इन्फ्रास्ट्रक्चर
सड़क निर्माण प्रतिदिन 40 किलोमीटर होगा मार्च तक, जानें गडकरी ने और क्या कहा

स्वराज्य द्वारा आयोजित इंफ्रानिर्भर वेबिनार शृंखला में केंद्रीय सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार (25 फरवरी) को भारत में एक्सप्रेसवे और राजमार्ग के लिए विज़न बताया जिसके तहत भारत राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के माध्यम से 1.11 लाख करोड़ रुपये का निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर पर करेगा।

“कोविड के बावजूद अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 तक 8,745 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई गईं जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 7,925 किलोमीटर लंबी सड़कें बनी थीं।”, गडकरी ने बताते हुए आशा व्यक्त की कि वे प्रतिदिन 40 किलोमीटर सड़कें बनाने का लक्ष्य मार्च तक पूरा करेंगे।

एनएचएआई और मंत्रालय के लिए उन्होंने सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण व अन्य अनुमतियों को बताया। साथ ही कहा कि परियोजना को छोटे-छोटे पैकेज में बाँटकर वे भारतीय कॉन्ट्रैक्टर की भागीदारी प्रोत्साहित करना चाहते हैं जो आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुकूल होगा।

अच्छी सड़कों से यात्रा समय को 20-25 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है, गडकरी ने कहा। फास्टैग के कारण टॉल संग्रह 15 प्रतिशत तक बढ़ने का दावा भी उन्होंने किया। तकनीक के उपयोग को आवश्यक मानते हुए गडकरी ने बताया कि उनकी योजना है कि जीपीएस तकनीक के माध्यम से टोल नाकों से मुक्त हुआ जा सके।

सड़क क्षेत्र में सरकार ने 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति दे दी है, मंत्री ने बताया। 35 स्थानों को चिह्नित किया गया है जहाँ मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क बनाए जाएँगे। भारतमाला योजना के तहत 2,950 किलोमीटर लंबी सड़कों का काम सौंपा जा चुका है, गडकरी ने बताया।

दिल्ली-मेरठ राजमार्ग का उद्घाटन शीघ्र ही किया जाएगा। दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से दोनों शहरों की दूरी मात्र दो घंटे में पूरी की जा सकेगी। अमृतसर-जामनगर और दिल्ली-अमृतसर-कटरा राजमार्ग पर कार्य भी शीघ्र ही शुरू होगा। एनएचएआई की योजना 48,000 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाने की है।

उन्होंने परियोजनाओं के बदले पेड़-पौधे लगाने के लिए हो रहे काम पर असंतोष व्यक्त किया। 2,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व जुटाने पर भी मंत्रालय काम कर रहा है। स्टील फाइबर के उपयोग से लातूर में बन रहे पुल की लागत को 20-25 प्रतिशत तक कम किया जा सकेगा।

इससे उन्हें अपेक्षा है कि स्टील उद्योग में काम कर रहे लोगों के लिए अवसर खुलेंगे। दूसरा यह कि वे कार्बन स्टील के विकल्प का भी परीक्षण कर रहे हैं। क्रैश बैरियर के लिए वे बाँस के उपयोग की संभावनाएँ भी तलाश रहे हैं क्योंकि वर्तमान में क्रैश बैरियर पर प्रति 1,000 किलोमीटर सड़क के लिए 4,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि बाँस से खर्चा मात्र 400-500 करोड़ रुपये का हो जाएगा।

मंत्रालय के बिट्युमीन के आयात को अनुमति दिलाने पर भी विचार कर रहा है ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े। सड़क सुरक्षा के लिए मंत्रालय ने 2030 तक 50 प्रतिशत दुर्घटना कम करने का लक्ष्य रखा है और गडकरी ने अन्य राज्यों से तमिलनाडु मॉडल अपनाने का निवेदन किया।

सड़क चिह्नों पर उन्होंने वैज्ञानिक अध्ययन की बात की। सड़क सुरक्षा ऑडिट का काम वे सरकारी अभियांत्रिकी, विशेषकर आईआईटी को देने पर विचार कर रहे हैं, ताकि उन्हें अनुभव प्राप्त हो और छात्रों को कुछ भत्ता भी मिले। सड़क बनाने में उन्होंने पानी का कम उपयोग करने के लिए विकल्प तलाशने को कहा।

ज़ोजिला सुरंग बनाने में पहाड़ कटाई से जो पत्थर निकला, उसी से सड़क बनाई गई जिससे गडकरी का दावा है कि 5,000 करोड़ रुपये बचाए जा सके। उन्होंने वाहनों के लिए विद्युत और बायो सीएनजी को बढ़ावा देने की बात कही और उदाहरण दिया कि ट्रक को एलएनजी में परिवर्तित करने का जितना खर्चा आता है, उतना दो वर्ष में ही बचाया जा सकता है।

सार्वजनिक परिवहन के कई क्षेत्र सड़क मंत्रालय के पास हैं जिसके लिए गडकरी का जोड़ विद्युत ईंधन को बढ़ावा देने पर है। मुंबई-दिल्ली राजमार्ग में 2.5 किलोमीटर लंबी सीमेंट कॉन्क्रीट सड़क 24 घंटों में बनाई गई, यह रिकॉर्ड मंत्री ने साझा किया और कहा कि तकनीक हमारे पास है, ज़ोर देना है तो लागत कम करने पर।