इन्फ्रास्ट्रक्चर
नई दिल्ली स्टेशन पुनर्विकास व निज़ामाबाद भूमि के व्यावसायिक उपयोग की प्रगति रिपोर्ट

रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) ने तेलंगाना के निज़ामाबाद में 2,200 वर्गमीटर की रेलवे भूमि के व्यावसायिक विकास के लिए बोलियाँ आमंत्रित की हैं। वहीं, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के लिए नौ प्रमुख कंपनियों को वित्तीय बोली लगाने के लिए योग्य पाया गया है।

अडानी रेलवे परिवहन लिमिटेड, जीएमआर समूह, अरेबियन कन्स्ट्रक्शन कंपनी, एंकरेज इंफ्रास्ट्रक्चर, ओमैक्स और कल्पतरु पावर ट्रान्समिशन लिमिटेड कुछ कंपनियाँ हैं जिन्हें 6,500 करोड़ रुपये की परियोजना की आरएफक्यू के लिए चुना गया है।

बीआईएफ आईवी इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग लिमिटेड, आईएसक्यू एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेन्ट्स लिमिटेड और एल्पिस वेन्चर्स लिमिटेड बोली लगाने के लिए चयनित होने वाली शेष तीन कंपनियाँ हैं। लगभग 20 कंपनियों ने बोली-पूर्व बैठक में प्रतिभाग किया था।

इनमें से नौ ने रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन भेजा जिनमें से चार विदेशी कंपनियाँ भी हैं। आरएलडीए के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तकनीकी मूल्यांकन के बाद नौ कंपनियों को छाँटा गया है। अगले चरण में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल (आरएफपी) जारी किया जाएगा।

वहीं, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद संभाग में स्थित भूमि का आरक्षित मूल्य 3.94 करोड़ रुपये है। इसके आसपास व्यावसायिक और अर्ध-व्यावसायिक विकास है। तेलंगाना में तेज़ी से बढ़ने वाले शहरी क्षेत्रों में से एक है निज़ामाबाद। भूमि के पास सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय भी स्थित है।

“खानापुर औद्योगिक एस्टेट जैसे महत्त्वपूर्ण स्थानों से यह भूमि अच्छी सड़कों द्वारा जुड़ी है। रिटेल स्पेस या हाइपरमार्केट या बजट होटल जैसा व्यावसायिक विकास इस भूमि पर नियोजित है जो अपनी तरह का पहला होगा। यह क्षेत्र में अचल संपत्ति, पर्यटन और निवेश के लिए सहायक होगा।”, दुदेजा ने बताया।

वेद प्रकाश दुदेजा

आरएलडीए के उपाध्यक्ष वेद प्रकाश दुदेजा ने आगे कहा कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र पर जैसे ध्यान दे रही है, उस बीच इस स्थान पर एक मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल भी बनाया जा सकता है। यहाँ से रेलवे स्टेशन और मुख्य बस स्टैंड पास है जो व्यावसायिक उपयोग के लिए अचल संपत्ति खिलाड़ियों को आकर्षित करेगा।

बोली-पूर्व बैठक 3 जून को होनी है और बोली लगाने की अंतिम तिथि 26 जुलाई 2021 को तय की गई है। चयनित बोली लगाने वाले को स्थानीय भवन नियमों के आधार पर विकास करना होगा और संबंधित प्राधिकारियों से सभी अनुमतियों को लेने का खर्च भी उसे ही उठाना होगा।

रियायतकर्ता को अनुमति होगी कि वह किसी भी वैधानिक गतिविधि के लिए बने हुए क्षेत्र का बाज़ारीकरण कर सके या सब-लीज़ पर दे सके। हैदराबाद से 171 किलोमीटर उत्तर में स्थित निज़ामाबाद कई उद्योगों का केंद्र है। प्रस्तावित आईटी टावर और इनक्यूबेशन केंद्र से स्थानीय अर्थव्यवस्था को और बल मिलेगा।

ऐसा ही नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पुनर्विकास परियोजना के साथ भी है। कनॉट प्लेस के निकट 30 एकड़ भूमि में आरएलडीए ने रिटेल, ऑफिस और हॉस्पिटैलिटी जैसे विकास की योजना बनाई है जिससे स्टेशन पुनर्विकास को बल मिले। इससे क्षेत्र में आर्थिक विकास को बल मिलेगा।

कोविड-19 वैश्विक महामारी के बावजूद आरएलडीए ने बोली-पूर्व बैठकें की हैं, वर्चुअल रोडशो आयोजित किए ताकि हितधारकों को परियोजना विकास से परिचित कराया जा सके और साथ ही उनकी प्रतिक्रिया भी जानी जा सके। अपेक्षा है कि परियोजना पर्यटन को भी बल देगी।

रियायतकर्ताओं को कई प्रकार से राजस्व आय हो सकती है- यात्री सेवा शुल्क, टिकट बिक्री और स्टेशन परिसर में रिटेल क्षेत्र, लॉन्ज व पार्किंग जैसी यात्री सुविधाओं तथा प्रचार से राजस्व। इसके अलावा विकास और अचल संपत्ति की व्यावसायिक लीज़िंग से भी राजस्व कमाया जा सकता है।

नए स्टेशन का ऊपर से दृश्य

विकासकर्ता को प्राधिकरण को वार्षिक रियायत शुल्क (एसीएफ) देना होगा जिसपर तय अपफ्रंट प्रीमियम भी रहेगा। नई दिल्ली स्टेशन पर प्रतिदिन 400 ट्रेनें आती हैं और 4.5 लाख लोगों का आवागमन होता है। यह दिल्ली-एनसीआर में पहला ट्रांज़िट-ओरिएंटेड विकास होगा।

60 वर्षों की रियायत अवधि के साथ परियोजना को डिज़ाइन-निर्माण-वित्तपोषण-संचालन-हस्तांतरण मॉडल पर विकसित किया जाएगा। वैश्विक मानकों के अनुसार स्टेशन को विश्व-स्तरीय बनाया जाएगा जहाँ गुंबद आकार के टर्मिनल भवन होंगे- एक आगमन और एक प्रस्थान के लिए।

प्रस्तावित विकास में मल्टी-मोडल परिवहन केंद्र तथा होटल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पार्किंग लॉट के लिए 40-मंज़िला दो इमारतें होंगी। इस परियोजना में पैदल यात्रियों, साइकल ट्रैक, ग्रीन ट्रैक और गैर-मोटर वाहनों के लिए भी विशेष सुविधाएँ होंगी।

एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन मेट्रो के द्वारा इसे इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जोड़ा जाएगा और दिल्ली मेट्रो की पीली लाइन के माध्यम से यह स्टेशन दिल्ली-एनसीआर से जुड़ेगा। स्टेशन के दोनों तरफ डीटीसी बस स्टॉप हैं। चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पुनर्विकास किया जाएगा।

आरएलडीए के पास 84 व्यावसायिक (ग्रीनफील्ड) स्थल हैं जिन्हें पारदर्शी बोली प्रक्रिया के तहत लीज़ पर दिया जाएगा। इसके अलावा आरएलडीए 84 रेलवे कॉलोनी पुनर्विकास परियोजनाओं का भी प्रबंधन कर रही है और हाल ही में गुवाहाटी की रेलवे कॉलोनी को पुनर्विकास के लिए लीज़ पर दिया है।

रेल मंत्रालय के अधीन आने वाला यह निकाय चरणबद्ध तरीके से 60 रेलवे स्टेशन के विकास कार्य को देख रहा है। इसके एक उपक्रम आईआरएसडीसी के पास 63 स्टेशनों का काम है। पहले चरण में नई दिल्ली, तिरुपति, देहरादून, नेल्लोर, कटक और पुडुचेरी स्टेशन पुनर्विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

अरुण कुमार दास रेलवे के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनसे akdas2005@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।