इन्फ्रास्ट्रक्चर
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ कैसे होगा पूरे क्षेत्र का विकास

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर में बन रहे एयरपोर्ट को नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम दिया गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बन रहे दूसरे हवाई अड्डे के नाम के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लोगो को भी स्वीकृति दे दी जिसमें राज्य पक्षी सारस को उड़ान भरते देखा जा सकता है।

नोएडा हवाई अड्डे की ओर से एक और सुखद समाचार यह है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रगति कार्य तय समय सीमा के अनुसार ही चल रहा है और दिसंबर 2023 या जनवरी 2024 तक वहाँ से विमान उड़ान भी भरने लगेंगे। इस विषय में जानकारी के लिए स्वराज्य ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के मार्केटिंग विभाग के अभिमन्यु से बात की।

वर्तमान में इस परियोजना के कारण जिन 3,000 परिवारों का विस्थापन हो रहा है, उन्हें पुनर्स्थापित करने और उनके पुनर्वास का काम चल रहा है। अपेक्षा है कि मई 2021 तक यह पूरा हो जाएगा। इसके अलावा नागरिक उड्डयन मंत्रालय को परियोजना का मास्टर प्लान भेजा गया है और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

जेवर हवाई अड्डे की परिकल्पना दो दशक पहले ही की गई थी जब राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे। हालाँकि पहले ऐसी सहमति थी कि कोई भी दो हवाई अड्डे 150 किलोमीटर से कम दूरी पर नहीं होंगे और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआईए) से निकट होने के कारण इसका कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। फिर योगी आदित्यनाथ सरकार को 2017 में इसकी स्वीकृति मिल गई।

टर्मिनल डिज़ाइन

ध्यान देने वाली बात यह है कि पहले दिल्ली से निकटता के कारण इसे अनुमति नहीं मिल रही थी, आज वही कारण इसकी महत्ता बताता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार आईजीआईए के 57 प्रतिशत यात्री एनसीआर और 11-12 प्रतिशत उत्तर प्रदेश के जिलों से होते हैं। साथ ही यह हवाई अड्डा 2023-24 तक अपनी पूरी क्षमता तक पहुँच जाएगा, ऐसे में एक विकल्प आवश्यक था।

चार चरणों में तैयार किया जाने वाला नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा शुरुआत में प्रति वर्ष 1.2 करोड़ यात्री क्षमता का होगा जिसे 2050 तक बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों के लिए उपयुक्त बनाने की योजना है। पहले चरण में दो रनवे बनाए जाएँगे और पूरी तरह से तैयार होने पर इस हवाई अड्डे में पाँच रनवे होंगे। इसकी अनुमानित लागत 30,000 करोड़ रुपये है।

एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डे के निर्माण के लिए स्विस कंपनी ज़्यूरिक एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी ने पिछले वर्ष नवंबर में ही अनुबंध जीत लिया था और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के साथ रियायत समझौते पर 7 अक्टूबर को हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद दो महीने के भीतर मास्टर प्लान देना था जिसे 4 दिसंबर को सौंप दिया गया था।

समझौता हस्ताक्षर

पूरे हवाई अड्डे के लिए 5,000 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है लेकिन पहले चरण के अनुसार 1,334 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। यमुना एक्सप्रेसवे से नोएडा हवाई अड्डे मात्र 700 मीटर की दूरी पर होगा। एक 100 मीटर चौड़ी सर्विस लेन यमुना एक्सप्रेसवे के समानांतर पर चलकर आपको हवाई अड्डे के द्वार तक पहुँचाएगी।

इसके अलावा दिल्ली मेट्रो रेल कोर्पोरेशन (डीएमआरसी) भी नोइडा हवाई अड्डे को जोड़ने वाली मेट्रो लाइन परियोजना पर काम कर रहा है। 5,708 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस मेट्रो लाइन पर 25 स्टेशन होंगे। 35.64 किलोमीटर लंबी इस लाइन के 17 स्टेशन यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में और आठ ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में आएँगे।

पहले चरण में सबसे अधिक खर्च यात्री टर्मिनल भवन पर 1,080 करोड़ रुपये होगा और इसके बाद रनवे, टैक्सीवे, एप्रन आदि पर 600 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रथम चरण में 20 एमवीए बिजली आवश्यकता का आँकलन किया गया है। इसके अलावा 60 प्रतिशत लोड के लिए आपातकालीन बिजली हेतु जेनरेटर की व्यवस्था रहेगी। 9.5 हेक्टेयर क्षेत्र में सौर्य पैनलों के साथ भवनों की छतों पर भी सौर्य पैनल लगाए जाएँगे। एलईडी प्रकाश के उपयोग से इसे ऊर्जा कुशल बनाया जाएगा।

नोएडा हवाई अड्डे का नियोजित मार्ग

पीपीपी मॉडल के तहत बनने वाले नोएडा हवाई अड्डे का गैर-उड्डयन राजस्व भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के औसत की तुलना में अधिक होगा। प्रति यात्री 145 रुपये के गैर-उड्डयन राजस्व के साथ इसकी शुरुआत होकर, यह राशि 200 रुपये प्रति यात्री के पार जाएगी। पीपीपी मॉडल का होने के कारण इसकी क्रियान्वयन लागत भी कम होगी।

वित्तीय दृष्टि से यह परियोजना लाभकारी है। लागत से 3.25 गुना लाभ मिलेगा और वित्तीय रूप में यह लाभ लागत का 1.6 गुना होगा। साथ ही यह रोजगार को भी बढ़ावा देगा। ग्रीन-सी-इंडिया द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार हर 10 प्रत्यक्ष नौकरियों के कारण 61 अप्रत्यक्ष रोजगार इसके कारण उत्पन्न होंगे।

इस क्षेत्र के आसपास योगी सरकार ने 700 प्लॉट औद्योगिक इकाइयों को आवंटित कर दिए हैं। अपेक्षा है कि 1,050 एकड़ की भूमि पर 2,8000-30,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा जिससे 7 लाख तक रोजगार के अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। हवाई अड्डे के साथ-साथ इस क्षेत्र में रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्र के विकास की संभावनाएँ प्रबल हैं जो क्षेत्र का कायापलट कर देंगी।