करेगा निर्माण कार्य- आई.आई.टी. मद्रास ने विकसित की भारत की पहली थ्री-डी प्रिंटिंग कंस्ट्रक्शन तकनीक

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के प्राध्यापकों व पूर्व छात्रों ने मिलकर भारत की पहली थ्री-डी प्रिंटिंग कंस्ट्रक्शन तकनीक का विकास किया है, द बिज़नेस लाइन  ने रिपोर्ट किया। उन्होंने थ्री-डी प्रिंटिंग से पहली बार बनी एक संरचान भी तैयार कर ली है।

थ्री-डी प्रिंटरों के माध्यम से ऐसी आकृतियाँ और संरचनाएँ बनाई जा सकती हैं जिन्हें परंपरागत तकनीकों से बनाना या तो असंभव था या बहुत मुश्किल। थ्री-डी प्रिंटिंग के आविष्कार से आंशिक रूप से खोखली संराचनाएँ बनाई जा सकती है जिससे निर्माण सामग्री की काफी बचत होगी।

आई.आई.टी. मद्रास प्रिंटेबिलिटी लैब जनपद अभियांत्रिकी विभाग के विस्तार के रूप में त्वास्ता मैनुफैक्चरिंग सॉल्युशन्स द्वारा बनाई गई है। यह लैब स्वदेश निर्मित तकनीकों को बाज़ार तक लेकर जाएगी।

त्वास्ता मैनुफैक्चरिंग सॉल्युशन्स का उद्देश्य है कि निर्माण क्षेत्र को पूर्णतः स्वचालित बनाया जा सके। यह निर्माण प्रक्रिया की पुनर्कल्पना को प्रोत्साहित करती है। यह एक ऐसी विशिष्ट पद्धति देने की योजना बना रही है जिससे 320 स्कॉयर फुट का एक मंज़िला घर मात्र तीन दिनों में तैयार हो सके।

आई.आई.टी. मद्रास ने एक ऐसी प्रतिकृति बनाई है जो अनुसंधान व विकास के लिए एक आधार मॉडल प्रस्तुत करता है। एक प्रेस विज्ञप्ति में संस्थान ने कहा कि यह देश में आवास और सफाई व्यवस्था को सस्ता बनाना चाहता है जिससे सभी को अच्छा घर और शौचालय मिल सके।

इस तकनीक से प्राकृतिक पदार्थों और जियोपॉलीमर के विकास की भी राह खुलेगी जिससे निर्माण प्रक्रिया सबको लाभ पहुँचा सके और पर्यावरण को भी हानि न पहुँचाए, विज्ञप्ति में कहा गया।

इस विकास के साथ ही आई.आई.टी. मद्रास के शोधकर्ताओं ने पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर भी हाल ही में बनाया था।