इन्फ्रास्ट्रक्चर
गांधीनगर कैपिटल स्टेशन पुनर्विकास के बाद कैसे बन गया अत्याधुनिक और विशेष

स्टेशन पुनर्विकास योजना की ओर एक बड़ा कदम है गांधीनगर स्टेशन जिसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (16 जुलाई) को इसका उद्घाटन किया। गांधीनगर कैपिटल स्टेशन का पुनर्विकास निवेश और रोजगार अवसरों का एक ऐसा चक्र शुरू करेगा जो गुजरात की राजधानी की अर्थव्यवस्था को बल देगा।

भारत में यह अपने तरह की पहली परियोजना है जो सीमित जगह की समस्या से जूझ रहे मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी इस प्रकार के विकास का मार्ग खोलती है। योजना है कि खाद्य और मनोरंजन प्लाज़ा जैसी कई खुदरा दुकानें इस क्षेत्र में खुलें जो यात्रियों के साथ-साथ स्थानीय जनसंख्या की माँगों की भी पूर्ति करें।

बिग बाज़ार और शॉपर्स स्टॉप जैसे बड़े खुदरा दुकान व्यापारियों ने भी यहाँ पर अपनी छोटी दुकान खोलने में रुचि दिखाई है जिससे स्टेशन पर यात्री और स्थानीय जनसंख्या सरलता से खरीददारी कर सकेंगे। यह पुनर्विकसित स्टेशन “सिटी सेंटर रेल मॉल” की भूमिका निभाएगा जहाँ इसपर उपलब्ध कई सुविधाओं में से एक यात्रा भी होगी।

यह स्टेशन भविष्य के लिए तैयार है और जब यात्रियों की संख्या बढ़ जाएगी तब इन सुविधाओं का लाभ अतिरिक्त यात्री भी उठा सकेंगे। इस अद्भुत परियोजना को गुजरात सरकार और रेलवे ने मिलकर पूरा किया है।

भारतीय रेलवे स्टेशन विकास निगम (आईआरएसडीसी) के माध्यम से गरुड़ (गांधीनगर रेलवे व शहरी विकास निगम) नामक एक संयुक्त उद्यम कंपनी स्थापित की गई थी। इस स्टेशन पर पर्याप्त प्रतीक्षा स्थल, बारिश, धूप, आदि से बचाव के लिए स्तंभ रहित छज्जे जैसी आधुनिक सुविधाएँ हैं।

बहु-उपयोगी प्रतीक्षा हॉल वातानुकूलित है, शिशुओं को स्तनपान कराने के लिए विशेष कक्ष, आधुनिक शौचालय और अनेक संप्रदायों के लिए प्रार्थना कक्ष जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ भी हैं। कला गलियारा, विषय आधारित मुख लाइटिंग, आदि इस स्टेशन को और आकर्षक बनाते हैं।

यात्रियों को संतुष्ट करने के साथ-साथ ये सारी सुविधाएँ देश में पहली होने की ख्याति भी इस स्टेशन को देंगी। यदि अतिरिक्त स्थान को छोड़ दें तो यह स्टेशन व्यस्ततम घंटे में 1,500 यात्रियों को सुविधाएँ दे सकता है। अतिरिक्त स्थान को जोड़कर स्टेशन की व्यस्ततम घंटे की क्षमता 2,200 यात्रियों तक पहुँच जाती है।

इस अभियान के तहत 125 स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य प्रगति पर है। इनमें से आईआरएसडीसी 63, तो रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) 60 स्टेशनों पर काम कर रहा है और दो स्टेशनों का दायित्व ज़ोनल रेलवे को सौंपा गया है।

अचल संपत्ति विकास के साथ-साथ 123 स्टेशनों के पुनर्विकास पर कुल 50,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। पुनर्विकास के बाद ये स्टेशन दिव्यांगजनों की सुविधाओं का ध्यान रखने में भी सक्षम होंगे क्योंकि इनमें उचित लिफ्ट और रैंप सुविधाएँ होंगी।

गांधीनगर स्टेशन पर दृष्टिहीनों की सहायता के लिए स्पर्श-संबंधी फ्लोर लगाए गए हैं। इसके अलावा स्टेशन पोर्टलैंड पोज़ोलाना सीमेन्ट, राख से बनी ईटों, आदि जैसी सस्टेनेबल सामग्रियों का उपयोग करके बनाया गया है जो प्राकृतिक पर्यावरण के पक्ष में है।

ऊर्जा कुशल डिज़ाइन से पानी और बिजली की बचत की जा सकेगी, वर्षा जल संचय और पानी के पुनः उपयोग के लिए भी व्यवस्थाएँ हैं। अभियांत्रिकी, खरीद और निर्माण (ईपीसी) मॉडल पर बना गांधीनगर रेलवे स्टेशन, पुनर्विकास के लिए इस मॉडल को अपनाने वाला भारतीय रेलवे का पहला स्टेशन है।

स्टेशन की लाइटिंग

ऊँची इमारत के लिए बड़ी नींव और लंबी छतें कुछ अभियांत्रिकी चुनौतियाँ थीं। इन सबका सफलतापूर्वक सामना करके यह स्टेशन बना है जिसमें सब-वे भी हैं। इस स्टेशन के निर्माण से मिली सीखों का उपयोग भीड़ वाले क्षेत्रों में जटिल परियोजनाओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा।

इस स्टेशन की लाइटिंग 32 विषयों पर तैयार की गई है जिसे प्रतिदिन बदला जा सकता है। भारतीय रेलवे के स्टेशन में ऐसा पहली बार हुआ है। लाइटिंग व्यवस्था इस पुनर्विकसित रेलवे स्टेशन को एक बड़े पटल के रूप में सोचकर तैयार की गई है।

एलईडी लाइट अपना रंग प्रतिदिन बदल सकती है जो कोरी दीवारों को रंग देकर सूर्यास्त के बाद उन्हें आकर्षक बना देगी। डान्सिंग लाइट एक ऐसा आकर्षण है जिसे देखने के लिए आम नागरिक स्टेशन आएगा। मुख लाइटिंग का विसतार रेलवे स्टेशन के सामने स्थित डांडी कुटीर तक होगा।

77 मीटर लंबी डांडी कूटीर अहमदाबाद/गांधीनगर की सबसे ऊँची इमारत है जिसपर लाइटिंग इसे एक दर्शनीय स्थल बना देगा। डांडी कुटीर आने वाले गांधीनगर के लोग और पर्यटक पुनर्विकसित स्टेशन के बाहर बने घूमने वाली हरी पट्टी क्षेत्र से इन लाइटिंग का आनंद ले सकेंगे।

गांधीनगर कैपिटल रेलवे स्टेशन के प्रवेश में टिकट सुविधा और काफी बड़ा खाली स्थल है, आधुनिक बाहरी रूप और लैंडस्केप, थीम आधारित लाइटिंग, सीधा प्रसारण वाली एलईडी दीवार और डिस्प्ले लॉन्ज से लैस समर्पित विशेष कला गलियारा इसे आकर्षक बनाते हैं।

प्रतीक्षा स्थल में 500 यात्री बैठ सकेंगे। प्लैटफॉर्म आपस में सब-वे के माध्यम से भी जुड़े होंगे और उपयुक्त पार्किंग सुविधाएँ हैं। रेलवे के लिए स्टेशन पुनर्विकास प्राथमिकता है और गांधीनगर के अलावा हबीबगंज और बेंगलुरु में कार्य जारी है। अयोध्या, बिजवासन, गोमतीनगर, अजनी और सफदरगंज स्टेशनों का भी पुनर्विकास किया जा रहा है।

अरुण कुमार दास रेलवे के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनसे akdas2005@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।