इन्फ्रास्ट्रक्चर
जन आरोग्य अभियान 1.3 अरब भारतीयों की सेहत के लिए हो सकता है महत्वपूर्ण
जन आरोग्य अभियान

प्रसंग
  • जन आरोग्य अभियान के लिए बनाए गए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म का सबसे अच्छा उपयोग कैसे किया जाए?

जन आरोग्य अभियान, जिसे पहले आयुष्मान भारत के नाम से जाना जाता था, उन 50 करोड़ भारतीयों के लिए एक जरूरत और उम्मीद की एक किरण है जिनके लिए स्वास्थ्य देखभाल आज भी एक चुनौती बनी हुई है। जन आरोग्य अभियान अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों से अलग है, जहाँ इसकी सबसे अहम समस्या इसके सबसे बड़े अवसर में निहित है और वह है महत्वपूर्ण पैमाना।

केन्द्र सरकार के साथ राज्य सरकारों और सूचना प्रौद्योगिकी के बुनियादी ढाँचे के सहयोग तथा समर्थन के बिना भारत जैसे देश में एक स्वास्थ्य कार्यक्रम में 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों या 50 करोड़ लोगों को शामिल करना नामुमकिन है।

आबादी को मद्देनजर रखते हुए, जन आरोग्य अभियान संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में 1.6 गुना, पाकिस्तान की तुलना में 2.5 गुना, जापान की तुलना में 4 गुना, जर्मनी की तुलना में 6 गुना, फ्रांस की तुलना में 8 गुना और श्रीलंका की तुलना में 25 गुना ज्यादा बड़ा है। यूरोपीय संघ अपने हर नागरिक के लिए इसी तरह की योजना शुरू करने जा रहा है लेकिन परिचालन पैमाने पर वह भारत की तुलना में 25 प्रतिशत छोटी होगी।

राज्य या केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई सभी सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं के लिए समावेश लगातार एक चुनौती रहा है। दशकों से बिचौलियों ने लाभार्थियों का दोहन किया है। उच्चतम स्तर पर केंद्र सरकार के नौकरशाहों से लेकर राज्य स्तर पर एक मंत्री तक और गाँवों में अंतिम लाभार्थियों के लिए जिम्मेदार स्थानीय अधिकारियों तक बिचौलियों ने लाभ हंस्तान्तरण श्रृंखला में छेड़छाड़ करके जन कल्याण योजनाओं में लूट मचाने की पूरी कोशिश की है।

गलत इरादे और धन की लूट के बावजूद भी जन कल्याण नीतियां भारत के राजनीतिक भाषणों में साधक की भूमिका में रही हैं। आज, तकनीकी प्लेटफॉर्म और डिजिटलीकरण की शुरूआत के साथ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण कार्यक्रम में आधार और जन धन योजना का अहम योगदान रहा है।

डेटा सरकार की दक्षता बढ़ाने और लोगों के लिए एक योजना की प्रभावशीलता की कुंजी  है। डिजिटलीकरण के इस युग में, आबादी की विस्तृत समझ के बिना, किसी भी सार्वजनिक नीति में संसाधनों का वितरण उसको पूरा करने के लिए जोर देने जैसा है।

यहीं जन आरोग्य अभियान अपना महत्व दर्शाता है।

दशकों से भारत ने अपने नागरिकों के लिए क्षमता निर्माण करने के तरीकों पर ध्यान दिया है। 1960 में हरित क्रान्ति से लेकर 2020 में ऊर्जा के अक्षय स्रोतों तक भारत क्षमता निर्माण के लिए हमेशा वैश्विक नेताओं की मदद का तलबगार रहा है। जन आरोग्य अभियान इसको बदल सकता है।

एक राष्ट्र, क्षमता निर्माण के लिए दो तरीकों से कामयाब हो सकता है।

पहला है, संयुक्त राष्ट्र। 1950 से विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारी निवेश करते हुए अमेरिका ने हमें वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) दिया, जिसके दम पर आज गूगल, अमेज़न और फेसबुक जैसी नामचीन कंपनियाँ दुनिया पर राज कर रही हैं। वर्ल्ड वाइड वेब के साए में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी कंपनियों ने पेरिफेरल और कम्प्यूटर उपकरणों में निवेश करके दुनिया भर के बाजारों पर अपना कब्जा कर लिया है।

ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) पर निर्भरता से ही अमेरिका की क्षमता निर्माण की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। शेयर बाजारों से लेकर अंतरिक्ष एजेंसियों तक, दुनिया भर में इस्तेमाल किए जाने वाले कंप्यूटर एक सेकेण्ड के अरबवें हिस्से का मापन करने के लिए जीपीएस का उपयोग कर रहे हैं। हाल ही में जीपीएस में एक बग (गड़बड़ी) आ जाने से क्षुद्रग्रह ट्रैकिंग उपग्रह ऑफलाइन हो गया था जिसके कारण बीबीसी रेडियो ने अपने सिग्नल खो दिए थे एवं और भी कई संचार त्रुटियाँ आ गई थीं। 2022 तक 7 अरब से अधिक उपकरण जीपीएस पर निर्भर होंगे।

दूसरा है, चीन की तरह। निर्माण उद्योगों में राज्य समर्थित निवेश के साथ चीनी लोग क्षमता निर्माण करने में सफल रहे हैं। आज स्मार्टफोन से लेकर दिवाली की लाइटों तक सस्ते चीनी उत्पादों ने भारतीय बाजारों पर धाक जमा ली है। रिन्यूएबल इंडस्ट्री में उदार निवेश के साथ, चीन अब अपने अनिवार्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादों के माध्यम से पूरी दुनिया पर हावी होने का लक्ष्य बना रहा है। चीन की क्षमता निर्माण की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चीनी फ़ोनों के बिना भारतीय बाजार अधूरे नज़र आयेंगे। इनकी अनुप्लब्धता मात्र ही 10 में से 9 लोगों को आपसी पहुँच से वंचित करने के लिए पर्याप्त है।

हालांकि, कई कारणों से भारत इनमें से किसी में भी उत्कृष्टता प्राप्त नहीं करता है।

आधार कार्यक्रम के क्रियान्वयन के साथ देश ने सार्वजनिक स्तर पर संभावित शक्ति देखी है । यह चार घटकों के आधार पर, बैंकिंग, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और जल्द ही स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में भी, उपस्थिति-रहित, कागज-रहित, नगद-रहित और सहमति-आधारित लेनदेन को सुनिश्चित करते हैं। यह भारत के लिए सार्वजनिक मंचों का निर्माण करने का अवसर है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है।

अगला, भारत को अपने स्वयं के कार्यक्षेत्र का निर्माण करने के लिए इन घटकों का उपयोग करने की जरूरत है। देखा जाए तो यह कार्यक्षेत्र किसी के स्मार्टफोन में एक ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, जन धन योजना, और अब जन आरोग्य अभियान ऐसे ऐप्स हैं जो कार्यक्षेत्र या इस ऑपरेटिंग सिस्टम के संसाधनों के उपयोग के लिए एक दूसरे में व्याप्त हैं। यदि अमेरिका का कार्यक्षेत्र वर्ल्ड वाइड वेब और चीन का कार्यक्षेत्र विनिर्माण रहा है तो उपर्युक्त घटकों के आधार पर भारत का कार्यक्षेत्र सार्वजनिक मंच होना चाहिए।

आलोचक तर्क दे सकते हैं कि किसी भी सार्वजनिक मंच के तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को आसानी से दुनिया भर में दोहराया जा सकता है। हालांकि, यहाँ अन्वेषकों को सेवा-आधारित तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, जो सतत सेवा के रूप में प्लेटफ़ॉर्मों के साथ सहायता प्राप्त करने के लिए निजी क्षेत्र पर निर्भर है, से परे देखना चाहिए। इनका उद्देश्य उन उत्पादों के रूप में प्लेटफार्म बनाने का होना चाहिए जिनका निर्माण राष्ट्रीय, राज्य या स्थानीय स्तर पर किसी योजना के लिए कुछ घटकों के आधार पर किया जा सकता है। सेवा आधारित दृष्टिकोण से उत्पाद आधारित दृष्टिकोण की ओर परिवर्तन किया जाना चाहिए।

इस परिवर्तन में डेटा महत्वपूर्ण होगा। 1.3 अरब (1.3 बिलियन) की आबादी के साथ जन आरोग्य अभियान जैसी जन कल्याण नीतियों को सार्वजनिक मंचों की योजना, कार्यान्वयन और सुधार के बारे में सबक देना चाहिए। किसी भी सार्वजनिक मंच की सफलता व्यापक रूप से इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने बेहतर तरीके से यह उस योजना का सहयोग करता है।

विश्व को शिक्षा देने के लिए डेटा एनालिटिक्स द्वारा अन्वेषकों को डेटा और सार्वजनिक मंचों के बारे में महत्वपूर्ण सीखों की पेशकश करने में सक्षम बनाया जाना चाहिए। यदि अमेरिका जीपीएस के माध्यम से दुनिया पर काबू पा सकता है जिसे पहले सैन्य उपयोग के लिए ही बनाया गया था, तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि भारत दुनिया भर के देशों के लिए, विशेषकर अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और मध्य पूर्व, जहाँ वे अपने संसाधनों को सबसे लाभदायक तरीके से उपयोग करना चाहेंगे, में सार्वजनिक मंच बनाने के लिए जन आरोग्य अभियान से सबक क्यों नहीं ले सकता।

हालांकि सार्वजनिक मंचों में भारत के क्षमता निर्माण के लक्ष्य के लिए जन आरोग्य अभियान को एक आदर्श प्रयोगात्मक क्षेत्र के रूप में क्यों क्रियान्वित होना चाहिए?

पहला, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के विपरीत, जन आरोग्य अभियान की प्रकृति का कोई आकार नहीं है यानी कि इसमें कई प्रभावित करने वाले कारक शामिल हैं। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के तहत, लाभार्थियों को किसी एक वस्तु के लिए संसाधनों के साथ मदद दी गयी, उदाहरण के लिए उर्वरकों की खरीददारी करने के लिए धन। जन आरोग्य के तहत परिवार को स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाता है लेकिन इसमें यह नहीं समझना चाहिए कि कोई नकद राशि का भुगतान होगा।

दूसरा, जन आरोग्य अभियान से प्राप्त डेटा अनुपात में बड़ा होगा। अपने 150,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों, 500 मिलियन लाभार्थियों, सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भागीदारी, माध्यमिक और तृतीयक अस्पतालों में भर्तियों के लिए कवर, पहले से मौजूद बीमारियों के लिए कवर और ऐसे ही सैकड़ों अन्य पहलुओं के साथ, जन आरोग्य अभियान डेटा एकत्र करेगा जिसे सार्थक ज्ञान में बदलने की आवश्यकता होगी। आदर्श रूप में, सरकार को 2019 के बाद डेटा के लिए एक मंत्रालय स्थापित करने पर विचार करना चाहिए।

तीसरा है आधार, जिसमें 99 प्रतिशत आबादी पर पकड़ के बावजूद कोई सार्थक अंतर्दृष्टि नहीं है, क्योंकि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण या जनधन योजना जैसी सेवाओं को जोड़ने के लिए यह एक घटक से कहीं अधिक है। 500 मिलियन भारतीयों को कवर करने के बाद अपने अगले लक्ष्य शेष भारत या दुनिया के एक छठे हिस्से यानी 800 मिलियन भारतीयों को कवर करने के लिए जन आरोग्य अभियान के पास पहले से ही पर्याप्त अंतर्दृष्टि होगी।

जन आरोग्य अभियान को दुनिया के लिए सार्वजनिक मंच बनाने के मार्ग के रूप में देखने के अलावा, इसके दर्शन के अंतर्निहित उद्देश्यों को देखना आवश्यक है। जन धन योजना के माध्यम से घर-घर को बैंक तक पहुँचाकर, भारत ने एक बुनियादी ढाँचा बनाया है जो ग्रामीण क्षेत्रों में ‘व्यक्तिगत क्रेडिट अनुभव’ सुनिश्चित कर सकता है।

जन आरोग्य अभियान का उद्देश्य यह है कि किसी विशेष जिले को इसकी भौगोलिक स्थिति के आधार पर, कुछ निश्चित आपदाओं जैसे बाढ़ और तदनुसार व्यक्तिगत स्तर के आधार पर एक ‘व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल अनुभव’ प्रदान किया जाए।

अंत में, आगे बढ़ने का आदर्श दृष्टिकोण जन आरोग्य अभियान को एक उपचार कवरेज योजना से एक निवारक देखभाल योजना में बदलना है, जिसका यह उद्देश्य होगा कि अगले कुछ वर्षों में प्राप्त आंकड़ों का उपयोग बीमारियों को ठीक करने के लिए ही नहीं बल्कि पहले ही उस बीमारी को रोकने के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल अनुभव को किसी व्यक्ति के रोगमुक्त जीवन के लिए पोषण प्रबंधन, रोग नियंत्रण, निवारक देखभाल और अन्य पहलुओं के साथ जोड़ा जा सकता है। इसके लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से कुछ होशियार लोगों के योगदान की आवश्यकता होगी।

आगे बढ़ते हुए, सरकार में एजेंसियों का उद्देश्य व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल अनुभव, क्रेडिट अनुभव और शैक्षिक अनुभव पर ध्यान देना होना चाहिए। इन तीनों का समावेश जनसंख्या को स्वस्थ, शिक्षित और सबसे महत्वपूर्ण यह कि आत्म निर्भर बनाते हुए एक व्यापक स्तर पर इसकी मदद कर सकता है और 2030 के आस पास तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के भारत के सपने को भी साकार कर सकता है। प्रक्रिया में निवेश किया जाना चाहिए।

लंबे समय से, हमारी अधिकांश आबादी बीमारियों से जूझती रही है क्योंकि वे इलाज का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं। जन आरोग्य अभियान का तत्काल लक्ष्य है इस आबादी को स्वास्थ्य देखभाल के अभाव की चिंता से मुक्त करना और इसने एक रोग मुक्त समाज बनाने के लिए रोगग्रस्त समाज से 500 मिलियन लोगों (या विश्व जनसंख्या का 7 प्रतिशत) का नमूना लिया है।

जन आरोग्य अभियान को और अधिक बेहतर बनाने के लिए, इसे न केवल 5,00,000 रुपये के कवर या 500 मिलियन भारतीयों के बीमा के बारे में होना चाहिए, बल्कि यदि आप इसके पीछे के दर्शन को समझने के इच्छुक हैं तो यह एक योजना से परे बहुत कुछ है।

तुषार गुप्ता स्वराज्य के एक वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वह @tushjain15 पर ट्वीट करते हैं।