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हरियाणा सरकार द्वारा सरस्वती को पुनर्जीवित करने के लिए नदियों को जोड़ने की योजना

हरियाणा की प्राचीन सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयास में हरियाणा सरकार एक बैराज, बांध और जलाशय की योजना बना रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने कैनथल आपूर्ति चैनल के माध्यम से मारकंडा और सरस्वती नदियों को जोड़ने के लिए एक परियोजना की भी योजना बनाई है। यह परियोजना लगभग 894 हेक्टेयर बाढ़ के पानी को सरस्वती जलाशय में मोड़ने के उद्देश्य से बनी है।

चल रहे अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव -2021 के दौरान सोमवार (15 फरवरी) को सरस्वती नदी-नए परिप्रेक्ष्य और विरासत विकास विषय पर एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा, “सरस्वती नदी के पुनरुद्धार की परियोजना ऐसे सभी स्थानों को विकसित करने के लिए लाभदायक होगी, जहाँ सरस्वती नदी और इसकी विरासत के प्रमाण हैं।”

मनोहर लाल खट्टर ने विद्या भारती संस्कृत संस्थान और हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा, “सरस्वती नदी के अस्तित्व के बारे में सभी शंकाओं का समाधान किया गया है और इसके प्रवाह के लिए वैज्ञानिक प्रमाण पाए गए हैं। महाभारत में प्राप्त वर्णन के अनुसार, सरस्वती की उत्पत्ति आदिबद्री नामक स्थान से हुई, जो हरियाणा में यमुनानगर के ठीक ऊपर और शिवालिक पहाड़ियों के ठीक नीचे है। आज भी लोग इस स्थान को तीर्थस्थल मानते हैं।”

उन्होंने कहा, “अनुसंधान, दस्तावेजों, रिपोर्टों और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर यह पुष्टी  हो गई है कि सरस्वती नदी अब भी आदिबद्री और गुजरात में कच्छ से भूमिगत बह रही है। सरस्वती नदी के पुनरुद्धार से क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और भूजल रिचार्जिंग में सुधार होगा।”

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा, “आदिबद्री से सिरसा तक कुरुक्षेत्र, पिहोवा, हिसार, राखी-गढ़ी, फतेहाबाद और सिरसा में राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन सर्किट के विकास से इन क्षेत्रों में तीर्थ यात्रा के नए मौके बनेंगे। इसके परिणामस्वरूप रोजगार और व्यापार के नए मौके पैदा होंगे। सरस्वती के साथ रिवरफ्रंट विकास से मूलभूत सुविधाओं और क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इसके अलावा, सरस्वती नदी के तट पर वनीकरण से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।”