इन्फ्रास्ट्रक्चर / भारती
पुनर्विकास परियोजनाओं से रेलवे की खाली पड़ी भूमि कैसे बनेगी राजस्व का स्रोत

कोविड वैश्विक महामारी के बीच नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पुनर्विकास परियोजना को सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ मिल रही हैं। जीएमआर, अरेबियन कंस्ट्रक्शन और अडानी जैसी नौ बड़ी कंपनियाँ 6,500 करोड़ रुपये वाली इस परियोजना के विकास में इच्छुक दिखाई दी हैं।

रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) ने रोड शो समेत कई प्रयास किए ताकि प्रसिद्ध कंपनियों को आकर्षित किया जा सके जिसके फल स्वरूप इस महत्त्वाकांक्षी अचल संपत्ति (रियल एस्टेट) परियोजना में कई नामी वैश्विक और घरेलू कंपनियों ने रुचि दिखाई है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पुनर्विकास के लिए आरएलडीए ने आरएफक्यू बोलियाँ खोली थीं जिसमें अरेबियन कंस्ट्रक्शन कंपनी, अडानी रेलवेज़ ट्रांसपोर्ट लिमिटेड, बीआईएफ आईवी इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग (डीआईएफसी) प्राइवेट लिमिटेड, आईएसक्यू एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेन्ट्स प्राइवेट लिमिटे, ऐंकरेज इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टेमेन्ट्स होल्डिंग्स लिमिटेड, कल्पतरु पावर ट्रान्समिशन लिमिटेड, जीएमआर हाईवेज़ लिमिटेड, ओमैक्स लिमिटेड और एल्पि वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी नौ वैश्विक और राष्ट्रीय प्रमुख कंपनियों ने प्रतिभाग किया है।

“नौ बड़ी कंपनियों ने आरएफक्यू में प्रतिभाग किया है, मुझे प्रसन्नता है कि हमारे प्रयास रंग लाए हैं। अब इन कंपनियों का तकनीकी आकलन किया जाएगा।”, आरएलडीए के उपाध्याक्ष वेद प्रकार दुदेजा ने स्वराज्य को बताया। बोली लगाने से पूर्व की बैठक में लगभग 20 कंपनियों ने प्रतिभाग किया था जिनमें से नौ कंपनियों ने रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (आरएफक्यू) भेजा है।

कनॉट प्लेस के निकट स्थिति 30 एकड़ भूमि में आरएलडीए की योजना दुकानों, कार्यालयों और होटलों जैसी सुविधाओं का विकास करने की है ताकि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास में भारतीय रेलवे की सहायता हो सके। आरएफक्यू के बाद तकनीकी प्रक्रिया में योग्य सिद्ध हो जाने वाली कंपनियों के लिए अगले चरण में आरएलडीए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल (आरएफपी) जारी करेगा।

नए स्टेशन का आंतरिक दृश्य

ध्यान देने योग्य बात यह है कि कई विकास से संबंधित हितधारकों से बोली से पूर्व बैठकों के माध्यम से वार्ता की गई और वर्चुअल रोड शो आयोजित करके परियोजना पर प्रतिक्रियाएँ माँगी गईं जिसके फल स्वरूप यह सकारात्मक प्रगति देखने को मिल रही है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास आरएलडीए के लिए अग्रिम परियोजना है और दिल्ली-एनसीआर में ट्रान्ज़िट-ओरिएंटेड डवलपमेंट (परिवहन-उन्मुख विकास) की अवधारणा पर आधारित यह पहली परियोजना है। इसपर 68 करोड़ डॉलर का पूँजी निवेश होगा और डीबीएफओटी मॉडल के आधार पर बनाया जाएगा।

इस परियोजना में विकासकर्ता के पास राजस्व आय के कई स्रोत होंगे जैसे अचल संपत्ति अधिकारों से मिलने वाला राजस्व आदि। लगभग चार वर्षों में इसे पूरा किया जाना है और 60 वर्षों की रियायत अवधि रहेगी। दुदेजा का मानना है कि यह अग्रिम परियोजना एनसीआर के आर्थिक विकास को बल देगी।

“इस परियोजना ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों का ध्यान आकर्षित किया है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर उत्पन्न करने और दिल्ली-एलसीआर की पर्यटन संभावनाओं को खोलने में यह परियोजना अभूतपूर्व भूमिका निभाएगी और महत्त्वाकांक्षी भारत के लिए समावेशी विकास लेकर आएगी।”, दुदेजा ने कहा।

रणनीतिक रूप से देखा जाए तो यह स्टेशन दिल्ली के केंद्र में स्थित है और दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक स्थल कनॉट प्लेस के निकट स्थित है। वैश्विक मानकों के अनुसार इसका पुनर्विकास विश्व-स्तरीय स्टेशन के रूप में किया जाएगा। इसमें गुंबद आकार की संरचनाएँ होंगी- दो आगमन और दो प्रस्थान के लिए, दोनों तरफ एक-एक मल्टी-मोडल परिवहन केंद्र होगा, 40 मंजिला ऊँचे टावर में होटल, कार्यालय व दुकानें होंगी और हई-स्ट्रीट खरीददारी के लिए पैदल गलियारा होगा।

नए स्टेशन का ऊपर से दृश्य

पैदल यात्रियों की सुविधा, साइकल ट्रैक, ग्रीन ट्रैक और गैर-मोटरी वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई विशेषताएँ प्रस्तावित विकास योजना में जोड़ी गई हैं। यह स्टेशन सुनिश्चित करेगा की विभिन्न यातायात साधनों को एकीकृत करके विकास हो।

एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन मेट्रो से यह इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जुड़ेगा तो, वहीं दिल्ली मेट्रो की पीली लाइन इसे दिल्ली-एनसीआर से जोड़ेगी। स्टेशन के दोनों ओर डीटीसी के बस स्टॉप होंगे। स्टेशन के मास्टर प्लान में 120 हेक्टेयर का क्षेत्रफल दिखाया गया है जिसमें से 88 हेक्टेयर क्षेत्रफल को पहले चरण में विकसित किया जाएगा।

इस मास्टर प्लान को आरएलडीए की स्वीकृति प्राप्त है। शीघ्र अनुमति प्राप्ति के लिए दिल्ली के उप-राज्यपाल की अध्यक्षता में एक शीर्ष समिति गठित की गई है। वर्तमान में आरएलडीए चरणबद्ध तरीके से 62 स्टेशनों पर काम कर रही है, वहीं इसकी एक इकाई आईआरएसडीसी के पास 61 स्टेशनों का काम है।

पहले चरण में आरएलडीए ने दिल्ली, तिरुपति, देहरादून, नेल्लोर और पुडुच्चेरी जैसे प्रमुख स्टेशनों के पुनर्विकास को प्राथमिकता पर रखा है। देश भर के रेलवे स्टेशनों को भारत सरकार द्वारा शुरू की गई स्मार्ट सीट परियोजनाओं के अंतर्गत पीपीपी मॉडल के आधार पर पुनर्विकसित किया जाएगा।

स्टेशन विकास कार्यक्रम पर रेल मंत्र पीयूष गोयल नज़र बनाए हुए हैं। खाली पड़ी रेलवे की भूमि के विकास के लिए आरएलडीए रेल मंत्रालय के अधीन आने वाला एक वैधानिक प्राधिकरण है। विकास के लिए यह चार प्रमुख बातों पर ध्यान देता है- 1) व्यावसायिक स्थलों को लीज़ पर देना, 2) कॉलोनी पुनर्विकास, 3) स्टेशन पुनर्विकास और 4) व्यावसायिक विकास।

लीज़ पर देने के लिए आरएलडीए के पास देश भर में 84 व्यावसायिक (ग्रीनफील्ड) स्थल हैं और एक खुली व पारदर्शी बोली के माध्यम से योग्य विकासकर्ताओं को चुना जाएगा। इसके अलावा आरएलडीए के पास 84 रेलवे कॉलोनी पुनर्विकास परियाजनाएँ भी हैं जिसमें हाल ही में पुनर्विकास के लिए गुवाहाटी की रेलवे कॉलोनी को लीज़ पर दिया गया है।