इन्फ्रास्ट्रक्चर
टीका खुराकों के उत्पादन और मई के टीकाकरण आँकड़ो में अंतर का रहस्य क्या है?

16 जनवरी से 31 मार्च तक भारत ने कोविड-19 टीके की 6.5 करोड़ खुराकें लगाईं। 30 अप्रैल तक यह आँकड़ा 15.5 करोड़ का हो गया यानी एक माह में रिकॉर्ड 9 करोड़ की उछाल। ऐसा होने का आंशिक कारण यह भी था कि टीका अर्हता को 45 वर्षों से अधिक आयु वाले लोगों के लिए खोल दिया गया था जिससे माँग बढ़ी।

1 मई से केंद्र ने 18-44 आयुवर्ग के लोगों के टीकाकरण की अनुमति भी राज्यों को दे दी। माँग की तो अब कोई समस्या रही ही नहीं। उल्टा यह हुआ कि घरेलू टीका उत्पादन सीमित था (सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का 6.5 करोड़ और भारत बायोटेक का 2 करोड़ खुराकें) और माँग अत्यधिक हो गई।

फिर भी, जब अप्रैल में एक माह में टीका की 9 करोड़ खुराकें दी गईं तो हम अपेक्षा कर सकते हैं कि मई में भी कम से कम प्रतिदिन 30 लाख खुराकों की दर जारी रहेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 24 मई तक 19.84 करोड़ टीका खुराकें दी गई हैं।

30 अप्रैल के आँकड़े से 4.34 करोड़ खुराकों की वृद्धि है 24 दिनों में जिसका औसत 18 लाख खुराक होता है प्रतिदिन। यह हमारी प्रतिदिन 30 लाख की खुराकों की अपेक्षा से काफी कम है। यदि हम इसी दर को महीने के बचे एक सप्ताह पर लागू करें तो 1.26 करोड़ और खुराकें मई माह में दी जाएँगी।

इसका अर्थ हुआ कि इस माह में मात्र 5.6 करोड़ खुराकें दी जाएँगी जबकि अप्रैल में यह आँकड़ा 9 करोड़ का था। कैसे हम 3.4 करोड़ खुराकों से पीछे हो गए? यदि हम यह मानकर भी चलें कि मासिक उत्पादन क्षमता 8.5 करोड़ खुराकों की है और सरकार ने पहले के भंडारण का उपयोग अप्रैल में कर लिया तो भी 3 करोड़ खुराकें कहाँ गईं?

घरेलू उत्पादन क्षमता में से आधी खरीद केंद्र सरकार को करनी थी और बची हुई आधी राज्य सरकारों को। 25 मई तक स्वास्थ्य मंत्रालय के डाटा के अनुसार राज्यों के पास 1.77 करोड़ अतिरिक्त टीका खुराकें बची हुई हैं और 7 लाख खुराकें अभी पाइपलाइन में हैं जिन्हें अगले तीन दिनों में पहुँचा दिया जाएगा।

इसका अर्थ हुआ कि राज्य सरकारों के पास 1.84 करोड़ अतिरिक्त टीका खुराकें हैं जिनकी सहायता से बचे हुए माह में 26 लाख खुराक प्रतिदिन की दर से टीकाकरण किया जा सकता है। स्पष्ट रूप से जितनी खुराकों की आपूर्ति की गई और जितनी खुराकें लोगों को दी गई इसमें काफी अंतर है।

ऐसा इसलिए हो सकता है कि 45 से अधिक आयुवर्ग में माँग और आपूर्ति में अंतर है। राज्यों को कहा गया है कि केंद्र द्वारा दी गई खुराकों का उपयोग केवल 45 से अधिक आयु के लोगों को टीका लगाने में ही किया जाए। लेकिन इस जनसांख्यिकी के लिए अभी तक माँग गिर चुकी होगी।

वहीं, दूसरी ओर 18-44 आयुवर्ग में भारी माँग है लेकिन उनके लिए आपूर्ति की कमी है। लेकिन फिर भी इससे पूरा परिदृश्य समझ नहीं आता है कि आपूर्ति शृंखला की बची हुई टीका खुराकें कहाँ गईं। तो 4.34 करोड़ खुराकें दी गईं व 1.84 करोड़ खुराकें राज्यों के पास हैं जिनका योग 6.2 करोड़ होता है।

इसका अर्थ हुआ कि अभी भी घरेलू उत्पादन क्षमता के अनुसार 2.3 करोड़ खुराकें कम हैं। यह मानकर चल रहे हैं कि केंद्र और राज्यों में कुल खुराकें आधी-आधी बटती हैं तो इस माह केंद्र को 4.25 करोड़ खुराकें राज्यों को पहुँचानी थी।

विमान से टीका आपूर्ति

30 अप्रैल तक केंद्र ने राज्यों को 16.4 करोड़ खुराकें पहुँचाई थीं और इस माह के अंत तक यह आँकड़ा 22.3 करोड़ हो जाने की अपेक्षा है जिसका अर्थ हुआ कि मई में केंद्र ने राज्यों को 4.25 करोड़ नहीं, बल्कि 5.9 करोड़ खुराकें दीं।

यह तब तक संभव नहीं हो सकता जब तक या तो टीका उत्पादन क्षमता 12 करोड़ पहुँच गई हो या केंद्र को 50 प्रतिशत आरक्षित खुराकों से अधिक टीके मिल रहे हों। एक कारण यह हो सकता है कि केंद्र ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया व भारत बायोटेक को जुलाई तक आपूर्ति का थोक ऑर्डर देकर अग्रिम भुगतान कर दिया हो।

ऐसे में राज्यों या निजी क्षेत्र से पर्याप्त ऑर्डर न मिलने पर ये कंपनियाँ अधिकांश खुराकें केंद्र सरकार को ही दे रही होंगी। दूसरा कारण हो सकता है कि केंद्र ने इस माह की 4.25 करोड़ खुराकें और पहले की बची खुराकों में से 1.65 करोड़ खुराकों की आपूर्ति की हो।

एक और कारण हो सकता है कि निजी क्षेत्र ने कई लाख खुराकें खरीद ली होंगी लेकिन उनकी गिनती आधिकारिक आँकड़ों में नहीं की जा रही है। या इन सभी कारणों के मिले-जुले प्रभाव से भी वर्तमान परिस्थिति उत्पन्न होने की संभावना है।

अवश्य ही, हम इतनी संभावनाओं पर इसलिए विचार कर रहे हैं क्योंकि केंद्र, राज्यों और स्वयं टीका विनिर्माताओं की ओर से दिए गए डाटा की कमी है। उत्पादन और आपूर्ति में अंतर के कारण कई हो सकते हैं लेकिन एक बात स्पष्ट है कि आँकड़ों में खुराकों की कमी है। सरकारों और टीका विनिर्माताओं को शीघ्र ही इसपर स्पष्टीकरण जारी करना होगा।