इन्फ्रास्ट्रक्चर
डीएफसी पर दौड़े सैन्य टैंक और उपकरण, सेना के आवागमन को मिल सकता है सहयोग

राष्ट्रीय संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए सैन्य वाहनों और उपकरणों से लदी हुई रेलगाड़ी का सफल ट्रायल पश्चिमी समर्पित मालवाहक गलियारे (डीएफसी) के 430 किलोमीटर (किमी) लंबे नयू रेवाड़ी (हरियाणा) से न्यू फुलेरा (राजस्थान) के बीच के खंड पर किया गया।

अपेक्षा है कि यह प्रयास सैन्य बलों की आवागमन क्षमताओं को बल देगा। कई मंत्रालयों एवं विभागों के बीच ताल-मेल स्थापित करने के लिए ‘राष्ट्र के दृष्टिकोण से’ पहल के तहत यह अभ्यास किया गया था। यह ट्रायल भारतीय सेना और डीएफसी दल के बीच समन्वय के कारण हो सका।

इस ट्रायल ने आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से डीएफसी की महत्ता को वैधता प्रदान की। डीएफसी, भारतीय सेना और भारतीय रेलवे के बीच परस्पर संवाद के माध्यम से सैन्य बलों के आवागमन को गति देने के लिए डीएफसी का लाभ उठाया जा सकेगा जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को बल देगा।

समर्पित मालवाहक गलियारा निगम (डीएफसीसी) के अनुसार आवागमन में सहयोग देने और रक्षा-संबंधी रेल के इंजन व डब्बों के आवागमन को वैधता प्रदान करने के लिए रोल ऑन-रोल ऑफ (आरओ-आरओ) सेवा का औपचारीकरण किया जा रहा है और तौर-तरीके विकसित हो रहे हैं।

साथ ही कुछ स्थानों पर इसके अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर विकास भी हो रहा है। सैन्य बलों की संचालन तत्परता में वृद्धि करने की दिशा में यह ट्रायल एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इस प्रयास के साथ वे सभी प्रक्रियाएँ शुरू हो जाएँगी जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के योजना स्तर पर ही सैन्य आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जाए।

इस परियोजना को क्रियान्वित करने वाले लोगों का ध्यान रखते हुए डीएफसीसी ने एक ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर बैंक भी विकसित किया है जिसका उपयोग इसके कर्मचारी, हितधारकों के कर्मचारी, तकनीकी परामर्शदाता और पुनर्निर्माण कर्मचारी कर सकें।

“डीएफसी की मार्गरेखा पर पड़ने वाले अन्य स्थानों जैसे मुगलसराय, फुलेरा आदि पर ऑक्सीजन मशीनें प्रदान की जा रही हैं।”, एक वरिष्ठ डीएफसीसी अधिकारी ने बताया। डीएफसी पर प्रगति कार्य भी सभी सावधानियों और कोविड-अनुकूल व्यवहार के साथ किया जा रहा है।

सभी कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उन्हें बायो-बबल (जैविक सुरक्षा घेरे) में रखा जा रहा है। भारतीय रेलवे देश की जीवन-रेखा है। भारत को 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था को बनाने के लिए आवश्यक है कि परिवहन नेटवर्क को भी उसी गति से विकसित किया जाए।

परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास उद्योगों, व्यापार, निर्यात और आयात जैसी व्यावसायिक गतिविधियों को बड़ा प्रोत्साहन देगा। डीएफसीसी की स्थापना एक विशेष उपयोगिता वाहन के रूप में हुई है जो डीएफसी के नियोजन, विकास, वित्तपोषण, निर्माण, रख-रखाव और संचालन का ध्यान रखे।

पहले चरण में 1,506 किमी लंबा पश्चिमी डीएफसी और 1,875 किमी लंबा पूर्वी डीएफसी बनाया जा रहा है जिसमें सोननगर और दानकुनी के बीच का पीपीपी खंड भी सम्मिलित है। ईडीएफसी पंजाब के लुधियाना के निकट साहनेवाल से शुरू होकर पश्चिम बंगाल में दानकुनी तक जाता है।

मार्ग में यह हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से गुज़रता है। वहीं, डब्ल्यूडीएफसी उत्तर प्रदेश के दादरी से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से गुज़रकर मुंबई में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) तक पहुँचता है।

7 जनवरी 2021 को डब्ल्यूडीएफसी के 306 किमी लंबे रेवाड़ी-मदार खंड को राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया था। न्यू पालनपुर से न्यू किशनगढ़ के बीच 369 किमी लंबे डब्ल्यूीएफसी खंड पर ट्रायल किया जा चुका है।

नवंबर 2020 में रेवाड़ी में कार्य प्रगति

ईडीएफसी के न्यू भाऊपुर- न्यू खुर्जा खंड एवं प्रयागराज स्थित संचालन नियंत्रण केंद्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 दिसंबर 2020 को राष्ट्र को समर्पित किया था। डब्ल्यूडीएफसी और ईडीएफसी (सोननगर-दानकुनी पीपीपी खंड को छोड़कर) का 2,800 किमी लंबा भाग जून 2022 तक क्रियाशील हो जाएगा।

हाल ही में, 29 मई को 99.38 किमी प्रति घंटे की गति से मालगाड़ियाँ ईडीएफसी पर दौड़ी थीं। अधिकारियों ने बताया था कि मालगाड़ियाँ राजधानी ट्रेनों की तुलना में तेज़ गति से चल रही हैं। तीन ट्रेनें 99 किमी प्रति घंटे से अधिक की औसत गति से चलीं, जो ईडीएफसी के 331 किलोमीटर लंबे न्यू खुर्जा-न्यू भाऊपुर खंड पर सबसे तेज़ गति है।

वहीं, डब्ल्यूडीएफसी पर 89.5 किमी प्रति घंटा की अधिकतम गति अब तक दर्ज की गई है। शुरू हो चुके खंडों पर अब तक कुल 4,000 से भी अधिक ट्रेनें दोड़ चुकी हैं। ईडीएफसी पर 3,000 से अधिक तो डब्ल्यूडीएफसी पर 850 से अधिक ट्रेनें परिचालित हैं।

डीएफसीसी ने सूचना प्रणाली के लिए एक आईटी समाधान भी विकसित किया है जो ट्रेन परिचालन की रियल-टाइम निगरानी करेगा और डीएफसी नेटवर्क पर दौड़ने वाली ट्रेनों की पल-पल की खबर रहेगी। इससे समय-सारिणी के अनुसार ट्रेनें चल सकेंगी।

डीएफसी नेटवर्क पर प्रयोग में लाई जाने वाली विभिन्न ट्रैक प्रबंधन प्रणालियों जैसे एल्सटम, हिताची, क्योसान, साइमन्स, आदि से इसे एकीकृत किया जा सकता है। इसकी सहायता से कोई भी असमान घटना तुरंत रिपोर्ट हो सकेगी जिससे किसी भी अनहोनी को रोकने में सहायता मिलेगी।

अरुण कुमार दास रेलवे के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनसे akdas2005@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।