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मुंबई-पुणे वर्जिन हाइपरलूप परियोजना में प्रशासनिक दिक्कतों के कारण हो रही देरी

मुंबई-पुणे वर्जिन हाइपरलूप परियोजना इन दिनों प्रशासनिक ढाँचे की कमी के चलते निर्माण एवं सुरक्षा मानकों के चलते काफी दिक्कतों का सामना कर रहा है। इन दिक्कतों के चलते इस उभरती हुई नई यातायात व्यवस्था को शुरू करने में देरी हो सकती है।

लाइवमिंट  की रिपोर्ट के अनुसार मुंबई-पुणे परियोजना बेहद महत्वकांशी परियोजना है। ये दुनिया की पहली सुचारू हाइपरलूप परियोजना होगी क्योंकि इसके जैसी अन्य परियोजनाएँ अलग-अलग शहरों में अभी शुरुआती दौर में हैं।

यह एक आधुनिक यातायात प्रणाली जो कि रेल और हवाई जहाज का मिला-जुला स्वरूप है। इस वजह से इसके नियंत्रण में कुछ प्रशासनिक समस्याएँ आ रही हैं।

यात्री वैसे तो रेल जैसी ही व्यवस्था में सफर करेंगे किंतु इसको चलाने के लिए तेज़ गति का शून्य जैसा माहौल तैयार करना होगा जिसकी वजह से यह अंतरिक्ष यातायात के आधीन भी आ जाता है। इसकी रफ्तार 1,100 किलोमीटर प्रतिघंटा है।

वर्जिन हाइपरलूप भारत के कार्य निर्देशक नौशाद उमर ने कहा कि प्रधान वैज्ञानिक सलहाकार के स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया है और इसमें यह तय कर रहे हैं कि इसे अंतर-कार्यात्मक समूह की ज़रूरत होगी या यह परियोजना किसी एक मंत्रालय के अधीन रहेगी। हमारा मानना है कि वह मंत्रालय जिसके पास उपयुक्त कौशल एवं पृष्ठभूमि है उसी मंत्रालय को इसकी ज़िम्मेदारी दी जानी चाहिए।

वर्जिन हाइपरलूप सामान एवं यात्रियों को पहुंचाने में सहायक होगा। इसी साल जुलाई में महाराष्ट्र सरकार ने इसको मंज़ूरी दी थी। ऐसा माना जा रहा है कि इसके आने से दोनों शहरों के बीच की दूरी घटकर सिर्फ 23 मिनट रह जाएगी।

साल 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की थी और अरबपति रिचर्ड बरनसन की कंपनी वर्जिन ही इसकी सबसे प्रबल दावेदार बनी थी। आपको बता दें कंपनी ने करीब 70,000 करोड़ का निवेश किया है। इस परियोजना की देखभाल का ज़िम्मा पीएमआरए के पास है।